यूपी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में 40 नए अधिकारी नियुक्त, CM योगी ने कहा — पारदर्शिता और योग्यता सर्वोच्च
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में समूह 'ख' की नियमित भर्ती प्रक्रिया पूरी होने के बाद नवचयनित 40 अधिकारियों ने मंगलवार, 1 सितंबर 2026 को लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से शिष्टाचार भेंट की। मुख्यमंत्री ने इन अधिकारियों को बधाई देते हुए कहा कि लंबे अंतराल के बाद हुई इस भर्ती से बोर्ड की कार्यक्षमता मजबूत होगी और पर्यावरण संरक्षण के कार्यों को नई गति मिलेगी।
भर्ती प्रक्रिया में बड़ा बदलाव
इस भर्ती की सबसे उल्लेखनीय बात यह रही कि 1995 की पुरानी विनियमावली में संशोधन कर चयन प्रक्रिया को केवल साक्षात्कार-आधारित व्यवस्था से बदलकर द्विस्तरीय लिखित परीक्षा और साक्षात्कार पर आधारित किया गया। नई व्यवस्था में लिखित परीक्षा को 85 प्रतिशत और साक्षात्कार को 15 प्रतिशत वेटेज दिया गया, जिससे शैक्षणिक एवं तकनीकी योग्यता को चयन का प्रमुख आधार बनाया गया।
संशोधित विनियमावली के बाद 27 फरवरी 2026 को विज्ञापन जारी हुआ। 27 अप्रैल को प्रदेश के विभिन्न शहरों में एक साथ लिखित परीक्षा आयोजित की गई, जिसका संचालन आईआईटी कानपुर के माध्यम से किया गया। परिणाम 8 जून को घोषित हुआ।
साक्षात्कार पैनल और अंतिम चयन
साक्षात्कार के लिए उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की अध्यक्षता में चार पैनल गठित किए गए, जिनमें विभिन्न आईआईटी और विश्वविद्यालयों के विशेषज्ञ भी शामिल थे। 4 जुलाई को साक्षात्कार पूरा हुआ और 8 जुलाई को अंतिम परिणाम घोषित किया गया। कुल चयनित 40 अधिकारियों में 26 सहायक पर्यावरण अभियंता और 14 सहायक वैज्ञानिक अधिकारी हैं।
चयनित अधिकारियों में 21 विभिन्न आईआईटी से शिक्षित हैं, जबकि शेष ने देश और प्रदेश के अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों से शिक्षा प्राप्त की है। इनमें 8 महिला अधिकारी भी शामिल हैं।
CM योगी का संदेश — जिम्मेदारी, संवेदनशीलता, ईमानदारी
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नवचयनित अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार का लक्ष्य ऐसी चयन व्यवस्था को मजबूत करना है, जिसमें पारदर्शिता के साथ योग्यता को सर्वोच्च प्राथमिकता मिले। उन्होंने कहा कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की जिम्मेदारी सीधे प्रदेश के पर्यावरण और लोगों के स्वस्थ जीवन से जुड़ी है, इसलिए अधिकारी अपनी तकनीकी दक्षता का उपयोग पूरी जिम्मेदारी, संवेदनशीलता और ईमानदारी के साथ करें।
योगी ने अधिकारियों को प्रशिक्षण को गंभीरता से लेने और मैदानी स्तर की चुनौतियों को समझने के निर्देश भी दिए।
प्रशिक्षण कार्यक्रम
नवचयनित अधिकारियों को सीधे क्षेत्र में तैनात करने के बजाय एक माह का प्रशिक्षण कार्यक्रम निर्धारित किया गया है। इसके तहत एक सप्ताह का कार्यक्रम आईआईएम, लखनऊ में आयोजित किया जा रहा है। सरकार का मानना है कि तकनीकी रूप से दक्ष अधिकारियों की नियमित भर्ती और प्रशिक्षण से बोर्ड की निगरानी क्षमता, पर्यावरणीय मानकों के अनुपालन और मैदानी कार्यों की प्रभावशीलता में सुधार होगा।
यह भर्ती ऐसे समय में हुई है जब उत्तर प्रदेश के कई शहर वायु प्रदूषण के गंभीर स्तरों से जूझ रहे हैं और पर्यावरण नियामक संस्थाओं पर कार्यबल की कमी का दबाव लंबे समय से बना हुआ था। नए अधिकारियों की नियुक्ति इस दिशा में एक ठोस कदम मानी जा रही है।