तमिलनाडु की 'ताइमामन थंगा मोधिरम' योजना में बड़ी ढील, अब दूसरे राज्यों में बसी तमिल महिलाओं को भी मिलेगी सोने की अंगूठी
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु सरकार ने 7 अक्टूबर 2026 को अपनी महत्वाकांक्षी 'ताइमामन थंगा मोधिरम' योजना के पात्रता नियमों में महत्वपूर्ण संशोधन किया है, जिसके तहत अब उन तमिल मूल की महिलाओं को भी लाभ मिलेगा जो विवाह के बाद दूसरे राज्यों में बस गई हैं और प्रसव के लिए तमिलनाडु लौटती हैं। इस योजना के अंतर्गत राज्य के सरकारी अस्पतालों में जन्म लेने वाले नवजात शिशुओं को एक ग्राम सोने की अंगूठी भेंट की जाती है।
योजना की पृष्ठभूमि और शुरुआती नियम
मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने इस योजना की शुरुआत 28 सितंबर 2026 को की थी। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा जारी प्रारंभिक दिशा-निर्देशों में केवल तमिलनाडु में स्थायी रूप से रहने वाली माताएं ही इस योजना का लाभ लेने की पात्र थीं। हालाँकि, इस शर्त के कारण कई ऐसी महिलाएं योजना से वंचित हो रही थीं, जो मूल रूप से तमिलनाडु की हैं लेकिन विवाहोपरांत अन्य प्रदेशों में बस गई हैं।
संशोधित पात्रता नियम
नए नियमों के अनुसार, वे महिलाएं भी योजना की लाभार्थी होंगी जिनका जन्म तमिलनाडु में हुआ हो, भले ही वे अभी किसी अन्य राज्य में निवास कर रही हों। इसके लिए अनिवार्य शर्त यह है कि उनके माता-पिता तमिलनाडु में स्थायी रूप से निवासरत हों और इसका वैध दस्तावेजी प्रमाण प्रस्तुत किया जाए। यह कदम उन वास्तविक स्थितियों को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है, जिनमें महिलाएं प्रसव के लिए अपने मायके तमिलनाडु लौटती हैं।
उमा महेश्वरी का मामला बना बदलाव की वजह
इस नीति-परिवर्तन के पीछे उमा महेश्वरी का मामला एक महत्वपूर्ण उदाहरण के रूप में सामने आया। वे विवाह के बाद कर्नाटक के मैसूर जिले के उदयगिरि में अपने पति के साथ रहती हैं, जबकि उनके माता-पिता तमिलनाडु के शिवगंगा जिले के कराईकुडी में रहते हैं। उमा महेश्वरी प्रसव के लिए तमिलनाडु लौटी थीं और उन्होंने 17 सितंबर 2026 को कराईकुडी सरकारी मुख्यालय अस्पताल में सिजेरियन ऑपरेशन के जरिए बच्चे को जन्म दिया था। चूँकि वे तमिलनाडु की स्थायी निवासी नहीं थीं, इसलिए शुरुआत में उन्हें योजना का लाभ नहीं दिया जा सका।
पात्रता नियमों में संशोधन के बाद 7 अक्टूबर 2026 को कराईकुडी सरकारी मुख्यालय अस्पताल में ब्लॉक मेडिकल अधिकारी ने उनके नवजात को एक ग्राम सोने की अंगूठी प्रदान की।
पूर्व प्रभाव से लागू होंगे संशोधित नियम
सरकार ने स्पष्ट किया है कि संशोधित दिशा-निर्देश 22 जून 2026 से पूर्व प्रभाव (रेट्रोस्पेक्टिव) से लागू माने जाएंगे। यानी, इस तिथि के बाद तमिलनाडु के सरकारी अस्पतालों में जन्म लेने वाले पात्र बच्चे — जो पहले शर्तों के कारण वंचित रह गए थे — अब भी इस योजना का लाभ उठा सकते हैं।
आम जनता पर असर
यह संशोधन उन हजारों परिवारों के लिए राहत लेकर आया है जिनकी बेटियाँ विवाह के बाद अन्य राज्यों में बस गई हैं, लेकिन प्रसव के लिए तमिलनाडु लौटती हैं। गौरतलब है कि तमिलनाडु से बड़ी संख्या में लोग बेंगलुरु, हैदराबाद, मुंबई और दिल्ली जैसे महानगरों में कार्यरत हैं — ऐसे में यह नीति उन परिवारों तक योजना की पहुँच सुनिश्चित करती है जो पारंपरिक रूप से मायके में प्रसव को प्राथमिकता देते हैं। आगे देखना होगा कि राज्य सरकार दस्तावेजी सत्यापन की प्रक्रिया को कितनी सुगम और पारदर्शी बनाती है, ताकि पात्र लाभार्थी बिना किसी अनावश्यक बाधा के योजना का फायदा उठा सकें।