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जेपीएनआईसी को 30 साल की लीज पर निजी हाथों में देने के फैसले पर अखिलेश यादव का योगी सरकार पर तीखा प्रहार

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जेपीएनआईसी को 30 साल की लीज पर निजी हाथों में देने के फैसले पर अखिलेश यादव का योगी सरकार पर तीखा प्रहार

सारांश

लखनऊ के जेपीएनआईसी को 30 साल की लीज पर निजी कंपनियों को सौंपने के योगी कैबिनेट के फैसले पर अखिलेश यादव ने तीखा हमला बोला। ₹821.74 करोड़ की लागत वाले इस बंद पड़े केंद्र का निजी संचालन अब LDA के ज़रिये होगा, जो 30 वर्षों में ₹857 करोड़ सरकार को लौटाएगा।

मुख्य बातें

योगी कैबिनेट ने जेपीएनआईसी को वृंदावन बाटलर्स और राकवुड होटल्स को 30 वर्ष की लीज पर देने को मंजूरी दी।
चयनित कंपनी LDA को सालाना ₹6 करोड़ लीज रेंट देगी, हर वर्ष 5% वृद्धि के साथ।
परियोजना पर अब तक ₹821.74 करोड़ खर्च; LDA 30 वर्षों में ब्याज सहित ₹857 करोड़ सरकार को लौटाएगा।
संचालक से ₹10.11 करोड़ अग्रिम राशि और ₹25 करोड़ परफॉर्मेंस गारंटी ली जाएगी।
सरकारी आयोजनों के लिए प्रतिवर्ष 50 दिन जेपीएनआईसी निःशुल्क उपलब्ध रहेगा।
अखिलेश यादव ने भाजपा पर सार्वजनिक संपत्तियों के निजीकरण और भ्रष्टाचार का आरोप लगाया।

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने लखनऊ स्थित जय प्रकाश नारायण अंतरराष्ट्रीय केंद्र (जेपीएनआईसी) को निजी क्षेत्र को सौंपने के योगी आदित्यनाथ सरकार के फैसले पर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। 26 अगस्त को एक वीडियो संदेश जारी कर उन्होंने भाजपा पर सार्वजनिक संपत्तियों के व्यापक निजीकरण का आरोप लगाया।

कैबिनेट का फैसला: क्या हुआ

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में गोमतीनगर स्थित जेपीएनआईसी को वृंदावन बाटलर्स प्राइवेट लिमिटेड और राकवुड होटल्स एंड रिज़ॉर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड को 30 वर्ष की लीज पर देने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। चयनित कंपनी लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) को सालाना ₹6 करोड़ लीज रेंट देगी, जिसमें हर वर्ष 5% की वृद्धि का प्रावधान है। इसके अतिरिक्त, संचालक कंपनी से ₹10.11 करोड़ की अग्रिम राशि और ₹25 करोड़ की परफॉर्मेंस गारंटी भी ली जाएगी।

परियोजना की पृष्ठभूमि

जेपीएनआईसी का निर्माण समाजवादी पार्टी के शासनकाल में हुआ था और अब तक इस परियोजना पर ₹821.74 करोड़ खर्च हो चुके हैं। यह केंद्र लंबे समय से बंद पड़ा था। गौरतलब है कि पहले इसके संचालन के लिए 35 वर्ष के अनुबंध का प्रस्ताव था, जिसे सहमति के आधार पर घटाकर पहले 30 वर्ष और बाद में नवीनीकरण पर 25 वर्ष किया गया है। सरकार पहले ही इसके संचालन के लिए गठित त्रिस्तरीय सोसाइटी को भंग कर परियोजना LDA को हस्तांतरित कर चुकी है।

सरकार का पक्ष

वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने बताया कि LDA 30 वर्षों में ब्याज सहित ₹857 करोड़ प्रदेश सरकार को लौटाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकारी आयोजनों के लिए प्रतिवर्ष 50 दिन जेपीएनआईसी सरकार को निःशुल्क उपलब्ध कराया जाएगा। सरकार का तर्क है कि निजी संचालन के ज़रिये लंबे समय से बंद इस महत्वाकांक्षी केंद्र को सक्रिय किया जाएगा।

