जेपीएनआईसी घोटाला: योगी का आरोप — अखिलेश-डिंपल ने ₹900 करोड़ का सरकारी प्रोजेक्ट प्राइवेट कंपनी को सौंपने की रची साजिश
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 29 अगस्त को देवरिया में आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी के नेताओं — अखिलेश यादव, डिंपल यादव और धर्मेंद्र यादव — ने लखनऊ स्थित जयप्रकाश नारायण इंटरनेशनल सेंटर (जेपीएनआईसी) को एक प्राइवेट कंपनी के हवाले करने की योजना बनाई थी, जिसमें वे स्वयं शामिल थे। उनके अनुसार इस परियोजना पर सरकारी खजाने से 864 करोड़ रुपये खर्च हो चुके थे, फिर भी यह अधूरी रही। मुख्यमंत्री ने इसे जनता के पैसे की 'डकैती' करार दिया।
जेपीएनआईसी विवाद: क्या है पूरा मामला
मुख्यमंत्री योगी ने बताया कि जेपीएनआईसी की मूल अनुमानित लागत मात्र ₹200 करोड़ थी। सपा शासनकाल में इस पर ₹864 करोड़ खर्च किए गए, तब भी निर्माण पूरा नहीं हुआ। उनके अनुसार यदि उनकी सरकार इसे पूरा करती, तो अतिरिक्त ₹150 से ₹200 करोड़ और लगते — यानी कुल सरकारी व्यय ₹900 से ₹1,000 करोड़ के बीच पहुँच जाता। योगी के आरोप के अनुसार इस भारी-भरकम खर्च के बाद इस केंद्र को एक ऐसी प्राइवेट कंपनी को सौंपने की तैयारी थी जिसमें अखिलेश, डिंपल व धर्मेंद्र यादव की भागीदारी थी, और जहाँ होटल, क्लब व जिम से होने वाली कमाई भी इन्हीं लोगों के पास जाती।
भाजपा सरकार ने क्या किया
2017 में सत्ता में आने के बाद योगी सरकार ने जेपीएनआईसी को लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) को सौंप दिया। प्राधिकरण ने जाँच कराई और रिपोर्ट आने के बाद विज्ञापन जारी किया। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार इस परियोजना पर अतिरिक्त सरकारी धन खर्च करने के पक्ष में नहीं थी; बल्कि पहले से खर्च हुई राशि को वापस सरकारी खजाने में लाने की व्यवस्था शुरू की गई है।
देवरिया में विकास परियोजनाओं का लोकार्पण
मुख्यमंत्री सलेमपुर और भाटपाररानी विधानसभा क्षेत्रों में ₹305 करोड़ की 80 विकास परियोजनाओं के लोकार्पण व शिलान्यास के बाद जनसभा को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने 27 से 29 अगस्त तक परिवहन निगम की बसों में महिलाओं को दी गई नि:शुल्क यात्रा सुविधा का उल्लेख किया और कहा कि 30 अगस्त से 60 वर्ष से अधिक आयु की महिलाओं को निगम बसों में स्थायी रूप से नि:शुल्क यात्रा मिलेगी।
रोजगार और युवाओं के लिए घोषणाएँ
योगी ने युवाओं को आश्वस्त किया कि जल्द ही एक लाख युवाओं को सरकारी नौकरी दी जाएगी। इसमें 45,000 होमगार्ड, 36,000 पुलिस कार्मिक (जिनमें 4,000 सब-इंस्पेक्टर भी शामिल) और उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के माध्यम से विभिन्न विभागों में 30,000 नियुक्तियाँ शामिल हैं। उन्होंने बताया कि यूपीटीईटी में 13 लाख अभ्यर्थी उत्तीर्ण हुए हैं और उनके लिए भर्ती विज्ञापन शीघ्र जारी होगा। सरकार 2 करोड़ युवाओं को टैबलेट देने की योजना पर काम कर रही है, जिसमें से 50 लाख से अधिक को पहले ही मिल चुके हैं और 25 लाख का नया ऑर्डर दिया गया है।
इंसेफेलाइटिस और पूर्व सरकारों पर निशाना
मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्ववर्ती सपा और कांग्रेस सरकारों के दौरान गोरखपुर, देवरिया, महराजगंज, कुशीनगर, संतकबीरनगर, बस्ती और सिद्धार्थनगर में 15 जुलाई से 15 नवंबर के बीच इंसेफेलाइटिस का आतंक रहता था। उनके अनुसार 40 वर्षों में इस बीमारी से 50,000 मासूमों की जान गई, लेकिन तत्कालीन सरकारें इस ओर उदासीन रहीं। उन्होंने दावा किया कि उनकी सरकार ने इस बीमारी को समाप्त कर दिया है। साथ ही उन्होंने महर्षि देवरहा बाबा के नाम पर देवरिया में स्थापित मेडिकल कॉलेज का उल्लेख किया।
मुख्यमंत्री योगी ने अपने संबोधन के अंत में कहा कि उत्तर प्रदेश अब 'बीमारू' राज्य की छवि से बाहर निकल चुका है और माफिया राज का पूरी तरह अंत हो चुका है। आने वाले समय में हर न्याय पंचायत स्तर पर डिजिटल उद्यमिता के अवसर युवाओं को दिए जाएँगे।