28 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

नेपाल बाढ़ से बचे तमिलनाडु के 21 तीर्थयात्रियों का दिल्ली एयरपोर्ट पर जयशंकर ने किया स्वागत

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
नेपाल बाढ़ से बचे तमिलनाडु के 21 तीर्थयात्रियों का दिल्ली एयरपोर्ट पर जयशंकर ने किया स्वागत

सारांश

नेपाल की भोटेकोशी नदी में आई विनाशकारी बाढ़ से बचाए गए तमिलनाडु के 21 कैलाश मानसरोवर तीर्थयात्री दिल्ली पहुँचे, जहाँ विदेश मंत्री जयशंकर ने स्वयं उनका स्वागत किया। नेपाल में 550 से अधिक मौतें और 977 लापता के बीच भारत ने बेली ब्रिज, राहत सामग्री और 24 घंटे नियंत्रण कक्ष के साथ पूरी ताकत झोंक दी है।

मुख्य बातें

जयशंकर ने 28 अगस्त को दिल्ली हवाई अड्डे पर नेपाल बाढ़ से बचाए गए तमिलनाडु के 21 तीर्थयात्रियों का स्वागत किया।
सभी 21 नागरिक विभिन्न ट्रैवल एजेंटों के माध्यम से कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए थे।
नेपाल की भोटेकोशी नदी में बाढ़ से अब तक लगभग 550 मौतें ; 977 लोग अभी भी संपर्क से बाहर।
भारत ने बेली ब्रिज तैनात किए और विदेश मंत्रालय में 24 घंटे नियंत्रण कक्ष स्थापित किया।
बैठक में विदेश सचिव विक्रम मिसरी और प्रवक्ता रणधीर जायसवाल भी शामिल रहे।
बाढ़ का कारण नेपाल-चीन सीमा के निकट हिमस्खलन को माना जा रहा है।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शुक्रवार, 28 अगस्त को इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे, नई दिल्ली पर तमिलनाडु के 21 तीर्थयात्रियों का व्यक्तिगत रूप से स्वागत किया, जिन्हें नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ से सकुशल बचाया गया था। ये सभी नागरिक कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए थे और बुधवार को काठमांडू क्षेत्र में आई अचानक बाढ़ की चपेट में आ गए थे।

मुख्य घटनाक्रम

जयशंकर ने एक्स पर अपनी पोस्ट में लिखा, 'मैंने तमिलनाडु के 21 पर्यटकों के एक समूह का स्वागत किया, जिन्हें नेपाल में आई बाढ़ से बचाया गया था। उनकी आपबीती सुनकर मैं अत्यंत भावुक हो गया।' उन्होंने इस बचाव अभियान के लिए नेपाली सेना और नेपाल सरकार के प्रति आभार जताया तथा नेपाल स्थित भारतीय दूतावास के समन्वय प्रयासों की भी सराहना की।

ये 21 भारतीय नागरिक विभिन्न ट्रैवल एजेंटों के माध्यम से कैलाश मानसरोवर यात्रा पर निकले थे। बाढ़ आने के बाद नेपाली सेना ने त्वरित बचाव अभियान चलाकर इन्हें सुरक्षित निकाला।

भारत की राहत एवं बचाव कोशिशें

भारत लगातार नेपाल को सहायता भेज रहा है। इसमें बचाव कार्यों के लिए बेली ब्रिज की तैनाती भी शामिल है। विदेश मंत्रालय ने नई दिल्ली में एक चौबीसों घंटे कार्यरत नियंत्रण कक्ष स्थापित किया है, जो कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए नागरिकों की स्थिति पर निगरानी रख रहा है।

विदेश मंत्रालय के अधिकारी उन सभी राज्य सरकारों के संपर्क में हैं जहाँ से तीर्थयात्री यात्रा पर गए हैं। इससे पहले जयशंकर ने काठमांडू और बीजिंग स्थित दूतावासों के अधिकारियों के साथ राहत एवं बचाव प्रयासों पर एक उच्चस्तरीय बैठक की।

उच्चस्तरीय बैठक में क्या हुआ

बैठक में विदेश सचिव विक्रम मिसरी, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। अधिकारियों ने नेपाल भेजी जा रही राहत सामग्री का विवरण प्रस्तुत किया।

