22 अक्टूबर 2026
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वायरल वीडियो में त्रिपुरा के व्यक्ति से नस्लीय दुर्व्यवहार, स्टूडेंट्स फोरम ने दिल्ली में एफआईआर की मांग की

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वायरल वीडियो में त्रिपुरा के व्यक्ति से नस्लीय दुर्व्यवहार, स्टूडेंट्स फोरम ने दिल्ली में एफआईआर की मांग की

सारांश

इंस्टाग्राम पर वायरल हुए एक वीडियो ने नया विवाद खड़ा कर दिया है — जिसमें त्रिपुरा के एक व्यक्ति के साथ कथित नस्लीय दुर्व्यवहार दिख रहा है। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू के हस्तक्षेप और त्रिपुरा पुलिस की कार्रवाई के बीच, स्टूडेंट्स फोरम ने दिल्ली में एफआईआर की माँग कर पूर्वोत्तर विरोधी नस्लवाद का मुद्दा फिर केंद्र में ला दिया है।

मुख्य बातें

त्रिपुरा स्टूडेंट्स फोरम दिल्ली ने 22 अक्टूबर 2026 को दिल्ली पुलिस में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई।
वायरल वीडियो में कथित तौर पर 'चिंकी' और 'चाइनीज' जैसे नस्लीय अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल हुआ।
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने इस मुद्दे को सोशल मीडिया पर उठाया, जिससे विवाद और तेज़ हुआ।
त्रिपुरा पुलिस संबंधित कानूनी धाराओं के तहत केस दर्ज करने की प्रक्रिया में है।
फोरम ने पुलिस से इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य — मेटाडेटा , मूल रिकॉर्डिंग और अपलोड हिस्ट्री — सुरक्षित रखने की माँग की।

नई दिल्ली में त्रिपुरा स्टूडेंट्स फोरम दिल्ली ने गुरुवार, 22 अक्टूबर 2026 को दिल्ली पुलिस में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई और तत्काल एफआईआर की माँग की। यह मामला सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे उस वीडियो से जुड़ा है, जिसमें कथित तौर पर एक सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर द्वारा त्रिपुरा के एक व्यक्ति के साथ उत्पीड़न, नस्लीय टिप्पणी और अपमानजनक व्यवहार किया जा रहा है। इस मामले को केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने भी सोशल मीडिया पर उठाया, जिसके बाद विवाद और अधिक तेज़ हो गया।

मामले का घटनाक्रम

यह विवाद तब सार्वजनिक हुआ जब इंस्टाग्राम पर एक वीडियो तेज़ी से प्रसारित होने लगा, जिसमें कथित तौर पर 'चिंकी' और 'चाइनीज' जैसे नस्लीय अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल एक त्रिपुरा निवासी के विरुद्ध किया गया। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने इस मुद्दे को सोशल मीडिया पर उठाया, जिसके बाद यह प्रकरण राष्ट्रीय बहस का विषय बन गया। त्रिपुरा पुलिस ने भी इस मामले में संबंधित कानूनी धाराओं के तहत केस दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

फोरम की शिकायत में क्या है

त्रिपुरा स्टूडेंट्स फोरम दिल्ली ने अपनी लिखित शिकायत में कहा, 'हम इंस्टाग्राम पर प्रसारित हो रहे एक परेशान करने वाले वीडियो में तत्काल हस्तक्षेप की माँग करते हैं, जिसमें कथित तौर पर त्रिपुरा के एक व्यक्ति को एक सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर द्वारा उत्पीड़न और अपमानजनक व्यवहार का शिकार बनाया जा रहा है।' फोरम का कहना है कि यदि जाँच में ये आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह व्यक्ति की गरिमा एवं सुरक्षा और पूर्वोत्तर भारत के लोगों के नस्लीय भेदभाव से बचाव के लिहाज़ से गंभीर चिंता का विषय है।

फोरम ने यह भी रेखांकित किया कि जब किसी व्यक्ति को उसकी जातीय या क्षेत्रीय पहचान के आधार पर नीचा दिखाने के लिए ऐसे शब्दों का इस्तेमाल किया जाता है, तो यह गरिमा और समान व्यवहार के मूल अधिकार पर सीधी चोट है। उन्होंने कहा कि वीडियो में त्रिपुरा राज्य के लिए भी अपमानजनक भाषा का प्रयोग हुआ, जो केवल एक व्यक्ति नहीं बल्कि पूरे समुदाय का अपमान है।

