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यूपी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में 40 नए अधिकारी नियुक्त, CM योगी ने कहा — पारदर्शिता और योग्यता सर्वोच्च

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यूपी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में 40 नए अधिकारी नियुक्त, CM योगी ने कहा — पारदर्शिता और योग्यता सर्वोच्च

सारांश

उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में वर्षों बाद हुई नियमित भर्ती में 40 अधिकारी चुने गए — 21 आईआईटी से। पुरानी साक्षात्कार-आधारित व्यवस्था की जगह 85% लिखित परीक्षा वाली नई प्रक्रिया लागू की गई। CM योगी ने कहा — पारदर्शिता और योग्यता ही सरकारी सेवाओं की नींव होगी।

मुख्य बातें

40 नए अधिकारियों ने 1 सितंबर 2026 को CM योगी आदित्यनाथ से भेंट की — 26 सहायक पर्यावरण अभियंता और 14 सहायक वैज्ञानिक अधिकारी ।
चयनित अधिकारियों में 21 विभिन्न आईआईटी से शिक्षित हैं; 8 महिला अधिकारी भी शामिल।
1995 की विनियमावली में संशोधन कर भर्ती को लिखित परीक्षा (85%) और साक्षात्कार (15%) आधारित बनाया गया।
लिखित परीक्षा 27 अप्रैल को आईआईटी कानपुर के माध्यम से आयोजित; अंतिम परिणाम 8 जुलाई को घोषित।
नवचयनित अधिकारियों के लिए एक माह का प्रशिक्षण निर्धारित, जिसमें आईआईएम लखनऊ में एक सप्ताह का कार्यक्रम शामिल।

उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में समूह 'ख' की नियमित भर्ती प्रक्रिया पूरी होने के बाद नवचयनित 40 अधिकारियों ने मंगलवार, 1 सितंबर 2026 को लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से शिष्टाचार भेंट की। मुख्यमंत्री ने इन अधिकारियों को बधाई देते हुए कहा कि लंबे अंतराल के बाद हुई इस भर्ती से बोर्ड की कार्यक्षमता मजबूत होगी और पर्यावरण संरक्षण के कार्यों को नई गति मिलेगी।

भर्ती प्रक्रिया में बड़ा बदलाव

इस भर्ती की सबसे उल्लेखनीय बात यह रही कि 1995 की पुरानी विनियमावली में संशोधन कर चयन प्रक्रिया को केवल साक्षात्कार-आधारित व्यवस्था से बदलकर द्विस्तरीय लिखित परीक्षा और साक्षात्कार पर आधारित किया गया। नई व्यवस्था में लिखित परीक्षा को 85 प्रतिशत और साक्षात्कार को 15 प्रतिशत वेटेज दिया गया, जिससे शैक्षणिक एवं तकनीकी योग्यता को चयन का प्रमुख आधार बनाया गया।

संशोधित विनियमावली के बाद 27 फरवरी 2026 को विज्ञापन जारी हुआ। 27 अप्रैल को प्रदेश के विभिन्न शहरों में एक साथ लिखित परीक्षा आयोजित की गई, जिसका संचालन आईआईटी कानपुर के माध्यम से किया गया। परिणाम 8 जून को घोषित हुआ।

साक्षात्कार पैनल और अंतिम चयन

साक्षात्कार के लिए उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की अध्यक्षता में चार पैनल गठित किए गए, जिनमें विभिन्न आईआईटी और विश्वविद्यालयों के विशेषज्ञ भी शामिल थे। 4 जुलाई को साक्षात्कार पूरा हुआ और 8 जुलाई को अंतिम परिणाम घोषित किया गया। कुल चयनित 40 अधिकारियों में 26 सहायक पर्यावरण अभियंता और 14 सहायक वैज्ञानिक अधिकारी हैं।

चयनित अधिकारियों में 21 विभिन्न आईआईटी से शिक्षित हैं, जबकि शेष ने देश और प्रदेश के अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों से शिक्षा प्राप्त की है। इनमें 8 महिला अधिकारी भी शामिल हैं।

CM योगी का संदेश — जिम्मेदारी, संवेदनशीलता, ईमानदारी

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नवचयनित अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार का लक्ष्य ऐसी चयन व्यवस्था को मजबूत करना है, जिसमें पारदर्शिता के साथ योग्यता को सर्वोच्च प्राथमिकता मिले। उन्होंने कहा कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की जिम्मेदारी सीधे प्रदेश के पर्यावरण और लोगों के स्वस्थ जीवन से जुड़ी है, इसलिए अधिकारी अपनी तकनीकी दक्षता का उपयोग पूरी जिम्मेदारी, संवेदनशीलता और ईमानदारी के साथ करें।