बैठक के बाद जयशंकर ने एक्स पर लिखा, 'काठमांडू और बीजिंग स्थित हमारे दूतावासों ने भारतीय नागरिकों की स्थिति और कुशलक्षेम के संबंध में नवीनतम जानकारी प्रदान की। हम इस मुद्दे को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हैं।'

नेपाल में तबाही का पैमाना

नेपाल की भोटेकोशी नदी में आई विनाशकारी बाढ़ से अब तक लगभग 550 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 977 लोग अभी भी संपर्क से बाहर हैं। माना जा रहा है कि यह बाढ़ नेपाल-चीन सीमा के निकट नदी के ऊपरी हिस्से में हिमस्खलन के कारण आई, जिसने निचले इलाकों में व्यापक तबाही मचाई।

इस आपदा में कई मानव बस्तियाँ, सड़कें, जलविद्युत परियोजनाएँ और अन्य बुनियादी ढाँचा बह गया है। यह ऐसे समय में आया है जब मानसून के मौसम में हिमालयी क्षेत्र में इस तरह की घटनाएँ चिंताजनक रूप से बढ़ रही हैं।

आगे की राह

भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि नेपाल में फँसे अन्य भारतीय नागरिकों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करना उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। विदेश मंत्रालय का नियंत्रण कक्ष प्रभावित परिवारों के लिए सहायता का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी पूर्व-चेतावनी तंत्र और यात्रा-सुरक्षा प्रोटोकॉल अभी भी अपर्याप्त दिखते हैं। नेपाल में 550 से अधिक मौतें और 977 लापता यह याद दिलाते हैं कि राजनयिक संबंध और राहत सामग्री ज़रूरी हैं, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या भारत अपने नागरिकों को ऐसे उच्च-जोखिम मार्गों पर भेजने से पहले पर्याप्त जोखिम-आकलन करता है।
RashtraPress
28 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नेपाल बाढ़ से बचाए गए 21 तीर्थयात्री कौन हैं?
ये तमिलनाडु के 21 भारतीय नागरिक हैं जो विभिन्न ट्रैवल एजेंटों के माध्यम से कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए थे और नेपाल में भोटेकोशी नदी में आई विनाशकारी बाढ़ की चपेट में आ गए। नेपाली सेना ने इन्हें सकुशल बचाया और 28 अगस्त को ये दिल्ली पहुँचे।
नेपाल में आई बाढ़ का कारण क्या है?
माना जा रहा है कि नेपाल-चीन सीमा के निकट भोटेकोशी नदी के ऊपरी हिस्से में हिमस्खलन के कारण यह बाढ़ आई। इसने नदी के निचले किनारों पर बस्तियों, सड़कों, जलविद्युत परियोजनाओं और बुनियादी ढाँचे को भारी नुकसान पहुँचाया है।
नेपाल बाढ़ में अब तक कितने लोगों की मौत हुई है?
अब तक लगभग 550 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 977 लोग अभी भी संपर्क से बाहर हैं। यह नेपाल में हाल के वर्षों की सबसे बड़ी बाढ़ आपदाओं में से एक मानी जा रही है।
भारत नेपाल बाढ़ राहत के लिए क्या कर रहा है?
भारत ने बेली ब्रिज की तैनाती सहित राहत सामग्री नेपाल भेजी है और विदेश मंत्रालय में चौबीसों घंटे नियंत्रण कक्ष स्थापित किया है। विदेश मंत्रालय के अधिकारी उन सभी राज्य सरकारों के संपर्क में हैं जहाँ से नागरिक कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए हैं।
कैलाश मानसरोवर यात्रियों के परिवार सहायता के लिए कहाँ संपर्क करें?
विदेश मंत्रालय का नई दिल्ली स्थित नियंत्रण कक्ष चौबीसों घंटे कार्यरत है। परिवार विदेश मंत्रालय के आधिकारिक हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क कर सकते हैं। काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास भी नागरिकों की स्थिति पर निरंतर नज़र रख रहा है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 घंटे पहले
  2. कल
  3. कल
  4. कल
  5. कल
  6. कल
  7. कल
  8. कल