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त्रिपुरा के 204 कृषि बाजारों का ₹461.83 करोड़ से होगा कायाकल्प: मंत्री रतन लाल नाथ

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त्रिपुरा के 204 कृषि बाजारों का ₹461.83 करोड़ से होगा कायाकल्प: मंत्री रतन लाल नाथ

सारांश

त्रिपुरा सरकार ने 2018-19 से 2025-26 के बीच 204 कृषि बाजारों के लिए ₹461.83 करोड़ की परियोजनाएँ शुरू की हैं — जो 2013-17 के ₹20.26 करोड़ के मुकाबले करीब 22 गुना अधिक है। मंत्री रतन लाल नाथ ने खोवाई में उद्घाटन करते हुए किसान आईडी और प्राकृतिक खेती विस्तार की भी घोषणा की।

मुख्य बातें

त्रिपुरा में 2018-19 से 2025-26 के बीच 204 कृषि बाजारों के विकास के लिए ₹461.83 करोड़ की परियोजनाएँ शुरू की गई हैं।
87 परियोजनाएँ पूरी हो चुकी हैं, 117 पर काम जारी है; राज्य में कुल 554 कृषि बाजार हैं।
पिछले 8 वर्षों में 50,300 कृषि मशीनें ₹233.63 करोड़ की सब्सिडी के साथ वितरित की गई हैं।
वर्तमान में 5,550 हेक्टेयर पर प्राकृतिक खेती; 2026-27 में 11,250 हेक्टेयर और जोड़े जाएँगे।
सरकार ने प्रत्येक किसान को विशिष्ट फार्मर आईडी देने की प्रक्रिया शुरू की।
2020-21 से अब तक ₹17.2 करोड़ मूल्य की जैविक उपज देश-विदेश में बेची गई।

त्रिपुरा सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री रतन लाल नाथ ने रविवार, 11 अक्टूबर 2026 को घोषणा की कि राज्य में 204 कृषि बाजारों के बुनियादी ढाँचे के विकास के लिए ₹461.83 करोड़ की परियोजनाएँ शुरू की गई हैं, जिनका उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाना और खाद्यान्न तथा बागवानी फसलों में आत्मनिर्भरता हासिल करना है। यह परियोजनाएँ 2018-19 से 2025-26 के बीच की अवधि में चलाई जा रही हैं।

मुख्य घटनाक्रम

मंत्री रतन लाल नाथ ने कल्याणपुर और खोवाई में कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की विभिन्न परियोजनाओं का उद्घाटन तथा नई योजनाओं का शिलान्यास किया। इस अवसर पर उन्होंने खोवाई जिले में कृषि, बागवानी और मृदा संरक्षण विभाग के उपनिदेशक कार्यालय का भी उद्घाटन किया।

इसके अलावा, जिले के ब्रिंदावन घाट बाजार में एक दो मंजिला ग्रामीण बाजार का उद्घाटन कर उसे किसानों और व्यापारियों को समर्पित किया गया। इस बाजार में आधुनिक सुविधाएँ उपलब्ध कराई गई हैं।

परियोजनाओं की मौजूदा स्थिति

मंत्री के अनुसार, 204 परियोजनाओं में से 87 परियोजनाएँ पूरी हो चुकी हैं, जबकि शेष 117 परियोजनाओं पर काम अभी जारी है। वर्तमान में त्रिपुरा में कुल 554 कृषि बाजार हैं।

इन बाजारों में शेड, दुकानें, शौचालय, पेयजल और जल निकासी जैसी बुनियादी सुविधाओं का विकास किया जा रहा है ताकि किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए बेहतर माहौल मिल सके।

पिछली सरकार से तुलना

गौरतलब है कि 2013 से 2017 के बीच केवल ₹20.26 करोड़ की लागत से 71 बाजार विकास परियोजनाएँ शुरू की गई थीं। वहीं मौजूदा सरकार ने इसी अवधि में करीब 22 गुना अधिक राशि का निवेश किया है। कृषि मशीनीकरण के मोर्चे पर भी यही तस्वीर उभरती है — 2013-17 में मात्र 2,600 कृषि मशीनें ₹28.35 करोड़ की सब्सिडी के साथ वितरित की गई थीं, जबकि पिछले आठ वर्षों में 50,300 मशीनें ₹233.63 करोड़ की सब्सिडी के साथ दी गई हैं।

