तमिलनाडु: मंत्रियों के लिए ₹26 लाख, विधायकों के लिए ₹15 लाख की सरकारी कार खरीद सीमा तय
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु सरकार ने 22 अक्टूबर 2026 को एक नई राजपत्र अधिसूचना के माध्यम से मंत्रियों और विधानसभा के वरिष्ठ पदाधिकारियों के लिए सरकारी वाहन खरीद की अधिकतम सीमा ₹26 लाख तथा सामान्य विधायकों (एमएलए) के लिए ₹15 लाख निर्धारित कर दी है। यह बदलाव तमिलनाडु विधानसभा सदस्यों पर लागू यात्रा भत्ता नियमों में संशोधन के अंतर्गत अधिसूचित किया गया है, जो वाहन खरीद की सीमा, प्रक्रिया, स्वामित्व और वाहन वापसी की शर्तों को स्पष्ट करता है।
किस पदाधिकारी के लिए कितनी सीमा
नई अधिसूचना के अनुसार ₹26 लाख की सीमा केवल मंत्रियों तक सीमित नहीं है — विधानसभा अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, नेता प्रतिपक्ष और सरकारी मुख्य सचेतक (चीफ व्हिप) भी इस श्रेणी में आते हैं। इन सभी वरिष्ठ पदाधिकारियों के वाहन तमिलनाडु सरकार अपने नाम पर खरीदेगी।
शेष सभी विधायकों के लिए ₹15 लाख की सीमा लागू होगी और उनके वाहनों की खरीद विधानसभा सचिवालय के माध्यम से की जाएगी। इस प्रकार नियम पदानुक्रम के आधार पर वित्तीय पात्रता और प्रशासनिक जिम्मेदारी दोनों को अलग-अलग परिभाषित करते हैं।
निर्धारित सीमा में क्या-क्या शामिल
निर्धारित कीमत सीमा में वाहन की एक्स-शोरूम कीमत, कर (टैक्स), पंजीकरण शुल्क और मोटर बीमा प्रीमियम सहित खरीद से संबंधित सभी लागतें शामिल होंगी। इन्हें अलग से प्रतिपूर्ति नहीं की जाएगी, जिसका अर्थ है कि समस्त खर्च निर्धारित सीमा के भीतर ही समायोजित करने होंगे।
गौरतलब है कि नियमों में यह भी प्रावधान किया गया है कि वाहन खरीद की सीमा में प्रतिवर्ष 5 प्रतिशत की स्वतः वृद्धि होगी, जिससे भविष्य में अनुमत राशि मुद्रास्फीति के अनुरूप बढ़ती रहेगी।
खरीद प्रक्रिया और उत्सर्जन मानक
नई व्यवस्था के तहत सभी वाहन बीएस-6 उत्सर्जन मानकों के अनुरूप होने चाहिए। खरीद प्रक्रिया केंद्र सरकार के गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (GeM) पोर्टल के माध्यम से पूरी की जाएगी, जिससे खरीद में पारदर्शिता सुनिश्चित होगी।
यह ऐसे समय में आया है जब सरकारी खरीद में GeM पोर्टल का उपयोग केंद्र और राज्य दोनों स्तरों पर तेज़ी से बढ़ रहा है।
वाहन वापसी और उपयोग की शर्तें
मंत्रियों को पद छोड़ने, कार्यकाल पूरा होने या अयोग्यता सहित किसी भी कारण से पद समाप्त होने पर आवंटित सरकारी वाहन सरकार को वापस लौटाना होगा। यही शर्तें विधानसभा अध्यक्ष और अन्य वरिष्ठ पात्र पदाधिकारियों पर भी समान रूप से लागू होंगी।
सामान्य विधायकों के मामले में वाहन के रखरखाव, मरम्मत, ईंधन और चालक संबंधी खर्च उन्हें देय वाहन भत्ते से ही वहन करने होंगे — इन्हें खरीद सीमा से अलग रखा गया है।
प्रशासनिक आदेश
यह संशोधित सरकारी आदेश लोक विभाग की सचिव ई. सुंदरवल्ली द्वारा जारी किया गया है। नई व्यवस्था स्पष्ट करती है कि वाहन का उपयोग और स्वामित्व संबंधित पद पर बने रहने की शर्तों से सीधे जुड़ा रहेगा। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राज्य सरकार इस नियमावली को किस हद तक सुव्यवस्थित रूप से लागू करती है।