29 अगस्त 2026
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यूपी में मौसमी फ्लू अलर्ट: ब्रजेश पाठक ने दिए आइसोलेशन बेड और अलग ओपीडी के निर्देश

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यूपी में मौसमी फ्लू अलर्ट: ब्रजेश पाठक ने दिए आइसोलेशन बेड और अलग ओपीडी के निर्देश

सारांश

यूपी में मौसमी फ्लू के बढ़ते मामलों पर योगी सरकार हरकत में आई — उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने हर जिले में आइसोलेशन बेड, अलग ओपीडी और टैमीफ्लू स्टॉक के निर्देश दिए। नेपाल सीमावर्ती जिलों पर विशेष नज़र, HOPE सेंटर से ऑनलाइन निगरानी जारी।

मुख्य बातें

उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने 29 अगस्त को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए प्रदेश के चिकित्साधिकारियों के साथ फ्लू की स्थिति की समीक्षा की।
प्रत्येक जिले में जिला एवं संयुक्त अस्पताल स्तर पर 4 से 6 आइसोलेशन बेड तैयार रखने के निर्देश।
अधिक फ्लू मामलों वाले जिलों में श्वसन रोगियों के लिए अलग ओपीडी और अलग पंजीकरण काउंटर की व्यवस्था।
अस्पतालों में ओसेल्टामिविर (टैमीफ्लू) , ऑक्सीजन, नेबुलाइज़र और ब्रोंकोडायलेटर्स का पर्याप्त स्टॉक सुनिश्चित करने के आदेश।
नेपाल सीमावर्ती जिलों में फ्लू पर विशेष निगरानी; HOPE कमांड सेंटर से ऑनलाइन मॉनिटरिंग जारी।
सरकार ने कहा — स्थिति नियंत्रण में है, लक्षण होने पर तत्काल चिकित्सकीय सलाह लें।

उत्तर प्रदेश में मौसमी फ्लू के बढ़ते मामलों के मद्देनज़र योगी सरकार ने स्वास्थ्य विभाग को पूरी तरह अलर्ट मोड पर कर दिया है। उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक ने 29 अगस्त को प्रदेशभर के चिकित्साधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए फ्लू की मौजूदा स्थिति और अस्पतालों की तैयारियों की गहन समीक्षा की। उन्होंने प्रदेशवासियों को आश्वस्त किया कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और घबराने की कोई ज़रूरत नहीं है।

मुख्य निर्देश और तैयारियाँ

ब्रजेश पाठक ने अस्पतालों में ओसेल्टामिविर (टैमीफ्लू), ऑक्सीजन, नेबुलाइज़र, ऑक्सीजन मास्क और ब्रोंकोडायलेटर्स समेत सभी ज़रूरी चिकित्सा संसाधनों का पर्याप्त स्टॉक सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि गंभीर मरीजों के उपचार में दवा, ऑक्सीजन या किसी अन्य उपकरण की किसी भी स्थिति में कमी नहीं होनी चाहिए। सांस लेने में तकलीफ जैसे लक्षणों के साथ भर्ती होने वाले सभी गंभीर मरीजों की फ्लू जाँच अनिवार्य रूप से कराने के भी आदेश दिए गए।

अलग ओपीडी और आइसोलेशन बेड की व्यवस्था

अधिक फ्लू मामलों वाले जिलों में श्वसन संबंधी शिकायतों के मरीजों के लिए अलग ओपीडी संचालित करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि जाँच, परामर्श और उपचार में तेज़ी आए और अस्पतालों में अनावश्यक भीड़ न हो। इसके साथ ही प्रत्येक जिले में जिला एवं संयुक्त अस्पताल स्तर पर चार से छह आइसोलेशन बेड तैयार रखने को कहा गया है। बुखार और फ्लू से पीड़ित मरीजों के लिए अलग पंजीकरण काउंटर स्थापित करने के निर्देश भी जारी किए गए हैं, जिससे मरीजों को बिना अनावश्यक प्रतीक्षा के त्वरित चिकित्सकीय सहायता मिल सके।

HOPE कमांड सेंटर से ऑनलाइन निगरानी

उपमुख्यमंत्री ने लखनऊ के कैसरबाग स्थित स्वास्थ्य भवन में स्थापित केंद्रीय कमांड एवं कंट्रोल सेंटर HOPE (हेल्थ ऑनलाइन पैरामीटर इवैल्यूएशन) पहुँचकर प्रदेश के अस्पतालों में स्वास्थ्य सुविधाओं की ऑनलाइन मॉनिटरिंग की। इस दौरान उन्होंने दवा, ऑक्सीजन और अन्य आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता की जानकारी ली और किसी भी कमी को तत्काल दूर करने के निर्देश दिए। यह ऐसे समय में आया है जब देश के कई राज्यों में मौसमी इन्फ्लुएंज़ा के मामलों में उछाल देखा जा रहा है।