अखिलेश यादव की प्रतिक्रिया

अखिलेश यादव ने अपने वीडियो बयान में कहा, 'भाजपा सरकार है या दुकानदार? अब प्रदेश सरकार ने लखनऊ के जेपीएनआईसी को निजी हाथों में सौंपने का निर्णय कैबिनेट में ले लिया है। अब तो बस सरकार को ही ठेके पर देना या बेचना बचा है।' उन्होंने भाजपा पर कमीशन और निजीकरण के ज़रिये भ्रष्टाचार का भी आरोप लगाया।

आगे क्या होगा

LDA के माध्यम से निजी संचालन का रास्ता अब साफ हो चुका है। लीज से प्राप्त धनराशि को ब्याज सहित संकलित कर LDA द्वारा प्रदेश सरकार को वापस किया जाएगा। यह फैसला उत्तर प्रदेश में सार्वजनिक संपत्तियों के निजीकरण की बहस को और तेज़ कर सकता है, खासकर तब जब विपक्ष पहले से ही इस मुद्दे पर सरकार को घेरने की कोशिश में है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ निर्माण एक सरकार करती है और 'विफलता' का ठप्पा लगाकर अगली सरकार उसे निजी हाथों में सौंप देती है। ₹821.74 करोड़ की लागत के बावजूद यह केंद्र वर्षों तक बंद रहा — यह प्रश्न उठता है कि जवाबदेही किसकी है। 30 वर्षों में ₹857 करोड़ की वापसी का सरकारी दावा आकर्षक लगता है, लेकिन यह तभी सार्थक होगा जब लीज शर्तों का स्वतंत्र ऑडिट सुनिश्चित हो। विपक्ष का विरोध राजनीतिक रूप से स्वाभाविक है, मगर असली सवाल यह है कि क्या यह मॉडल जनता के निवेश पर उचित प्रतिफल देगा।
RashtraPress
26 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जेपीएनआईसी क्या है और इसे निजी हाथों में क्यों दिया जा रहा है?
जय प्रकाश नारायण अंतरराष्ट्रीय केंद्र (जेपीएनआईसी) लखनऊ के गोमतीनगर में स्थित एक बहुउद्देशीय सार्वजनिक केंद्र है, जिसका निर्माण समाजवादी पार्टी सरकार के कार्यकाल में हुआ था। ₹821.74 करोड़ की लागत से बना यह केंद्र लंबे समय से बंद पड़ा था, इसलिए योगी सरकार ने इसे निजी संचालन के ज़रिये सक्रिय करने का निर्णय लिया।
जेपीएनआईसी की लीज की शर्तें क्या हैं?
वृंदावन बाटलर्स प्राइवेट लिमिटेड और राकवुड होटल्स एंड रिज़ॉर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड को 30 वर्ष की लीज दी जाएगी। चयनित कंपनी LDA को सालाना ₹6 करोड़ लीज रेंट देगी, जिसमें हर वर्ष 5% वृद्धि होगी। इसके अलावा ₹10.11 करोड़ अग्रिम राशि और ₹25 करोड़ की परफॉर्मेंस गारंटी भी ली जाएगी।
अखिलेश यादव ने इस फैसले पर क्या कहा?
अखिलेश यादव ने वीडियो जारी कर कहा, 'भाजपा सरकार है या दुकानदार? अब तो बस सरकार को ही ठेके पर देना या बेचना बचा है।' उन्होंने भाजपा पर कमीशन और निजीकरण के ज़रिये भ्रष्टाचार का आरोप भी लगाया।
सरकार को जेपीएनआईसी की लीज से कितना फायदा होगा?
वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना के अनुसार, LDA 30 वर्षों में ब्याज सहित ₹857 करोड़ प्रदेश सरकार को वापस करेगा। साथ ही, सरकारी आयोजनों के लिए प्रतिवर्ष 50 दिन जेपीएनआईसी निःशुल्क उपलब्ध कराया जाएगा।
जेपीएनआईसी के संचालन की प्रक्रिया कैसे बदली है?
पहले जेपीएनआईसी के संचालन के लिए एक त्रिस्तरीय सोसाइटी गठित थी, जिसे सरकार पहले ही भंग कर चुकी है। परियोजना LDA को हस्तांतरित की जा चुकी है और अब LDA के माध्यम से निजी संचालन का रास्ता साफ हो गया है।
राष्ट्र प्रेस
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