ईरानी तकनीक का प्रतीक: मध्य पूर्व के सबसे ऊंचे पुल पर हवाई हमला
सारांश
मुख्य बातें
तेहरान, 2 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। पश्चिम एशिया संघर्ष के 34वें दिन, मध्य पूर्व के सबसे ऊंचे पुल पर हवाई हमले किए गए। इससे ईरान की राजधानी तेहरान का संपर्क पश्चिमी शहर करज से पूरी तरह से समाप्त हो गया। स्थानीय मीडिया ने इस घटना की जानकारी साझा की।
फार्स न्यूज के अनुसार, प्रारंभिक आकलन में कई लोग घायल होने की सूचना है। करज के अन्य क्षेत्रों को भी निशाना बनाया गया है। यह पुल तेहरान और करज जैसे दो बड़े शहरों को जोड़ता है।
फार्स ने बताया कि बी1 पुल को मध्य पूर्व का सबसे ऊंचा पुल माना जाता है, जिसका उद्घाटन इस वर्ष की शुरुआत में किया गया था।
मेहर न्यूज एजेंसी के अनुसार, यह पश्चिमी एशिया के सबसे जटिल इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट्स में से एक है, जिसे पूरी तरह से ईरानी तकनीक से निर्मित किया गया है। यह पुल 1,050 मीटर लंबा है और इसमें आठ हिस्से हैं, जिनमें सबसे लंबा हिस्सा 176 मीटर का है, जिसमें 136 मीटर ऊंचा खंभा भी शामिल है।
उद्घाटन के दौरान कहा गया था कि बी1 पुल अंतरराष्ट्रीय आवागमन को सरल बनाएगा, जिससे क्षेत्रीय व्यापार और यात्रा को बढ़ावा मिलेगा। इस पुल का निर्माण 400 मिलियन अमेरिकी डॉलर (500 बिलियन रियाल) की लागत से हुआ था। यह ईरान की उन्नत बुनियादी ढांचे और इंजीनियरिंग में बढ़ती हुई पहचान का प्रतीक है।
इस पुल के अलावा, गुरुवार को ईरानी पाश्चर इंस्टीट्यूट पर भी हमले की खबर आई। इसे विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने एक क्रूर और अमानवीय कृत्य बताया। उन्होंने एक्स पर लिखा, "अमेरिकी-इजरायली हमलावरों ने ईरान के पाश्चर इंस्टीट्यूट पर हमला किया, जो ईरान और मध्य पूर्व का सबसे पुराना और प्रतिष्ठित सार्वजनिक स्वास्थ्य और अनुसंधान केंद्र है। इसकी स्थापना 1920 में पेरिस के पाश्चर इंस्टीट्यूट और ईरानी सरकार के बीच एक समझौते के तहत की गई थी।"