तिरुची दूध किसानों को नहीं मिला ₹6 बढ़ोतरी का पूरा फायदा, सहकारी समितियों पर कटौती का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु के तिरुची जिले के दुग्ध उत्पादक किसानों ने 7 अक्टूबर 2026 को शिकायत दर्ज कराई है कि राज्य सरकार द्वारा घोषित संशोधित दूध खरीद दर का पूरा लाभ उन्हें नहीं मिल रहा। सहकारी दुग्ध समितियों द्वारा प्रति लीटर कई रुपये की कटौती किए जाने से किसानों की आर्थिक स्थिति पर सीधा असर पड़ रहा है, खासकर तब जब चारे और पशु आहार की लागत पहले से बढ़ी हुई है।
मूल्य वृद्धि और विवाद की पृष्ठभूमि
तमिलनाडु सरकार ने हाल ही में गाय के दूध की खरीद दर में ₹6 प्रति लीटर की वृद्धि की, जिससे यह ₹38 प्रति लीटर से बढ़कर ₹44 प्रति लीटर हो गई। भैंस के दूध की खरीद दर ₹53 प्रति लीटर तय की गई है। यह विवाद 3 अक्टूबर को किसानों के बैंक खातों में भुगतान पहुँचने के बाद सामने आया, जब उन्हें घोषित दर से काफी कम राशि प्राप्त हुई।
किसानों का पक्ष: कटौती के आरोप
दूध उत्पादकों का आरोप है कि सहकारी दुग्ध समितियों ने उनके भुगतान में से ₹4 प्रति लीटर की कटौती कर ली, जिससे उन्हें ₹40 प्रति लीटर ही मिले। किसानों के अनुसार, जब उन्होंने कटौती का कारण जानना चाहा, तो समिति अधिकारियों ने कथित तौर पर बताया कि यह राशि कर्मचारियों के वेतन, प्रशासनिक खर्च, त्योहार बोनस और महीने के अंत में देय प्रोत्साहन राशि के लिए रोकी गई है।
किसानों को दिए गए विवरण के अनुसार, ₹1.85 प्रति लीटर वेतन और प्रशासन के लिए, ₹1.15 प्रति लीटर पोंगल बोनस के लिए, और ₹1 प्रति लीटर महीने के अंत की प्रोत्साहन राशि के लिए काटा गया। किसान प्रतिनिधियों का तर्क है कि ये सभी प्रशासनिक भार सरकार को वहन करने चाहिए, न कि उत्पादकों पर थोपे जाने चाहिए।
आविन प्रबंधन का पक्ष
तिरुची में आविन (तमिलनाडु सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ) के प्रबंधन ने कटौती के आँकड़ों को लेकर अलग ब्यौरा दिया है। प्रबंधन के अनुसार, सहकारी दुग्ध समितियों के प्रशासनिक खर्चों के लिए ₹1.75 प्रति लीटर वसूले जा रहे हैं, जबकि ₹1 प्रति लीटर किसानों को बाद में भुगतान के लिए अलग रखा जा रहा है। इस गणना के अनुसार, उत्पादकों को ₹2.75 प्रति लीटर की कटौती के बाद बैंक खातों में ₹41.25 प्रति लीटर प्राप्त होंगे।
प्रबंधन ने स्पष्ट किया कि बोनस के लिए कोई अलग कटौती नहीं की जाएगी। एकत्रित ₹1.75 में से आधी राशि समिति के परिचालन खर्चों के लिए उपयोग होगी, जबकि शेष राशि दूध उत्पादकों को बोनस के रूप में वितरित की जाएगी।
किसानों की माँगें और आर्थिक दबाव
किसान प्रतिनिधियों ने प्रति लीटर ₹1 की कटौती करके बाद में प्रोत्साहन के रूप में वापस करने की प्रक्रिया पर सवाल उठाया है। उनका कहना है कि पहले कटौती मामूली थी, लेकिन अब रोकी गई राशि से उनकी आर्थिक स्थिति पर गहरा दबाव पड़ रहा है।
गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब चारे, पशु आहार और अन्य आवश्यक वस्तुओं पर खर्च पहले से बढ़ा हुआ है। किसानों ने दुग्ध संघ से तत्काल पूरी राशि जारी करने का आग्रह किया है और सरकार से अपील की है कि समिति के प्रशासनिक खर्चों को वह स्वयं वहन करे, ताकि मूल्य वृद्धि का पूरा लाभ उत्पादकों तक पहुँच सके।
आगे क्या होगा
किसानों और आविन प्रबंधन के बीच कटौती की राशि और उसके विवरण को लेकर स्पष्ट मतभेद बने हुए हैं। यह मामला तमिलनाडु के दुग्ध क्षेत्र में सहकारी ढाँचे की पारदर्शिता और उत्पादकों के हितों की रक्षा के व्यापक सवाल को भी उजागर करता है। सरकार का अगला कदम यह तय करेगा कि मूल्य वृद्धि की घोषणा वास्तव में ज़मीनी स्तर पर कितनी असरदार साबित होती है।