किसानों पर सीधा असर

सरकार ने प्रत्येक किसान को विशिष्ट किसान आईडी (फार्मर आईडी) देने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिससे उन्हें विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ आसानी से मिल सके। साथ ही प्रत्येक ब्लॉक में कृषि उपमंडल कार्यालय स्थापित करने का निर्णय लिया गया है।

वर्तमान में राज्य में 47 कृषि उपमंडल कार्यालय और 9 बागवानी एवं भूमि संरक्षण उपमंडल कार्यालय कार्यरत हैं। अब राज्य के हर जिले में कृषि और बागवानी विभाग के उपनिदेशक तैनात किए गए हैं।

प्राकृतिक खेती और जैविक उपज

मंत्री ने बताया कि वर्तमान में 5,550 हेक्टेयर भूमि पर प्राकृतिक खेती की जा रही है, जिससे 13,875 किसान लाभान्वित हो रहे हैं। वित्त वर्ष 2026-27 में अतिरिक्त 11,250 हेक्टेयर भूमि को प्राकृतिक खेती के दायरे में लाने की योजना है।

2020-21 से अब तक ₹17.2 करोड़ मूल्य की जैविक उपज देश के विभिन्न राज्यों और विदेशों में बेची जा चुकी है। यह आँकड़ा बताता है कि त्रिपुरा का जैविक कृषि बाजार धीरे-धीरे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान बना रहा है।

आने वाले समय में यदि ब्लॉक-स्तरीय कार्यालय और फार्मर आईडी प्रणाली प्रभावी रूप से लागू होती है, तो त्रिपुरा के छोटे किसानों को सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह है कि 204 में से अभी भी 117 परियोजनाएँ अधूरी हैं — और समयसीमा का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया। फार्मर आईडी और ब्लॉक-स्तरीय कार्यालय जैसी पहलें तभी अर्थपूर्ण होंगी जब जमीन पर उनका क्रियान्वयन पारदर्शी हो। पिछली सरकार से तुलना राजनीतिक रूप से सुविधाजनक है, लेकिन यह नहीं बताती कि मौजूदा बाजारों में किसानों को वास्तव में कितना उचित मूल्य मिल रहा है।
RashtraPress
12 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

त्रिपुरा में 204 कृषि बाजारों के विकास की योजना क्या है?
यह 2018-19 से 2025-26 के बीच चलाई जा रही ₹461.83 करोड़ की परियोजना है, जिसमें राज्य के 204 कृषि बाजारों में शेड, दुकानें, शौचालय, पेयजल और जल निकासी जैसी सुविधाएँ विकसित की जा रही हैं। अब तक 87 परियोजनाएँ पूरी हो चुकी हैं और 117 पर काम जारी है।
त्रिपुरा में वर्तमान में कितने कृषि बाजार हैं?
राज्य में कुल 554 कृषि बाजार हैं। इनमें से 204 बाजारों में बुनियादी ढाँचे का उन्नयन किया जा रहा है।
त्रिपुरा में फार्मर आईडी योजना क्या है?
सरकार ने प्रत्येक किसान को विशिष्ट फार्मर आईडी देने की प्रक्रिया शुरू की है ताकि उन्हें केंद्र और राज्य की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ आसानी से मिल सके। यह डिजिटल पहचान किसानों को सब्सिडी और अन्य सुविधाओं से सीधे जोड़ेगी।
त्रिपुरा में प्राकृतिक खेती का विस्तार कैसा है?
वर्तमान में 5,550 हेक्टेयर भूमि पर प्राकृतिक खेती की जा रही है, जिससे 13,875 किसान लाभान्वित हो रहे हैं। वित्त वर्ष 2026-27 में अतिरिक्त 11,250 हेक्टेयर को प्राकृतिक खेती के दायरे में लाने की योजना है।
2013-17 और 2018-26 के बीच कृषि निवेश में कितना अंतर है?
2013-17 में ₹20.26 करोड़ की लागत से 71 बाजार विकास परियोजनाएँ शुरू की गई थीं, जबकि 2018-19 से 2025-26 के बीच ₹461.83 करोड़ की लागत से 204 परियोजनाएँ शुरू की गई हैं — यानी निवेश में करीब 22 गुना की वृद्धि।
राष्ट्र प्रेस
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