नेपाल बाढ़ में लापता मुंबई दंपति: परिजन बोले, भारत-नेपाल-चीन मिलकर तेज करें रेस्क्यू
सारांश
मुख्य बातें
नेपाल में 26 अगस्त 2025 को आई भीषण फ्लैश फ्लड ने कैलाश मानसरोवर यात्रा पर निकले मुंबई के दंपति सतीश पाटनकर और रेखा पाटनकर को लापता कर दिया। उनके छोटे भाई संजय पाटनकर ने भारत और नेपाल सरकार से अपील की है कि बचाव अभियान को व्यापक और पारदर्शी तरीके से तेज किया जाए, ताकि बाढ़ और मलबे में फंसे लोगों को समय रहते बचाया जा सके।
यात्रा का क्रम और हादसे की पृष्ठभूमि
सतीश पाटनकर और रेखा पाटनकर 23 अगस्त को मुंबई से काठमांडू पहुँचे थे। 24 अगस्त को काठमांडू में एक्लीमेटाइजेशन और स्थानीय भ्रमण के बाद 25 अगस्त को उनका दल — जिसमें करीब 27 यात्री शामिल थे — तिमुर की ओर रवाना हुआ। तिमुर नेपाल-तिब्बत सीमा के निकट स्थित एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। वहाँ पहुँचने के बाद परिवार को व्हाट्सऐप पर संदेश मिला कि दल सुरक्षित पहुँच गया है और अगले दिन सीमा पार करने की तैयारी है।
26 अगस्त की सुबह करीब 8:27 बजे दल के कुछ सदस्यों ने अपने परिजनों से अंतिम बार संपर्क किया। इसके कुछ ही देर बाद, जिस क्षेत्र में इमीग्रेशन सेंटर और फ्रेंडशिप ब्रिज स्थित है, वहाँ अचानक फ्लैश फ्लड आ गया। यह इलाका बाद में बाढ़ से सर्वाधिक प्रभावित क्षेत्रों में से एक बताया गया।
परिजनों को जानकारी मिलने में हुई देरी
संजय पाटनकर के अनुसार, शुरुआत में परिवार को हादसे की कोई जानकारी नहीं थी। दोपहर में नेपाल में फ्लैश फ्लड की खबरें सामने आने के बाद जब उन्होंने 'तिमुर' का नाम देखा, तब स्थिति की गंभीरता समझ में आई। ट्रैवल कंपनी से संपर्क करने पर पता चला कि जमीनी स्तर पर संचार व्यवस्था पूरी तरह बाधित हो चुकी है। 26 अगस्त की रात करीब 8:30 बजे के बाद से किसी भी यात्री का परिजनों से संपर्क नहीं हो सका।
परिवार और अन्य यात्रियों के परिजनों ने अलग-अलग व्हाट्सऐप समूह बनाकर फोटो, वीडियो और संभावित सुराग एकत्र करने शुरू किए। ट्रैवल ग्रुप के संचालक भी दल के साथ यात्रा पर थे और कंपनी की ओर से काठमांडू में स्थिति की जानकारी जुटाने का प्रयास किया गया, लेकिन ठोस सूचना अभी तक नहीं मिल पाई है।
सरकार से अपील: पारदर्शिता और संसाधन बढ़ाने की माँग
संजय ने बताया कि सरकार की ओर से लापता व्यक्तियों के लिए एक पोर्टल उपलब्ध कराया गया है और उन्होंने सतीश व रेखा की जानकारी वहाँ दर्ज करा दी है। हालाँकि, उनका कहना है कि परिवारों को अब तक पर्याप्त और नियमित अपडेट नहीं मिल पा रहे। उन्होंने माँग की कि नदी के बहाव वाले क्षेत्र में सर्च ऑपरेशन कितने इलाके में हुआ और कितना बाकी है, इसकी स्पष्ट जानकारी परिजनों को दी जाए।
संजय ने यह भी कहा कि हादसे का असर संभवतः घटनास्थल से काफी दूर तक हुआ है और मलबे या पानी के साथ शव भारत तक बहकर आने की खबरें सामने आई हैं। इस स्थिति में नेपाल, चीन और भारत को समन्वित रूप से व्यापक खोज अभियान चलाना चाहिए। उन्होंने भारत सरकार से अनुरोध किया कि यदि कोई औपचारिक राजनयिक प्रक्रिया आवश्यक हो, तो उसे शीघ्र पूरा किया जाए, क्योंकि बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक उस क्षेत्र में मौजूद थे।
आपदा प्रबंधन में सुधार की ज़रूरत
संजय ने सुझाव दिया कि कठिन और जोखिमपूर्ण धार्मिक यात्राओं के लिए यात्रियों की पहचान, संपर्क विवरण और अन्य जरूरी जानकारी एक मानकीकृत प्रणाली में पहले से उपलब्ध होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि बाढ़ और कीचड़ जैसी आपदा में समय अत्यंत महत्वपूर्ण होता है — भूकंप में मलबे के नीचे लोग लंबे समय तक जीवित रह सकते हैं, लेकिन पानी और कीचड़ में फंसे लोगों के लिए बचाव की समय-सीमा बेहद कम होती है।
उन्होंने नेपाल सरकार से अपील की कि चीन और भारत से अधिक संसाधन और विशेषज्ञ सहायता लेकर प्रभावित क्षेत्र का व्यापक सर्वे कराया जाए। नेपाल सरकार के बचाव प्रयासों को संजय ने स्वीकार किया, लेकिन कहा कि आपदा का पैमाना बहुत बड़ा है और उपलब्ध संसाधनों को बढ़ाने की आवश्यकता है।
परिवार की स्थिति और आगे की उम्मीद
सतीश और रेखा के दो बच्चे सैन फ्रांसिस्को, अमेरिका में रहते हैं। परिवार लगातार संपर्क में है और संयम के साथ इस कठिन परिस्थिति का सामना कर रहा है। संजय ने कहा कि इस समय परिवारों को सबसे अधिक ज़रूरत तेज़ी, पारदर्शिता और सटीक जानकारी की है। परिवार की सबसे बड़ी उम्मीद यही है कि जल्द से जल्द कोई ठोस सूचना मिले और रेस्क्यू टीमें प्रभावित क्षेत्रों तक पहुँचें।