योगी ने अधिकारियों को प्रशिक्षण को गंभीरता से लेने और मैदानी स्तर की चुनौतियों को समझने के निर्देश भी दिए।

प्रशिक्षण कार्यक्रम

नवचयनित अधिकारियों को सीधे क्षेत्र में तैनात करने के बजाय एक माह का प्रशिक्षण कार्यक्रम निर्धारित किया गया है। इसके तहत एक सप्ताह का कार्यक्रम आईआईएम, लखनऊ में आयोजित किया जा रहा है। सरकार का मानना है कि तकनीकी रूप से दक्ष अधिकारियों की नियमित भर्ती और प्रशिक्षण से बोर्ड की निगरानी क्षमता, पर्यावरणीय मानकों के अनुपालन और मैदानी कार्यों की प्रभावशीलता में सुधार होगा।

यह भर्ती ऐसे समय में हुई है जब उत्तर प्रदेश के कई शहर वायु प्रदूषण के गंभीर स्तरों से जूझ रहे हैं और पर्यावरण नियामक संस्थाओं पर कार्यबल की कमी का दबाव लंबे समय से बना हुआ था। नए अधिकारियों की नियुक्ति इस दिशा में एक ठोस कदम मानी जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी क्रियान्वयन की होगी — क्या ये अधिकारी वास्तव में मैदानी स्तर पर उद्योगों पर नकेल कस पाएंगे या बोर्ड की पुरानी निष्क्रियता जारी रहेगी। उत्तर प्रदेश के लखनऊ, कानपुर और आगरा जैसे शहर लगातार वायु गुणवत्ता सूचकांक में खराब प्रदर्शन कर रहे हैं, और इसकी एक बड़ी वजह नियामक क्षमता की कमी रही है। आईआईटी और आईआईएम जैसे संस्थानों की भागीदारी से प्रक्रिया की विश्वसनीयता बढ़ी है, किंतु बोर्ड को तकनीकी प्रतिभा के साथ-साथ राजनीतिक दबाव से स्वायत्तता भी चाहिए — जो अभी तक किसी घोषणा में नहीं आई।
RashtraPress
1 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यूपी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में हाल ही में कितने अधिकारी नियुक्त हुए?
उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में समूह 'ख' के कुल 40 अधिकारी नियुक्त किए गए हैं — 26 सहायक पर्यावरण अभियंता और 14 सहायक वैज्ञानिक अधिकारी। इनमें 21 विभिन्न आईआईटी से शिक्षित हैं और 8 महिला अधिकारी भी शामिल हैं।
नई भर्ती प्रक्रिया पुरानी व्यवस्था से कैसे अलग है?
पहले समूह 'ख' की भर्ती मुख्यतः केवल साक्षात्कार के आधार पर होती थी। 1995 की विनियमावली में संशोधन कर अब लिखित परीक्षा को 85% और साक्षात्कार को 15% वेटेज दिया गया है, जिससे तकनीकी और शैक्षणिक योग्यता को प्रमुखता मिली।
भर्ती परीक्षा का आयोजन किसने किया और परिणाम कब आया?
लिखित परीक्षा 27 अप्रैल 2026 को प्रदेश के विभिन्न शहरों में आईआईटी कानपुर के माध्यम से आयोजित की गई। परिणाम 8 जून को घोषित हुआ और साक्षात्कार 4 जुलाई को पूरा होने के बाद अंतिम परिणाम 8 जुलाई को जारी किया गया।
नवचयनित अधिकारियों के लिए प्रशिक्षण की क्या व्यवस्था है?
CM योगी के निर्देशानुसार नवचयनित अधिकारियों के लिए एक माह का प्रशिक्षण कार्यक्रम निर्धारित किया गया है। इसमें एक सप्ताह का कार्यक्रम आईआईएम, लखनऊ में आयोजित किया जा रहा है।
CM योगी ने नवचयनित अधिकारियों को क्या संदेश दिया?
CM योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सरकारी सेवाओं में पारदर्शिता के साथ योग्यता को सर्वोच्च प्राथमिकता देना प्रदेश सरकार का लक्ष्य है। उन्होंने अधिकारियों से अपेक्षा जताई कि वे तकनीकी दक्षता का उपयोग जिम्मेदारी, संवेदनशीलता और ईमानदारी के साथ करें।
राष्ट्र प्रेस
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