यूक्रेन के सुमी में कुसुम हेल्थकेयर के प्लांट पर ड्रोन हमला, एक कर्मचारी की मौत, $5 करोड़ से अधिक का नुकसान
सारांश
मुख्य बातें
यूक्रेन के सुमी शहर में स्थित भारतीय फार्मास्युटिकल कंपनी कुसुम हेल्थकेयर की विनिर्माण इकाई पर 4 अक्टूबर 2026 को हुए ड्रोन हमले में एक कर्मचारी की मौत हो गई और कई अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। कंपनी ने एक आधिकारिक बयान जारी कर इस हमले की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि जीवनरक्षक दवाओं के उत्पादन केंद्र को युद्ध में निशाना बनाया जाना सर्वथा अनुचित है। प्रारंभिक आकलन के अनुसार हमले से 5 करोड़ डॉलर से अधिक का नुकसान हुआ है।
हमले का विवरण और तात्कालिक असर
कुसुम हेल्थकेयर के बयान के अनुसार, 4 अक्टूबर को हुए ड्रोन हमले ने सुमी स्थित अत्याधुनिक विनिर्माण सुविधा को भारी क्षति पहुँचाई। एक कर्मचारी की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि कई अन्य कर्मचारी गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। कंपनी ने कहा कि राहत एवं नुकसान का आकलन करने का काम अभी भी जारी है।
प्रारंभिक अनुमान के मुताबिक, इस हमले से संयंत्र को 5 करोड़ डॉलर से अधिक का नुकसान हुआ है। कंपनी का भारतीय प्रबंधन स्थिति की समीक्षा कर रहा है और विस्तृत आकलन की प्रक्रिया जारी है।
यह दूसरा बड़ा हमला — पहले भी हो चुका है नुकसान
कुसुम हेल्थकेयर ने इस घटना को यूक्रेन में उसके प्रतिष्ठानों पर हुई दूसरी बड़ी घटना बताया है। कंपनी के अनुसार, 14 अप्रैल 2025 को भी रूसी ड्रोन हमले में उसका यूक्रेनी गोदाम पूरी तरह नष्ट हो गया था, जिससे एक अरब यूक्रेनी रिव्निया से अधिक का नुकसान हुआ था। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब यूक्रेन के उत्तर-पूर्वी क्षेत्र — जहाँ सुमी स्थित है — में रूसी हमलों की तीव्रता लगातार बनी हुई है।
कंपनी का परिचालन और दवा आपूर्ति पर असर
कुसुम हेल्थकेयर के अनुसार, कंपनी भारत से संचालित अपनी विनिर्माण इकाइयों के ज़रिये 22 देशों को दवाओं का निर्यात करती है और यूक्रेन में आवश्यक दवाओं की आपूर्ति भी सुनिश्चित करती रही है। कंपनी के भारतीय संयंत्र राजस्थान के भिवाड़ी में दो और मध्य प्रदेश के इंदौर स्थित पीथमपुर SEZ में एक विनिर्माण इकाई के रूप में कार्यरत हैं।
हमले के बाद सुमी संयंत्र में उत्पादन ठप हो गया है, जिससे यूक्रेन में आवश्यक दवाओं की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका है। कंपनी फिलहाल अपने उत्पादन और दवा-आपूर्ति पर पड़े असर का आकलन कर रही है।
भारत सरकार से राजनयिक हस्तक्षेप की माँग
कुसुम हेल्थकेयर ने भारत सरकार से इस मामले में कूटनीतिक स्तर पर हस्तक्षेप करने की अपील की है। कंपनी का कहना है कि उसने भारतीय फार्मास्युटिकल मंचों के माध्यम से सरकार के समक्ष अपनी चिंताएँ रखी हैं और युद्ध क्षेत्र में काम कर रहे निजी स्वास्थ्य क्षेत्र के प्रतिष्ठानों की सुरक्षा के लिए राजनयिक कदम उठाने का आग्रह किया है।
कर्मचारियों की सुरक्षा और आगे की चुनौतियाँ
कंपनी ने स्पष्ट किया कि फिलहाल उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता प्रभावित कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और घायलों को आवश्यक चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना है। यूक्रेन में जारी युद्ध के बीच सुमी जैसे रूसी सीमा से सटे इलाकों में काम कर रही कंपनियों के लिए सुरक्षा एक स्थायी चुनौती बनी हुई है।
यह घटना उस व्यापक सवाल को भी उठाती है कि क्या युद्धग्रस्त क्षेत्रों में संचालित नागरिक — विशेषकर स्वास्थ्य — अवसंरचना की सुरक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय मानदंड पर्याप्त हैं। आने वाले दिनों में कुसुम हेल्थकेयर के उत्पादन और कूटनीतिक प्रयासों पर सभी की नज़र बनी रहेगी।