तेलंगाना सरकार ने कर्मचारियों के बकाए के लिए ₹1,000 करोड़ जारी किए, अप्रैल से बढ़ा मासिक आवंटन
सारांश
Key Takeaways
- तेलंगाना सरकार ने 29 अप्रैल 2026 को कर्मचारियों के बकाए के लिए ₹1,000 करोड़ जारी किए।
- उपमुख्यमंत्री मल्लू भट्टी विक्रमार्क के निर्देश पर मासिक आवंटन ₹700 करोड़ से बढ़ाकर ₹1,000 करोड़ किया गया।
- अक्टूबर 2025 तक के सभी लंबित जीपीएफ (जनरल प्रोविडेंट फंड) बकाए पूरी तरह साफ कर दिए गए।
- मेडिकल बिलों का भुगतान बिना देरी के प्राथमिकता के आधार पर करने के निर्देश जारी।
- वित्त विभाग के प्रधान सचिव संदीप कुमार सुल्तानिया ने आधिकारिक आदेश जारी किए।
तेलंगाना सरकार ने 29 अप्रैल 2026 को सरकारी कर्मचारियों के लंबित बकाए के निपटारे के लिए ₹1,000 करोड़ जारी किए। यह राशि उपमुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री मल्लू भट्टी विक्रमार्क के निर्देश पर बुधवार को जारी की गई, और वित्त विभाग के प्रधान सचिव संदीप कुमार सुल्तानिया ने इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी किए।
मासिक आवंटन में बढ़ोतरी का फैसला
पिछले वर्ष कर्मचारी संगठनों के साथ हुई चर्चा में सरकार ने प्रतिमाह ₹700 करोड़ जारी करने का वादा किया था। इस वादे के अनुरूप सरकार ने मार्च 2026 तक नियमित मासिक भुगतान किया। अब कर्मचारियों की आर्थिक ज़रूरतों और कठिनाइयों को ध्यान में रखते हुए उपमुख्यमंत्री भट्टी विक्रमार्क ने चालू वित्त वर्ष से मासिक आवंटन बढ़ाकर ₹1,000 करोड़ करने का निर्णय लिया है। इसी क्रम में अप्रैल माह के लिए यह राशि त्वरित गति से जारी कर दी गई है।
विधानसभा में दिया गया आश्वासन पूरा
सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार, उपमुख्यमंत्री ने विधानसभा में कर्मचारियों को दिए गए आश्वासन को इस कदम के ज़रिए पूरा किया है। यह ऐसे समय में आया है जब कर्मचारी संगठन लंबे समय से लंबित बकाए के शीघ्र निपटारे की माँग कर रहे थे। गौरतलब है कि यह सरकार की उस नीति का हिस्सा है जिसमें कर्मचारियों को शासन का भागीदार माना गया है।
जीपीएफ बकाए और सेवानिवृत्त कर्मचारियों को राहत
जारी किए गए फंड्स से अक्टूबर 2025 तक के सभी लंबित जीपीएफ (जनरल प्रोविडेंट फंड) बकाए पूरी तरह साफ कर दिए गए हैं। सरकारी बयान के अनुसार, इससे अपने सेवानिवृत्ति लाभों का इंतज़ार कर रहे हज़ारों वरिष्ठ नागरिकों को बड़ी राहत मिलेगी। सरकार ने सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लंबित मामलों पर सकारात्मक रुख अपनाया है।
मेडिकल बिल और छात्रवृत्ति भुगतान पर ज़ोर
कर्मचारियों की स्वास्थ्य ज़रूरतों को प्राथमिकता देते हुए सरकार ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि मेडिकल बिलों का भुगतान बिना किसी देरी के किया जाए। फिलहाल मेडिकल बिलों की प्रक्रिया तेज़ गति से चल रही है और इसके साथ ही छात्रवृत्ति भुगतान भी किए जा रहे हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि कर्मचारियों की स्वास्थ्य सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
आगे की राह
वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, बढ़ा हुआ मासिक आवंटन और जीपीएफ बकाए का निपटारा कर्मचारियों के कल्याण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। आने वाले महीनों में ₹1,000 करोड़ की यह नई दर बनाए रखने की उम्मीद है, जो राज्य के लाखों सरकारी कर्मचारियों और सेवानिवृत्त अधिकारियों के लिए वित्तीय स्थिरता का आधार बन सकती है।