तमिलनाडु में गोल्ड लोन सीमा बढ़कर ₹10,000 प्रति ग्राम, सहकारी बैंकों से मिलेगा अधिक कर्ज
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु के सहकारिता विभाग ने राज्य के सहकारी बैंकों और समितियों द्वारा दिए जाने वाले गोल्ड लोन की अधिकतम सीमा ₹7,000 प्रति ग्राम से बढ़ाकर ₹10,000 प्रति ग्राम कर दी है। 6 अक्टूबर 2026 को लागू इस निर्णय का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्गों को संस्थागत ऋण तक आसान पहुँच देना और निजी साहूकारों पर उनकी निर्भरता कम करना है। यह बदलाव ऐसे समय आया है जब राज्य सरकार ने हाल ही में 'थाई मामन थंगा मोथिरम थिट्टम' योजना शुरू की है।
मुख्य घटनाक्रम
अधिकारियों के अनुसार, पहले सहकारी बैंक और समितियाँ गिरवी रखे गए आभूषणों की कीमत का 75 प्रतिशत तक ऋण देती थीं, परंतु अधिकतम सीमा ₹7,000 प्रति ग्राम थी। अब इस सीमा को बढ़ाकर ₹10,000 प्रति ग्राम किया गया है, जो अन्य ऋणदाताओं की दरों के करीब है। उल्लेखनीय है कि 6 अक्टूबर 2026 को सोने की बाज़ार कीमत ₹13,675 प्रति ग्राम थी।
गौरतलब है कि 6 महीने के भीतर चुकाए जाने वाले ऋण के मामले में पहले भी मासिक औसत सोने के मूल्य का 75 प्रतिशत तक कर्ज देने की अनुमति थी और उसमें प्रति ग्राम की कोई ऊपरी सीमा नहीं थी।
अन्य ऋणदाताओं से तुलना
वर्तमान बाज़ार में निजी वाणिज्यिक बैंक ₹9,600 से ₹10,400 प्रति ग्राम, जबकि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक ₹8,800 से ₹9,300 प्रति ग्राम तक गोल्ड लोन देते हैं। निजी गिरवी कारोबारी, गोल्ड लोन केंद्रित गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियाँ (NBFC) और ट्रेडिंग कंपनियाँ ₹10,500 से ₹11,000 प्रति ग्राम तक ऋण देती हैं। नई सीमा के साथ सहकारी संस्थान अब प्रतिस्पर्धी ऋणदाताओं के करीब आ गए हैं।
ब्याज दर के मोर्चे पर, बैंकों की गोल्ड लोन ब्याज दर 14 से 18 प्रतिशत के बीच है, जबकि सहकारिता विभाग ने पिछले वर्ष गोल्ड लोन की ब्याज दर 12 प्रतिशत से बढ़ाकर 13 प्रतिशत की थी — जो अभी भी बैंकों की दरों से कम है।
'थाई मामन थंगा मोथिरम थिट्टम' से संबंध
यह निर्णय राज्य सरकार की 'थाई मामन थंगा मोथिरम थिट्टम' योजना की शुरुआत के करीब एक सप्ताह बाद आया है, जिसके तहत सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में जन्म लेने वाले नवजात शिशुओं को 22 कैरेट की एक ग्राम सोने की अंगूठी दी जाती है। सरकारी अस्पतालों में प्रतिवर्ष औसतन लगभग 4.4 लाख प्रसव होते हैं, जिससे इस योजना के तहत हर साल करीब 441 किलोग्राम सोना बाज़ार में आने की संभावना है।
PACCS और ब्याज दर संरचना पर फैसला
सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार कार्यालय में आयोजित एक बैठक में प्राथमिक कृषि सहकारी ऋण समितियों (PACCS) के मुनाफे की सीमा 2.25 प्रतिशत तय करने का निर्णय लिया गया। साथ ही तय किया गया कि केंद्रीय सहकारी बैंकों से कैश क्रेडिट के ज़रिए वित्त पोषित PACCS के गोल्ड लोन पर ब्याज दर, उन्हीं केंद्रीय सहकारी बैंकों की शाखाओं द्वारा सीधे दिए जाने वाले गोल्ड लोन की दर से 1.25 प्रतिशत कम होगी।
आम जनता पर असर
एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, बढ़ी हुई सीमा से अधिक ग्राहक सहकारी बैंकों की ओर आकर्षित होंगे, जहाँ वे गिरवी रखे आभूषणों के बदले पहले की तुलना में अधिक राशि प्राप्त कर सकेंगे। इन निर्णयों के ज़रिए एक ओर आभूषण गिरवी रखने वाले उपभोक्ताओं को मिलने वाली ऋण राशि बढ़ाई गई है, वहीं दूसरी ओर PACCS के माध्यम से दिए जाने वाले गोल्ड लोन की लागत को भी नियंत्रित करने का प्रयास किया गया है। आगामी महीनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या इन बदलावों से सहकारी ऋण संस्थानों पर आम नागरिकों की निर्भरता वास्तव में बढ़ती है।