तेलंगाना में न्यूनतम मजदूरी बढ़ी: अकुशल श्रमिकों को ₹16,000, अत्यधिक कुशल को ₹20,000; 1.11 करोड़ मजदूरों को फायदा
सारांश
मुख्य बातें
तेलंगाना सरकार ने 21 मई 2026 को राज्यभर के श्रमिकों की न्यूनतम मजदूरी में बड़ी वृद्धि की घोषणा की, जो 1 जून 2026 से प्रभावी होगी और जिससे राज्य के 1.11 करोड़ मजदूरों को सीधा लाभ मिलेगा। मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने बताया कि यह निर्णय उपमुख्यमंत्री मल्लू भट्टी विक्रमार्क की अध्यक्षता में गठित कैबिनेट उप-समिति की सिफारिशों के आधार पर लिया गया है।
नई मजदूरी दरें: श्रेणीवार विवरण
संशोधित ढाँचे के अनुसार, अकुशल मजदूरों की न्यूनतम मजदूरी ₹12,750 से बढ़ाकर ₹16,000 प्रति माह कर दी गई है। अर्ध-कुशल श्रेणी के लिए यह दर ₹13,152 से संशोधित होकर ₹17,000 हो गई है।
कुशल मजदूरों के लिए न्यूनतम मजदूरी ₹13,772 से बढ़ाकर ₹18,500 की गई है, जबकि अत्यधिक कुशल श्रेणी के लिए यह ₹14,607 से बढ़कर ₹20,000 प्रति माह हो जाएगी।
तीन भौगोलिक जोन की नई संरचना
सरकार ने मजदूरी निर्धारण के लिए राज्य को तीन भौगोलिक जोन में विभाजित किया है। जोन 1 में नगर निगम क्षेत्र, जोन 2 में नगर पालिका क्षेत्र और जोन 3 में ग्रामीण क्षेत्र शामिल हैं। यह संरचना शहरी-ग्रामीण जीवन-यापन लागत के अंतर को ध्यान में रखते हुए बनाई गई है।
मुख्यमंत्री का राजनीतिक बयान
मुख्यमंत्री रेड्डी ने दावा किया कि तेलंगाना राज्य के गठन के बाद यह पहला अवसर है जब विशेष रूप से मजदूरों के कल्याण के लिए कोई ठोस निर्णय लिया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सरकार की लापरवाही के कारण मजदूरों को नुकसान उठाना पड़ा और इस वर्ग की उपेक्षा हुई।
मुख्यमंत्री ने श्रम मंत्री विवेक वेंकटस्वामी की भी सराहना की और उन्हें पूर्व केंद्रीय मंत्री जी. वेंकटस्वामी का योग्य उत्तराधिकारी बताया। उनके अनुसार, मजदूर नेता के रूप में जी. वेंकटस्वामी की विरासत को इस निर्णय से आगे बढ़ाया गया है।
युवाओं और कौशल विकास पर जोर
मुख्यमंत्री ने युवाओं को केवल सूचना प्रौद्योगिकी (IT) क्षेत्र या विदेश जाने की मानसिकता से बाहर निकलने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि तकनीकी कौशल से जर्मनी, जापान और सिंगापुर जैसे देशों में भी रोजगार के अवसर उपलब्ध हैं। इसी उद्देश्य से राज्य सरकार ने 'कौशल विश्वविद्यालय' की स्थापना की है, ताकि युवाओं को व्यावसायिक रूप से सशक्त किया जा सके।
आगे क्या
यह संशोधित मजदूरी दरें 1 जून 2026 से लागू होंगी। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में श्रमिक संगठन न्यूनतम मजदूरी में सुधार की माँग कर रहे हैं। राज्य सरकार के इस कदम की व्यापक प्रभावशीलता इस बात पर निर्भर करेगी कि अनौपचारिक क्षेत्र में नई दरों का अनुपालन कितनी कड़ाई से सुनिश्चित किया जाता है।