नेपाल बाढ़ से बाल-बाल बचे कैलाश-मानसरोवर यात्रा के 26 तीर्थयात्री, वीजा देरी बनी जीवनरक्षक
सारांश
मुख्य बातें
कैलाश-मानसरोवर यात्रा पर निकले आंध्र प्रदेश के 26 तीर्थयात्री नेपाल में अचानक आई भीषण बाढ़ से बाल-बाल बच गए। विशाखापत्तनम जिले के भीमूनिपटनम से निकले इन श्रद्धालुओं ने 29 अगस्त 2026 को सकुशल घर वापसी की। चीनी वीजा में हुई तीन दिन की देरी — जो पहले निराशा का कारण बनी — अंततः उनके लिए जीवनरक्षक साबित हुई।
यात्रा का घटनाक्रम
तीर्थयात्री गाडू थतिनाइडु ने बताया कि समूह 21 अगस्त की रात करीब 9:30 बजे भोगापुरम इंटरनेशनल एयरपोर्ट से रवाना हुआ। दिल्ली होते हुए वे काठमांडू पहुँचे, जहाँ चीनी सरकार द्वारा वीजा जारी करने में तीन दिन की देरी हो गई। इस दौरान आंध्र प्रदेश के 26 तीर्थयात्रियों के साथ ईशा फाउंडेशन के सदस्य और पश्चिम बंगाल के 28 तीर्थयात्री भी काठमांडू में रुके रहे — सभी को समूह वीजा जारी किए गए थे।
वीजा मिला, फिर आई आपदा
तीर्थयात्री गाडू अलीवेनी ने बताया कि वीजा की प्रतीक्षा के दौरान समूह में गहरी निराशा छा गई थी। उनके शब्दों में, 'लोग सोच रहे थे कि भगवान शिव हमें क्यों रोक रहे हैं और उन्हें डर था कि शायद हम जा ही न पाएं।' आखिरकार रात करीब 8:30 बजे वीजा मिला और सभी श्रद्धालु खुशी से झूम उठे। अलीवेनी ने कहा, 'भगवान शिव ने हमें मंजूरी दे दी है — यही सोचकर हम सब प्रसन्न हो गए।' लेकिन अगली सुबह उन्हें बाढ़ की त्रासदी का सामना करना पड़ा।
देरी बनी जीवनदान
विशाखापत्तनम जिला पशुधन विकास संघ के चेयरमैन गाडू वेंकटाप्पाडू ने बताया कि चीनी सरकार ने वीजा इसलिए रोका क्योंकि मानसरोवर मार्ग पर बाढ़ आई हुई थी। वेंकटाप्पाडू के अनुसार, 'एक तरह से हमें लगता है कि यह अच्छा ही हुआ; अगर देरी नहीं होती, तो हम प्रभावित इलाके में फंस जाते।' यह बयान इस बात की पुष्टि करता है कि वीजा प्रक्रिया में हुई देरी ने अनजाने में उन्हें बाढ़ग्रस्त क्षेत्र में फँसने से बचा लिया।
सकुशल वापसी
सभी 26 तीर्थयात्री 29 अगस्त को विशाखापत्तनम सकुशल लौट आए। परिजनों और स्थानीय लोगों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। यात्रियों के चेहरों पर सुरक्षित वापसी की राहत और आस्था की अनुभूति स्पष्ट दिख रही थी। यह घटना कैलाश-मानसरोवर मार्ग पर मानसून के दौरान आने वाले प्राकृतिक खतरों की ओर ध्यान दिलाती है, जो इस क्षेत्र में हर वर्ष तीर्थयात्रियों के लिए चुनौती बनते हैं।