तिरुपति में APSRTC बस-ट्रक टक्कर: बच्ची समेत 2 की मौत, 15 घायल; क्लीनर चला रहा था ट्रक
सारांश
मुख्य बातें
आंध्र प्रदेश के तिरुपति जिले में सोमवार तड़के आंध्र प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (APSRTC) की एक बस और ट्रक के बीच आमने-सामने की भीषण टक्कर में एक 16 वर्षीया बच्ची समेत दो लोगों की मौत हो गई और 15 अन्य यात्री घायल हो गए। पुलिस के अनुसार, दुर्घटना के समय ट्रक को उसका क्लीनर चला रहा था, क्योंकि मुख्य चालक को नींद आ रही थी।
दुर्घटना का घटनाक्रम
APSRTC की बस तिरुपति से कडप्पा की ओर जा रही थी, जबकि ट्रक येर्रागुंटला से चेन्नई की ओर आ रहा था। दोनों वाहनों की उडुमवारीपल्ली के निकट आमने-सामने टक्कर हो गई। बस में कुल 37 यात्री सवार थे, जिनमें से 16 को गंभीर चोटें आईं।
पुलिस तत्काल घटनास्थल पर पहुँची और बचाव एवं राहत कार्य शुरू किया। घायलों को एम्बुलेंस के ज़रिये राजमपेटा के सरकारी अस्पताल पहुँचाया गया।
मृतकों की पहचान और उपचार
राजमपेटा अस्पताल में प्राथमिक उपचार के बाद कुछ गंभीर घायलों को कडप्पा स्थित राजीव गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (RIMS) में स्थानांतरित किया गया। वहाँ 16 वर्षीया यशविथा ने दम तोड़ दिया। शेष कुछ घायलों की हालत अभी भी गंभीर बताई जा रही है।
जाँच और प्रशासनिक प्रतिक्रिया
पुलिस ने मामला दर्ज कर जाँच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जाँच में सामने आया है कि ट्रक चालक को नींद आने के कारण क्लीनर वाहन चला रहा था — जो सड़क सुरक्षा नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है।
परिवहन मंत्री मंदीपल्ली रामप्रसाद रेड्डी ने हादसे पर गहरा दुख व्यक्त किया और मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना प्रकट की। उन्होंने फोन पर अधिकारियों से घटना में शामिल वाहनों के विवरण और सड़क सुरक्षा मानकों की जानकारी ली।
मंत्री के निर्देश
रामप्रसाद रेड्डी ने घायलों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने और गंभीर रूप से घायल यात्रियों को उन्नत चिकित्सा केंद्रों में स्थानांतरित करने के निर्देश दिए। उन्होंने प्रभावित परिवारों को हर संभव सहायता का आश्वासन देते हुए भविष्य में ऐसी दुर्घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए उचित उपाय करने पर बल दिया।
आगे क्या होगा
पुलिस ट्रक क्लीनर की भूमिका की जाँच कर रही है और दोषियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाएगी। APSRTC से भी बस के रखरखाव और चालक की स्थिति के बारे में जवाब माँगे जाने की संभावना है। यह हादसा आंध्र प्रदेश की सड़कों पर व्यावसायिक वाहनों की सुरक्षा और चालक थकान की गंभीर समस्या को एक बार फिर उजागर करता है।