अशोकनगर में TMC नेता संजय राउत और पिता की रहस्यमय मौत, पुलिस जांच जारी
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के अशोकनगर में शनिवार, 4 अक्टूबर 2026 को स्थानीय तृणमूल कांग्रेस (TMC) नेता संजय राउत (49) और उनके 72 वर्षीय पिता कमल राउत की रहस्यमय परिस्थितियों में मौत हो गई। दोनों अशोकनगर-कल्याणगढ़ नगरपालिका के वार्ड नंबर 13 स्थित अपने आवास में मिले, जिसके बाद पुलिस ने तत्काल जांच शुरू कर दी।
मुख्य घटनाक्रम
स्थानीय निवासियों के अनुसार, शनिवार दोपहर परिवार के सदस्यों ने संजय राउत को घर की बालकनी में फंदे से लटका पाया। उसी कमरे में उनके पिता कमल राउत बेहोशी की हालत में मिले। पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि घर से निकाले जाने के समय कमल राउत जीवित थे और उन्हें तत्काल अशोकनगर स्टेट जनरल अस्पताल ले जाया गया, जहाँ बाद में उनकी मृत्यु हो गई।
संजय राउत की पहचान और पृष्ठभूमि
संजय राउत अशोकनगर में स्थानीय स्तर पर TMC के सक्रिय नेता थे। कथित तौर पर वे अशोकनगर विधानसभा क्षेत्र के पूर्व TMC विधायक नारायण गोस्वामी के करीबी माने जाते थे। संजय अविवाहित थे और उनके पिता उन्हीं के साथ रहते थे। राजनीतिक कार्य के अलावा वे एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट कारोबार से भी जुड़े थे।
यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में स्थानीय राजनीतिक नेताओं से जुड़ी घटनाएँ लगातार सुर्खियों में रही हैं। गौरतलब है कि मृतक का राजनीतिक संबंध और मौत की रहस्यमय परिस्थितियाँ मामले को संवेदनशील बना रही हैं।
कारोबारी परेशानियों की अटकलें
कुछ स्थानीय लोगों ने दावा किया कि हाल के दिनों में संजय राउत को कारोबार में नुकसान से जुड़ी समस्याएँ हो रही थीं। हालाँकि, जिला पुलिस ने इसे मौत का कारण मानने की अभी तक पुष्टि नहीं की है। अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि मौत की वास्तविक वजह विस्तृत पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
पुलिस की प्रतिक्रिया और जांच
अशोकनगर पुलिस मामले की सभी परिस्थितियों की बारीकी से जांच कर रही है। जिला पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, दोनों मौतों के पीछे की असली वजह तब तक स्पष्ट नहीं होगी जब तक पोस्टमार्टम की विस्तृत रिपोर्ट प्राप्त नहीं हो जाती। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या दोनों मौतें एक-दूसरे से जुड़ी हैं।
क्या होगा आगे
पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर पुलिस अगले कदम तय करेगी। यदि रिपोर्ट में संदिग्ध परिस्थितियाँ सामने आती हैं, तो जांच का दायरा विस्तृत होने की संभावना है। मामले पर स्थानीय राजनीतिक हलकों में भी नज़र बनी हुई है।