तेलंगाना एसीबी ने जीएचएमसी टाउन प्लानिंग सुपरवाइजर को ₹4 लाख रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया
सारांश
मुख्य बातें
तेलंगाना के एंटी-करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 को ग्रेटर हैदराबाद म्युनिसिपल कॉरपोरेशन (जीएचएमसी) की गोलकोंडा ज़ोन कार्यालय में तैनात टाउन प्लानिंग सुपरवाइजर तुलसाराम सुनीता को ₹4 लाख की रिश्वत स्वीकार करते हुए रंगे हाथों पकड़ा। यह रकम एक शिकायतकर्ता से माँगी गई कुल ₹8 लाख की रिश्वत की पहली किस्त थी।
मुख्य घटनाक्रम
एसीबी के अनुसार, तुलसाराम सुनीता ने शिकायतकर्ता से रिश्वत इसलिए माँगी ताकि वह जीएचएमसी के डिप्टी कमिश्नर द्वारा जारी आदेशों को नज़रअंदाज़ करे, शिकायतकर्ता को अपनी निर्माणाधीन इमारत का काम बिना रुकावट जारी रखने दे, और भविष्य में भी सहयोग का आश्वासन दे। छापेमारी के दौरान एसीबी अधिकारियों ने रिश्वत की ₹4 लाख की रकम आरोपी अधिकारी के पास से बरामद की।
गौरतलब है कि रिश्वत की रकम के अलावा आरोपी के पास ₹2.50 लाख अतिरिक्त नकद भी पाए गए, जिन्हें जाँच एजेंसी ने जब्त कर लिया। एसीबी ने अपने बयान में कहा कि आरोपी ने 'अनुचित लाभ प्राप्त करने के लिए अपने कर्तव्यों का पालन गलत और बेईमानीपूर्ण तरीके से किया।'
न्यायिक कार्रवाई
तुलसाराम सुनीता को न्यायिक रिमांड के लिए नामपल्ली स्थित एसपीई एवं एसीबी मामलों के स्पेशल जज के समक्ष पेश किया जा रहा है। एसीबी ने पुष्टि की है कि मामले की जाँच जारी है।
दूसरा मामला: स्वास्थ्य विभाग में भी रिश्वतखोरी उजागर
इसी दिन एक अलग कार्रवाई में एसीबी ने रंगा रेड्डी ज़िले में भी भ्रष्टाचार का भंडाफोड़ किया। ज़िले की मेडिकल और हेल्थ ऑफिसर स्वर्णा कुमारी, हेल्थ इंस्पेक्टर एम. श्रीनिवास और एक निजी ड्राइवर मड्डुरी कृष्णाया को रिश्वतखोरी के आरोप में गिरफ्तार किया गया।
एसीबी के अनुसार, डीएम एंड एचओ और हेल्थ इंस्पेक्टर के इशारे पर ड्राइवर ने शिकायतकर्ता के जब्त किए गए फिजियोथेरेपी सेंटर की चाबियाँ लौटाने के बदले ₹1 लाख की रिश्वत माँगी। एसीबी अधिकारियों ने ड्राइवर के पास से यह रकम बरामद कर ली।
तीनों आरोपियों को भी न्यायिक रिमांड के लिए नामपल्ली के एसपीई और एसीबी मामलों के स्पेशल जज के समक्ष पेश किया जा रहा है।
व्यापक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब तेलंगाना सरकार शहरी विकास और निर्माण अनुमतियों में पारदर्शिता लाने की बात करती रही है। नगर नियोजन विभाग में भ्रष्टाचार की यह घटना उन आम नागरिकों को सीधे प्रभावित करती है जो वैध निर्माण अनुमतियों के लिए सरकारी कार्यालयों पर निर्भर हैं।
एसीबी की यह कार्रवाई इस बात का संकेत है कि भ्रष्टाचार-रोधी एजेंसी नगरपालिका और स्वास्थ्य दोनों क्षेत्रों में सक्रिय निगरानी बनाए हुए है। आगे की जाँच से अन्य संलिप्त पक्षों का खुलासा भी हो सकता है।