तिरुवनंतपुरम एयरपोर्ट पर उड़ानों का शोर थमा, आस्था का मार्ग बना रनवे
सारांश
Key Takeaways
- तिरुवनंतपुरम एयरपोर्ट पर पैनकुनी अरट्टू के दौरान उड़ानें रोकी गईं।
- यह परंपरा त्रावणकोर राज परिवार से जुड़ी है।
- भगवान पद्मनाभस्वामी की प्रतिमाओं की शोभायात्रा का आयोजन हुआ।
- अदाणी एयरपोर्ट होल्डिंग्स ने आयोजन को समन्वयित किया।
- यह घटना आधुनिकता और परंपरा के बीच संतुलन का प्रतीक है।
तिरुवनंतपुरम, 2 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। केरल के तिरुवनंतपुरम अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर एक खास दृश्य देखने को मिला जब सदियों पुरानी परंपरा के अनुसार रनवे को कुछ समय के लिए आस्था के मार्ग में परिवर्तित किया गया, जिससे उड़ानों का संचालन अस्थायी रूप से रोक दिया गया।
यह अवसर था पैनकुनी अरट्टू, जो श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर से जुड़ा एक प्राचीन धार्मिक उत्सव है। इस परंपरा में मंदिर की देव प्रतिमाओं को समुद्र में ‘अरट्टू’ (पवित्र स्नान) के लिए ले जाया जाता है।
इस उत्सव के अंतिम दिन, भगवान पद्मनाभस्वामी, नरसिंह मूर्ति और कृष्ण स्वामी की प्रतिमाओं को मंदिर से लगभग 6 किलोमीटर दूर शंगुमुखम बीच तक एक भव्य शोभायात्रा में ले जाया गया। इस यात्रा का मार्ग सीधे एयरपोर्ट के सक्रिय रनवे से होकर गुजरा।
यह परंपरा त्रावणकोर राज परिवार के समय से चलती आ रही है, जिसने 1932 में इस हवाई अड्डे का निर्माण करवाया था। शोभायात्रा में सजाए गए हाथी, पारंपरिक वाद्य यंत्र और शाही परिवार के सदस्य भी शामिल रहे। रनवे के पास कुछ समय रुकने के बाद यह यात्रा अरब सागर तक पहुंची, जहां विधि-विधान के साथ देवताओं का पवित्र स्नान किया गया।
शाम के समय मशालों की रोशनी में वापसी यात्रा निकाली गई, जिसके साथ ही उत्सव का समापन हुआ। इस दौरान हजारों श्रद्धालु इस अद्भुत परंपरा के साक्षी बने। रनवे को पुनः उपयोग में लाने से पहले उसकी पूरी जांच और सफाई की गई, जिसके बाद ही उड़ान सेवाएं बहाल की गईं।
एयरपोर्ट का संचालन करने वाली अदाणी एयरपोर्ट होल्डिंग्स लिमिटेड ने मंदिर प्रशासन और स्थानीय अधिकारियों के साथ समन्वय करके इस आयोजन को सुरक्षित तरीके से सम्पन्न किया।
यह ध्यान देने वाली बात है कि एयरपोर्ट का संचालन अदाणी एयरपोर्ट होल्डिंग्स लिमिटेड द्वारा किया जा रहा है, जिसने 2021 में इसकी जिम्मेदारी संभाली थी। इस दौरान कंपनी ने मंदिर प्रशासन और स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर शोभायात्रा के सफल आयोजन के लिए समन्वय किया, साथ ही विमानन सुरक्षा मानकों का भी सख्ती से पालन सुनिश्चित किया।
यह परंपरा केरल की विशेष सांस्कृतिक पहचान को दर्शाती है, जहां आधुनिक व्यवस्थाएं और प्राचीन परंपराएं एक साथ चलती हैं। अदाणी ग्रुप के एयरपोर्ट व्यवसाय द्वारा इस आयोजन को सहयोग देना भारत की जीवंत परंपराओं के सम्मान और संरक्षण की भावना को भी प्रदर्शित करता है।
इसी भावना का उदाहरण गुरुवार को भी देखने को मिला, जब समूह के चेयरमैन गौतम अदाणी ने अपने परिवार के साथ उत्तर प्रदेश के अयोध्या स्थित रामलला मंदिर में पूजा-अर्चना की। तिरुवनंतपुरम में यह आयोजन इस बात का प्रतीक है कि विकास और परंपरा एक-दूसरे के साथ कदम मिलाकर आगे बढ़ सकते हैं।