राज ठाकरे ने अशोक खरात के मामले पर उठाए गंभीर सवाल, महाराष्ट्र की संत परंपरा की रक्षा की अपील

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राज ठाकरे ने अशोक खरात के मामले पर उठाए गंभीर सवाल, महाराष्ट्र की संत परंपरा की रक्षा की अपील

सारांश

राज ठाकरे ने अशोक खरात के मामले में राज्य के नैतिक पतन पर चिंता जताई है। उन्होंने राजनीतिक संरक्षण में काम कर रहे लोगों पर सवाल उठाते हुए महाराष्ट्र की समृद्ध परंपराओं की रक्षा की अपील की।

Key Takeaways

  • राज ठाकरे ने अशोक खरात के मामले में गहरी नाराजगी व्यक्त की।
  • महाराष्ट्र के नैतिक पतन पर चिंता जताई गई।
  • राज ठाकरे ने राजनीतिक संरक्षण में काम कर रहे लोगों पर सवाल उठाए।
  • उन्होंने नागरिकों को सावधान रहने की अपील की।
  • महाराष्ट्र की समृद्ध परंपराओं की रक्षा की आवश्यकता पर बल दिया गया।

मुंबई, 23 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के नेता राज ठाकरे ने सोमवार को “शाही ज्योतिषी” के रूप में जाने जाने वाले अशोक खरात से संबंधित मामले में सामने आ रहे चौंकाने वाले तथ्यों पर अपनी गहरी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने इस बात पर चिंता जताई कि महाराष्ट्र का नैतिक पतन एक ऐसे राज्य के रूप में हो रहा है, जिसकी पहचान कभी संतों और समाज सुधारकों की परंपरा से होती थी।

राज ठाकरे ने संत ज्ञानेश्वर, संत तुकाराम और गाडगे बाबा जैसे महान संतों के योगदान और वर्तमान स्थिति के बीच के भेद को उजागर किया। उन्होंने कहा कि आज के समय में खरात जैसे लोग कथित तौर पर राजनीतिक संरक्षण में कार्य कर रहे हैं।

राज ठाकरे ने एक्स पर अपनी पोस्ट में लिखा, “हमने युवाओं को महाराष्ट्र की समृद्ध परंपराओं से अवगत कराया, लेकिन आज आधुनिक नेताओं को तर्क और ‘गीता रहस्य’ जैसी सोच छोड़कर खरात जैसे लोगों के सामने झुकते देखना न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है, बल्कि डराने वाला भी है।”

उन्होंने एक “दुखद विरोधाभास” पर प्रकाश डाला, जिसमें यह कहा गया कि कई वर्तमान विधायक, जिनके इस घोटाले में शामिल होने की संभावना है, वही लोग हैं जिन्होंने दिसंबर 2013 में अंधविश्वास और काला जादू विरोधी कानून पारित किया था। इससे यह प्रश्न उठता है कि क्या सत्ता की लालसा ने उनके तर्क और विज्ञान के प्रति प्रतिबद्धता को कमजोर कर दिया है।

राज ठाकरे ने राज्य की राजनीतिक व्यवस्था में एक चिंताजनक पैटर्न की चर्चा की, जिसमें सत्ता की होड़, पद खोने का डर और नौकरशाही की मिलीभगत शामिल है। उन्होंने कहा कि “टिकट पाने की होड़ के बाद मंत्री बनने की इच्छा और फिर पद खोने का डर नेताओं को ऐसे लोगों से मदद लेने के लिए मजबूर करता है, जो खुद को चमत्कारी बताते हैं। इसके अलावा, कुछ अधिकारियों पर आरोप है कि वे मंत्रियों के सलाहकार बनकर सत्ता के करीब बने रहने की कोशिश कर रहे हैं।”

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के इस दावे को स्वीकार करते हुए कि सरकार ने ही इस मामले का खुलासा किया है, राज ठाकरे का कहना था कि इससे मामले के सामने आने के समय पर कई प्रश्न उठते हैं।

उन्होंने कहा कि यदि सरकार इस जांच का श्रेय लेना चाहती है, तो उसे उस खुफिया विफलता की जिम्मेदारी भी लेनी होगी, जिसके कारण यह मामला सामने आया।

राज ठाकरे ने यह भी उल्लेख किया कि ऐसी चर्चाएँ बढ़ रही हैं कि इस मामले का राजनीतिक रूप से उपयोग किया जा रहा है ताकि महत्वाकांक्षी प्रतिद्वंद्वियों को कमजोर किया जा सके। इसके साथ ही यह भी आशंका जताई जा रही है कि एक बार राजनीतिक लक्ष्य हासिल हो जाने के बाद इस जांच को धीरे-धीरे ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।

उन्होंने मीडिया को चेतावनी देते हुए कहा, “इस तरह की ‘धोबी-पछाड़’ राजनीति में मोहरा न बनें। इस मामले को तब तक शांत न होने दें, जब तक अशोक खरात और उनके सहयोगियों को सख्त सजा न मिल जाए।”

राज ठाकरे ने नागरिकों को भी सावधान किया और कहा कि कीर्तन और ज्ञानेश्वरी जैसी समृद्ध परंपराओं के बावजूद यदि लोग ऐसे प्रतिनिधियों को चुनते रहेंगे, तो महाराष्ट्र का भविष्य खतरे में पड़ सकता है।

राज ठाकरे ने अंत में कहा कि वे युवाओं को महाराष्ट्र की असली और प्रगतिशील पहचान के बारे में जागरूक करते रहेंगे। उन्होंने राज्य से अपील की कि ऐसे लोगों की बेशर्मी को नकारें, जो राजनीतिक लाभ के लिए अपने नैतिक मूल्यों से समझौता करते हैं।

Point of View

NationPress
23/03/2026

Frequently Asked Questions

राज ठाकरे ने अशोक खरात के मामले में क्या कहा?
राज ठाकरे ने अशोक खरात के मामले में राज्य के नैतिक पतन पर चिंता जताई और राजनीतिक संरक्षण में काम कर रहे लोगों पर सवाल उठाए।
क्या महाराष्ट्र की संत परंपरा खतरे में है?
राज ठाकरे ने चेतावनी दी है कि यदि लोग ऐसे प्रतिनिधियों को चुनते रहे तो महाराष्ट्र की संत परंपरा और भविष्य दोनों खतरे में पड़ सकते हैं।
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