नेपाल बाढ़ से बचे तमिलनाडु के 21 तीर्थयात्रियों का दिल्ली एयरपोर्ट पर जयशंकर ने किया स्वागत
सारांश
मुख्य बातें
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शुक्रवार, 28 अगस्त को इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे, नई दिल्ली पर तमिलनाडु के 21 तीर्थयात्रियों का व्यक्तिगत रूप से स्वागत किया, जिन्हें नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ से सकुशल बचाया गया था। ये सभी नागरिक कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए थे और बुधवार को काठमांडू क्षेत्र में आई अचानक बाढ़ की चपेट में आ गए थे।
मुख्य घटनाक्रम
जयशंकर ने एक्स पर अपनी पोस्ट में लिखा, 'मैंने तमिलनाडु के 21 पर्यटकों के एक समूह का स्वागत किया, जिन्हें नेपाल में आई बाढ़ से बचाया गया था। उनकी आपबीती सुनकर मैं अत्यंत भावुक हो गया।' उन्होंने इस बचाव अभियान के लिए नेपाली सेना और नेपाल सरकार के प्रति आभार जताया तथा नेपाल स्थित भारतीय दूतावास के समन्वय प्रयासों की भी सराहना की।
ये 21 भारतीय नागरिक विभिन्न ट्रैवल एजेंटों के माध्यम से कैलाश मानसरोवर यात्रा पर निकले थे। बाढ़ आने के बाद नेपाली सेना ने त्वरित बचाव अभियान चलाकर इन्हें सुरक्षित निकाला।
भारत की राहत एवं बचाव कोशिशें
भारत लगातार नेपाल को सहायता भेज रहा है। इसमें बचाव कार्यों के लिए बेली ब्रिज की तैनाती भी शामिल है। विदेश मंत्रालय ने नई दिल्ली में एक चौबीसों घंटे कार्यरत नियंत्रण कक्ष स्थापित किया है, जो कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए नागरिकों की स्थिति पर निगरानी रख रहा है।
विदेश मंत्रालय के अधिकारी उन सभी राज्य सरकारों के संपर्क में हैं जहाँ से तीर्थयात्री यात्रा पर गए हैं। इससे पहले जयशंकर ने काठमांडू और बीजिंग स्थित दूतावासों के अधिकारियों के साथ राहत एवं बचाव प्रयासों पर एक उच्चस्तरीय बैठक की।
उच्चस्तरीय बैठक में क्या हुआ
बैठक में विदेश सचिव विक्रम मिसरी, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। अधिकारियों ने नेपाल भेजी जा रही राहत सामग्री का विवरण प्रस्तुत किया।
बैठक के बाद जयशंकर ने एक्स पर लिखा, 'काठमांडू और बीजिंग स्थित हमारे दूतावासों ने भारतीय नागरिकों की स्थिति और कुशलक्षेम के संबंध में नवीनतम जानकारी प्रदान की। हम इस मुद्दे को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हैं।'
नेपाल में तबाही का पैमाना
नेपाल की भोटेकोशी नदी में आई विनाशकारी बाढ़ से अब तक लगभग 550 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 977 लोग अभी भी संपर्क से बाहर हैं। माना जा रहा है कि यह बाढ़ नेपाल-चीन सीमा के निकट नदी के ऊपरी हिस्से में हिमस्खलन के कारण आई, जिसने निचले इलाकों में व्यापक तबाही मचाई।
इस आपदा में कई मानव बस्तियाँ, सड़कें, जलविद्युत परियोजनाएँ और अन्य बुनियादी ढाँचा बह गया है। यह ऐसे समय में आया है जब मानसून के मौसम में हिमालयी क्षेत्र में इस तरह की घटनाएँ चिंताजनक रूप से बढ़ रही हैं।
आगे की राह
भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि नेपाल में फँसे अन्य भारतीय नागरिकों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करना उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। विदेश मंत्रालय का नियंत्रण कक्ष प्रभावित परिवारों के लिए सहायता का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।