सुभाष चंद्रा दिवाला मामला: यूनियन बैंक एनसीएलएटी में देगा चुनौती, एचडीएफसी बैंक के ₹680 करोड़ के दावे पर भी सवाल
सारांश
मुख्य बातें
यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ने 29 अगस्त 2026 को घोषणा की कि वह एस्सेल समूह के चेयरमैन सुभाष चंद्रा से जुड़े व्यक्तिगत दिवाला मामले में राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) द्वारा स्वीकृत समाधान योजना को राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) में चुनौती देगा। यह कदम तब उठाया गया जब कुछ निजी ऋणदाताओं के बहुमत समर्थन के बल पर यह योजना मंजूर हो गई, जबकि सार्वजनिक क्षेत्र के प्रमुख बैंकों ने इसका विरोध किया था।
मामले की पृष्ठभूमि
सुभाष चंद्रा के खिलाफ व्यक्तिगत दिवाला कार्यवाही इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड की याचिका पर शुरू हुई थी। इस कार्यवाही में यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, केनरा बैंक और एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस सहित कई प्रमुख सार्वजनिक ऋणदाताओं ने प्रस्तावित समाधान योजना के खिलाफ मतदान किया था और एनसीएलटी से इसे अस्वीकार करने का अनुरोध किया था।
गौरतलब है कि मीडिया में व्यापक रूप से उद्धृत ₹22,006 करोड़ का आँकड़ा दिवाला कार्यवाही में दाखिल कुल दावों का प्रतिनिधित्व करता है — न कि वर्तमान देय राशि या अंतिम वित्तीय दायित्व।
बैंकों की आपत्ति और मतदान
यूनियन बैंक ने अपने आधिकारिक बयान में स्पष्ट किया कि उसकी ब्रिटेन स्थित इकाई यूनियन बैंक ऑफ इंडिया (यूके) लिमिटेड सहित अन्य सार्वजनिक संस्थानों ने समाधान योजना के विरुद्ध मत दिया था। बैंक का तर्क था कि प्रस्तावित योजना में ऋणदाताओं के हितों का पर्याप्त संरक्षण नहीं है।
बैंक ने कहा, 'इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड द्वारा दायर व्यक्तिगत दिवाला मामले में यूनियन बैंक ऑफ इंडिया (यूके) लिमिटेड, केनरा बैंक, एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस और अन्य सार्वजनिक क्षेत्र के संस्थानों ने समाधान योजना को अस्वीकार किया था और एनसीएलटी के समक्ष इसकी मंजूरी का विरोध किया था। लेकिन कुछ निजी ऋणदाताओं के बहुमत समर्थन के कारण योजना को मंजूरी मिल गई। अब यूनियन बैंक इस निर्णय को तत्काल एनसीएलएटी में चुनौती देगा।'
एचडीएफसी बैंक की स्थिति
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब एचडीएफसी बैंक भी इसी आदेश के खिलाफ अपील दायर करने के कानूनी विकल्पों पर विचार कर रहा है। बैंक ने हाल ही में खुलासा किया कि उसके लगभग ₹680 करोड़ के दावे में से केवल 3.2 प्रतिशत राशि को ही स्वीकार किया गया — एक आँकड़ा जिसे बैंक अत्यधिक नुकसानदायक मान रहा है।
सुभाष चंद्रा का पक्ष
चंद्रा ने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि उन्होंने व्यक्तिगत रूप से कोई ऋण नहीं लिया था। उनके अनुसार, उन्होंने केवल एस्सेल ग्रुप से जुड़ी उधार लेने वाली कंपनियों के लिए व्यक्तिगत गारंटर की भूमिका निभाई थी।
आगे क्या होगा
एनसीएलटी के इस फैसले ने बैंकिंग और वित्तीय जगत में व्यापक बहस छेड़ दी है, क्योंकि स्वीकृत समाधान योजना में ऋणदाताओं को उनके दावों का बेहद छोटा हिस्सा मिलने की संभावना है। एनसीएलएटी में यूनियन बैंक की अपील से यह तय होगा कि सार्वजनिक ऋणदाताओं के हितों को व्यक्तिगत दिवाला मामलों में किस हद तक संरक्षण मिल सकता है — और यह फैसला भविष्य के ऐसे मामलों के लिए एक महत्वपूर्ण मिसाल बन सकता है।