उद्धव ठाकरे की 'फर्जी धर्मगुरुओं' के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की अपील

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उद्धव ठाकरे की 'फर्जी धर्मगुरुओं' के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की अपील

सारांश

उद्धव ठाकरे ने 'फर्जी धर्मगुरुओं' के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की मांग की है। नासिक पुलिस द्वारा अशोक खरात की गिरफ्तारी के बाद उठी यह मांग राज्य में राजनीतिक हलचल पैदा कर रही है। ठाकरे का आरोप है कि अंधविश्वास के खिलाफ कानून अप्रभावी हैं।

Key Takeaways

  • उद्धव ठाकरे ने 'फर्जी धर्मगुरुओं' के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।
  • अशोक खरात की गिरफ्तारी ने राजनीतिक हलचल को जन्म दिया।
  • जांच में केवल व्यक्ति विशेष नहीं, बल्कि राजनीतिक गठजोड़ का भी पर्दाफाश होना चाहिए।
  • अंधविश्वास और काला जादू-विरोधी कानूनों की प्रभावशीलता पर सवाल उठाए गए।
  • राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी अंधविश्वास का सहारा ले रहे हैं।

मुंबई, 21 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री एवं शिवसेना-यूबीटी अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने शनिवार को राज्य सरकार को चुनौती देते हुए फर्जी धर्मगुरुओं के खिलाफ त्वरित कार्रवाई की मांग की। यह मांग अशोक खरात उर्फ भोंदू बाबा के मामले के बाद उठी है, जो अपने को ब्रह्मांड विज्ञान का विशेषज्ञ और मर्चेंट नेवी कैप्टन बताता था तथा आध्यात्मिक गुरु का दिखावा करता था। हाल ही में नासिक पुलिस ने उसे एक महिला अनुयायी के साथ दुष्कर्म के आरोप में गिरफ्तार किया है।

खरात की गिरफ्तारी ने न केवल उसकी धोखाधड़ी को उजागर किया है, बल्कि राज्य में एक राजनीतिक हलचल भी पैदा कर दी है।

मुंबई में इम्पोर्ट एक्सपोर्ट लॉजिस्टिक्स कोर्स के उद्घाटन के अवसर पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में ठाकरे ने मांग की कि जांच व्यक्ति विशेष तक सीमित न रहे, बल्कि ऐसे धोखेबाज आध्यात्मिक नेताओं का समर्थन करने वाले राजनीतिक गठजोड़ का भी पर्दाफाश किया जाए।

ठाकरे ने राजनीति और अंधविश्वास के बीच के संबंध पर प्रकाश डाला और महाराष्ट्र की वर्तमान स्थिति की आलोचना की।

उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में भले ही मजबूत अंधविश्वास और काला जादू-विरोधी कानून है, लेकिन अगर कानून के रखवाले खुद ऐसे धर्मगुरुओं का अनुसरण कर रहे हैं, तो यह कानून प्रभावहीन हो जाता है।

उन्होंने आरोप लगाया कि इन विवादों को जनता का ध्यान अधिक महत्वपूर्ण मुद्दों से हटाने के लिए उछाला जा रहा है, खासकर 'एपस्टीन फाइल्स' और अन्य महत्वपूर्ण घोटालों का संदर्भ देते हुए।

अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों पर परोक्ष रूप से निशाना साधते हुए ठाकरे ने कहा कि जिनमें योग्यता की कमी है और जो अपने नेतृत्व से कुछ हासिल नहीं कर सकते, वे नींबू, सुई और काले जादू का सहारा ले रहे हैं।

जब उनसे उन खबरों के बारे में पूछा गया कि पिछली महा विकास अघाड़ी (एमवीए) सरकार ने अशोक खरात के प्रतिष्ठान को पानी की सुविधा मुहैया कराई थी, तो ठाकरे ने कहा, "मुझे कोई आपत्ति नहीं है - सभी की पूरी जांच करें। देखते हैं मामला कितना गहरा है। चाहे वह गांव का बाबा हो या किसी राजनीतिक दल से जुड़ा व्यक्ति, सभी के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।"

एमवीए शासनकाल के दौरान आश्रम के लिए 39 लाख लीटर पानी स्वीकृत किए जाने की खबरों के बाद, शिवसेना-यूबीटी प्रमुख ने आक्रामक रुख अपनाते हुए राज्य सरकार को पूरी जांच करने की चुनौती दी।

Point of View

बल्कि यह राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों के जाल में उलझी हुई है। उद्धव ठाकरे की मांग यह दर्शाती है कि समाज में ऐसे मामलों के प्रति जागरूकता और कार्रवाई की ज़रूरत है। यह एक ऐसा संदर्भ है जहाँ अंधविश्वास और राजनीति का मेल स्पष्ट होता है।
NationPress
24/03/2026

Frequently Asked Questions

उद्धव ठाकरे ने 'फर्जी धर्मगुरुओं' के खिलाफ क्यों आवाज उठाई?
उन्होंने नासिक पुलिस द्वारा अशोक खरात की गिरफ्तारी के बाद तत्काल कार्रवाई की मांग की है।
अशोक खरात कौन है?
अशोक खरात उर्फ भोंदू बाबा एक व्यक्ति है जो खुद को ब्रह्मांड विज्ञान का विशेषज्ञ और आध्यात्मिक गुरु बताता था।
ठाकरे का आरोप क्या है?
ठाकरे का आरोप है कि राज्य में राजनीतिक गठजोड़ ऐसे फर्जी धर्मगुरुओं का समर्थन कर रहे हैं।
क्या महाराष्ट्र में अंधविश्वास-विरोधी कानून प्रभावी हैं?
ठाकरे ने कहा कि यदि कानून के रखवाले खुद फर्जी धर्मगुरुओं का अनुसरण कर रहे हैं, तो ये कानून अप्रभावी हैं।
इस मामले का राजनीतिक महत्व क्या है?
यह मामला अंधविश्वास और राजनीति के बीच के संबंधों को उजागर करता है और इससे राजनीतिक हलचल भी उत्पन्न हुई है।
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