पुलिस से माँगें

फोरम ने दिल्ली पुलिस से कई ठोस माँगें रखी हैं। इनमें वीडियो सामग्री की जाँच कर लागू कानूनी प्रावधान तय करना, पीड़ित व्यक्ति का बयान दर्ज करना, औपचारिक एफआईआर दर्ज करना, और इंस्टाग्राम अकाउंट चलाने वाले व्यक्ति की पहचान करना शामिल है। इसके अलावा फोरम ने पीड़ित से सुरक्षित और गोपनीय तरीके से संपर्क कर उसे किसी भी आगामी धमकी या उत्पीड़न से बचाने की माँग भी की है।

फोरम ने इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों — जिनमें मूल रिकॉर्डिंग, मेटाडेटा और अपलोड हिस्ट्री शामिल हैं — को सुरक्षित रखने का आग्रह भी किया है, ताकि जाँच प्रभावित न हो।

नॉर्थ-ईस्ट विरोधी नस्लवाद का व्यापक संदर्भ

गौरतलब है कि यह पहला मामला नहीं है जब पूर्वोत्तर भारत के लोगों को नस्लीय भेदभाव का सामना करना पड़ा हो। वर्षों से दिल्ली और अन्य महानगरों में नॉर्थ-ईस्ट के नागरिकों के खिलाफ़ ऐसी घटनाएँ सामने आती रही हैं, जिनके लिए नॉर्थ-ईस्ट सपोर्ट सेंटर एंड हेल्पलाइन जैसी संस्थाएँ काम करती हैं। यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार पूर्वोत्तर राज्यों के विकास और एकीकरण को लेकर अपनी प्रतिबद्धता दोहरा रही है। फोरम का मानना है कि सोशल मीडिया पर ऐसी सामग्री का प्रसार राज्य और उसके लोगों के प्रति अवमानना को सामान्य बना सकता है।

आगे क्या होगा

त्रिपुरा पुलिस संबंधित कानूनी धाराओं के तहत केस दर्ज कर रही है और आगे की कार्रवाई कानून के अनुसार की जाएगी। दिल्ली पुलिस की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। मामले में एफआईआर दर्ज होने और आरोपी कंटेंट क्रिएटर की पहचान के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई तय होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो वर्षों से सामने आती रही है। केंद्रीय मंत्री के हस्तक्षेप से मामले को तत्काल दृश्यता मिली, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या पुलिस तंत्र बिना राजनीतिक दबाव के ऐसी शिकायतों पर स्वप्रेरणा से कार्रवाई कर सकता है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही भी इस बहस में केंद्रीय मुद्दा बनती जा रही है — वे ऐसी सामग्री को कितनी तेज़ी से हटाते हैं, यह उनकी नीतिगत प्रतिबद्धता की असली परीक्षा है।
RashtraPress
22 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

त्रिपुरा के व्यक्ति से जुड़ा वायरल वीडियो विवाद क्या है?
इंस्टाग्राम पर वायरल एक वीडियो में कथित तौर पर एक सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर द्वारा त्रिपुरा के एक व्यक्ति के साथ उत्पीड़न, नस्लीय टिप्पणी और अपमानजनक व्यवहार दिखाया गया है। इस वीडियो में 'चिंकी' और 'चाइनीज' जैसे नस्लीय अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किए जाने का आरोप है।
त्रिपुरा स्टूडेंट्स फोरम दिल्ली ने क्या माँगें रखी हैं?
फोरम ने दिल्ली पुलिस से तत्काल एफआईआर दर्ज करने, कंटेंट क्रिएटर की पहचान करने, पीड़ित का बयान सुरक्षित तरीके से दर्ज करने और मेटाडेटा समेत इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य सुरक्षित रखने की माँग की है। इसके साथ ही पीड़ित को आगे की धमकी या उत्पीड़न से बचाने की भी माँग की गई है।
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू की इस मामले में क्या भूमिका है?
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने इस वायरल वीडियो के मुद्दे को सोशल मीडिया पर उठाया, जिसके बाद यह प्रकरण राष्ट्रीय बहस का केंद्र बन गया। उनके हस्तक्षेप से मामले को व्यापक दृश्यता मिली और अधिकारियों पर कार्रवाई का दबाव बढ़ा।
त्रिपुरा पुलिस ने इस मामले में क्या कदम उठाया है?
त्रिपुरा पुलिस इस मामले में संबंधित कानूनी धाराओं के तहत केस दर्ज करने की प्रक्रिया में है और कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। दिल्ली पुलिस की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सार्वजनिक नहीं हुई है।
पूर्वोत्तर भारत के लोगों के खिलाफ़ नस्लीय भेदभाव की यह कोई नई समस्या है?
नहीं, पूर्वोत्तर भारत के नागरिकों को दिल्ली और अन्य महानगरों में नस्लीय भेदभाव की घटनाओं का वर्षों से सामना करना पड़ रहा है। यह मामला उस दीर्घकालिक समस्या की एक और कड़ी है, जिसे लेकर सामाजिक संगठन और सरकारें लंबे समय से चिंता जताते रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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