नेपाल सीमावर्ती जिलों पर विशेष नज़र

नेपाल से सटे उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती जिलों में फ्लू और बुखार के मामलों को लेकर विशेष निगरानी के निर्देश दिए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग को इन क्षेत्रों में संक्रमण की स्थिति पर प्रभावी नज़र रखने और नेपाल अथवा उत्तर प्रदेश के अन्य हिस्सों से आने वाले प्रत्येक मरीज को तत्काल चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराने को कहा गया है। इन्फ्लुएंज़ा-लाइक इलनेस और श्वसन संक्रमण वाले मरीजों के संपर्क में आए लोगों में लक्षण पाए जाने पर चिकित्सकीय सलाह के अनुसार समय से एंटीवायरल दवाएँ शुरू करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

जन जागरूकता और आगे की राह

पाठक ने अस्पतालों में मरीजों और तीमारदारों को मास्क के इस्तेमाल, हाथों की स्वच्छता और खाँसी के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों के प्रति जागरूक करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रदेशवासियों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को लेकर सरकार पूरी तरह सतर्क है और फ्लू की स्थिति पर लगातार निगरानी जारी है। फ्लू जैसे लक्षण — जैसे तेज़ बुखार, खाँसी, गले में खराश या साँस लेने में तकलीफ — होने पर नागरिकों से तत्काल नज़दीकी अस्पताल में संपर्क करने की अपील की गई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी क्रियान्वयन की होगी — विशेषकर उन जिलों में जहाँ स्वास्थ्य ढाँचा पहले से दबाव में है। हर जिले में 4 से 6 आइसोलेशन बेड का निर्देश एक न्यूनतम प्रयास है, जबकि बड़े ज़िलों में मरीजों की संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है। नेपाल सीमावर्ती जिलों पर विशेष ध्यान देना सही दिशा में कदम है, परंतु यह स्पष्ट नहीं है कि सीमा पार से आने वाले मरीजों की स्क्रीनिंग के लिए कोई व्यवस्थित तंत्र मौजूद है या नहीं। HOPE सेंटर जैसी डिजिटल निगरानी प्रणाली तभी प्रभावी होती है जब ज़मीनी स्तर पर डेटा सही और समय पर दर्ज हो — यह वह कड़ी है जिसे सरकार को सार्वजनिक रूप से सत्यापित करना होगा।
RashtraPress
29 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उत्तर प्रदेश में मौसमी फ्लू को लेकर सरकार ने क्या कदम उठाए हैं?
योगी सरकार ने स्वास्थ्य विभाग को अलर्ट मोड पर कर दिया है। उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने प्रत्येक जिले में 4 से 6 आइसोलेशन बेड, अलग ओपीडी, अलग पंजीकरण काउंटर और टैमीफ्लू समेत ज़रूरी दवाओं का पर्याप्त स्टॉक सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
क्या यूपी में फ्लू की स्थिति गंभीर है?
उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक के अनुसार स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और घबराने की ज़रूरत नहीं है। हालाँकि, बढ़ते मामलों को देखते हुए एहतियाती तैयारियाँ तेज़ की गई हैं और HOPE कमांड सेंटर से ऑनलाइन निगरानी जारी है।
फ्लू के लक्षण होने पर क्या करें?
सरकार ने अपील की है कि तेज़ बुखार, खाँसी, गले में खराश या साँस लेने में तकलीफ जैसे लक्षण होने पर घबराएँ नहीं और तत्काल नज़दीकी अस्पताल में संपर्क करें। चिकित्सकीय सलाह के अनुसार समय पर एंटीवायरल दवाएँ लेना ज़रूरी है।
नेपाल सीमावर्ती जिलों में फ्लू को लेकर क्या व्यवस्था है?
नेपाल से सटे उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती जिलों में फ्लू और बुखार के मामलों पर विशेष निगरानी के निर्देश दिए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग को वहाँ से आने वाले प्रत्येक मरीज को तत्काल चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराने को कहा गया है।
HOPE कमांड सेंटर क्या है और यह फ्लू निगरानी में कैसे मदद करता है?
HOPE यानी हेल्थ ऑनलाइन पैरामीटर इवैल्यूएशन, लखनऊ के कैसरबाग स्थित स्वास्थ्य भवन में स्थापित केंद्रीय कमांड एवं कंट्रोल सेंटर है। यह प्रदेश के अस्पतालों में दवा, ऑक्सीजन और अन्य संसाधनों की उपलब्धता की रियल-टाइम ऑनलाइन निगरानी करता है, जिससे किसी भी कमी को तत्काल दूर किया जा सके।
राष्ट्र प्रेस
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