टीएमसी ने चुनाव आयोग को पत्र भेजा, अधिकारियों की पक्षपाती पोस्टिंग पर उठाए सवाल

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टीएमसी ने चुनाव आयोग को पत्र भेजा, अधिकारियों की पक्षपाती पोस्टिंग पर उठाए सवाल

सारांश

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बीच टीएमसी ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी को पत्र लिखा है, जिसमें अधिकारियों की पक्षपातपूर्ण पोस्टिंग पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। क्या यह चुनावी निष्पक्षता को प्रभावित करेगा?

Key Takeaways

  • टीएमसी ने चुनाव आयोग को पत्र लिखा है।
  • अधिकारियों की पक्षपाती पोस्टिंग पर सवाल उठाए गए हैं।
  • चुनावी निष्पक्षता को खतरा हो सकता है।
  • तत्काल जांच की मांग की गई है।
  • निष्पक्ष अधिकारियों की तैनाती की आवश्यकता है।

कोलकाता, 3 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने शुक्रवार को मुख्य निर्वाचन अधिकारी, पश्चिम बंगाल को एक पत्र भेजा। इस पत्र में ईसीआई के ट्रांसफर दिशानिर्देशों और आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन करते हुए अधिकारियों की बार-बार और पक्षपातपूर्ण पोस्टिंग के बारे में शिकायत की गई है।

टीएमसी के राज्यसभा सांसद डेरेक ओ'ब्रायन ने पत्र में कहा कि मैं अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस की ओर से यह शिकायत पत्र लिख रहा हूं ताकि आपके ध्यान में एक गंभीर मामला लाया जा सके, जो चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता को प्रभावित कर सकता है। यह मामला है- कुछ अधिकारियों की जानबूझकर और बार-बार एक ही जिले/उप-मंडल/प्रखंड में पोस्टिंग करना, जो भारत निर्वाचन आयोग द्वारा जारी निर्देशों के खिलाफ है। इससे पक्षपात और पक्षपाती आचरण की उचित आशंका उत्पन्न होती है।

पत्र में अनुरोध किया गया है कि भारत निर्वाचन आयोग ने चुनावों के संचालन से जुड़े अधिकारियों के ट्रांसफर और पोस्टिंग को नियंत्रित करने वाले अपने निर्देशों में यह अनिवार्य किया है कि अधिकारियों को उनके गृह जिलों में तैनात नहीं किया जाना चाहिए। इसके अलावा, कोई भी जिला निर्वाचन अधिकारी/रिटर्निंग अधिकारी/सहायक रिटर्निंग अधिकारी/पुलिस निरीक्षक/उप-निरीक्षक या उससे ऊपर के पद का अधिकारी उसी विधानसभा क्षेत्र/जिले में वापस तैनात नहीं किया जाएगा, जहां वह पिछले विधानसभा चुनाव या उपचुनाव के दौरान तैनात था। ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि निष्पक्षता सुनिश्चित की जा सके।

उन्होंने यह भी कहा कि ये निर्देश इस मूल सिद्धांत पर आधारित हैं कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों के लिए न केवल वास्तविक निष्पक्षता की आवश्यकता होती है, बल्कि पक्षपात की किसी भी उचित आशंका का अभाव भी आवश्यक है।

हालांकि, यह स्पष्ट हुआ है कि कुछ अधिकारियों को प्रखंड विकास अधिकारी अरिजीत गोस्वामी को एगरा-II, प्रखंड विकास अधिकारी सुभासिस मजूमदार को रामनगर-I और प्रखंड विकास अधिकारी शुभदीप धर को रामनगर-II में तैनात किया गया है। ये अधिकारी उसी विधानसभा क्षेत्र/जिले/उप-मंडल/प्रखंड में तैनात किए गए हैं।

इस प्रकार की पोस्टिंग का बार-बार होना एक संयोग नहीं है बल्कि यह भारत के चुनाव आयोग के निर्देशों का उल्लंघन है। इन अधिकारियों का पहले से ही उसी भौगोलिक और प्रशासनिक माहौल में चुनाव कराने से जुड़ाव रहा है, इसलिए उन्हें दोबारा उसी जिले में तैनात नहीं किया जाना चाहिए था।

इसके अलावा, बार-बार पोस्टिंग के इस तरीके को जमीनी रिपोर्टों के साथ जोड़कर देखा जाए तो यह उचित आशंका उत्पन्न करता है कि इन अधिकारियों को जानबूझकर कुछ खास उम्मीदवारों के करीब रखा जा रहा है। यह निष्पक्षता के सिद्धांत को कमजोर करता है।

टीएमसी ने पत्र में मांग की है कि इन अधिकारियों की बार-बार तैनाती के कारणों की तत्काल जांच की जाए और उनकी जगह निष्पक्ष अधिकारियों को तैनात किया जाए। चुनाव आयोग के ट्रांसफर और रोटेशन संबंधी निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने के लिए सभी पोस्टिंग की समीक्षा की जाए।

Point of View

NationPress
16/04/2026

Frequently Asked Questions

टीएमसी ने चुनाव आयोग को क्या पत्र लिखा?
टीएमसी ने चुनाव आयोग को एक पत्र लिखा है जिसमें अधिकारियों की बार-बार और पक्षपातपूर्ण पोस्टिंग पर सवाल उठाए गए हैं।
इस पत्र में क्या मुद्दे उठाए गए हैं?
पत्र में अधिकारियों की जानबूझकर एक ही जिले में तैनाती और चुनावी निष्पक्षता को प्रभावित करने के आरोप लगाए गए हैं।
टीएमसी का क्या कहना है?
टीएमसी ने मांग की है कि चुनाव आयोग इस मामले की तत्काल जांच करे और निष्पक्ष अधिकारियों को तैनात करे।
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