भारतेंदु नाट्य अकादमी का राष्ट्रचेतना महाभियान: UP के 5-10 लाख युवाओं तक पहुँचेंगे ऐतिहासिक नाटक
सारांश
मुख्य बातें
भारतेंदु नाट्य अकादमी, उत्तर प्रदेश ने 1 जून 2026 को एक व्यापक राष्ट्रचेतना नाट्य अभियान की घोषणा की, जिसके तहत स्वतंत्रता संग्राम के वीरों, ऐतिहासिक नायकों और महान साहित्यकारों की कृतियों पर आधारित भव्य नाट्य प्रस्तुतियाँ प्रदेश के सभी जिलों में आयोजित की जाएंगी। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह के अनुसार, इस पहल से 5 से 10 लाख युवाओं तक प्रत्यक्ष सांस्कृतिक पहुँच सुनिश्चित की जाएगी।
फ्लैगशिप प्रस्तुतियाँ और नाटकों की सूची
इस अभियान में 'आनंदमठ' और 'महाराजा सुहेलदेव' को प्रमुख फ्लैगशिप प्रस्तुतियों के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके अतिरिक्त स्वतंत्रता संग्राम और भारतीय इतिहास के वीर नायकों पर आधारित 'बिजली पासी', 'झाँसी की रानी', 'काकोरी ट्रेन एक्शन', '1857 की क्रांति' और 'शिवाजी महाराज' जैसे नाटकों का मंचन प्रस्तावित है।
साहित्य और राष्ट्रीय चेतना से जुड़े विषयों पर 'रश्मिरथी', 'अज्ञेय', 'अटल बिहारी वाजपेयी', 'मुंशी प्रेमचंद कृत बड़े भाई साहब', 'जयशंकर प्रसाद', 'सूर्यकांत त्रिपाठी निराला', 'भारतेंदु हरिश्चंद्र' और 'वीर सावरकर' पर आधारित प्रस्तुतियाँ भी तैयार की जाएंगी। प्रत्येक नाटक की अवधि लगभग एक घंटा पचास मिनट से दो घंटे तक निर्धारित है।
चरणबद्ध कार्ययोजना
जून 2026 से चरणबद्ध तरीके से तैयारियाँ शुरू होंगी। पहले चरण में ऐतिहासिक स्रोतों और साहित्यिक कृतियों का संकलन, विशेषज्ञों से परामर्श और शोध दस्तावेज़ तैयार किए जाएंगे। इसके बाद अनुभवी नाटककारों द्वारा स्क्रिप्ट लेखन, संवाद, गीत और दृश्य संरचना विकसित की जाएगी।
जून के दूसरे पखवाड़े में कलाकारों का चयन होगा और उन्हें अभिनय, वाचन, शारीरिक अभिव्यक्ति, भावाभिनय, संगीत तथा नृत्य का विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। 25 जून से 25 जुलाई तक प्रतिदिन 6 से 8 घंटे की रिहर्सल प्रस्तावित है, जिसके साथ मंच सज्जा, प्रकाश व्यवस्था, ध्वनि संयोजन और वेशभूषा को अंतिम रूप दिया जाएगा।
पहला भव्य मंचन और विस्तार योजना
2 अगस्त 2026 को लखनऊ में इन नाटकों का पहला भव्य मंचन प्रस्तावित है, जिसमें विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति के साथ मीडिया कवरेज और दर्शकों की प्रतिक्रिया भी दर्ज की जाएगी। इसके बाद अगस्त से नवंबर 2026 तक विद्यालयों और विश्वविद्यालयों में तथा दिसंबर 2026 से फरवरी 2027 तक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थलों पर नियमित प्रस्तुतियाँ आयोजित की जाएंगी।
गौरतलब है कि भारतेंदु नाट्य अकादमी की अपनी प्रस्तुतियों के साथ-साथ उत्तर प्रदेश और देश के अन्य राज्यों से भी उत्कृष्ट नाट्य प्रस्तुतियाँ आमंत्रित की जाएंगी। इसके लिए राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय समाचार पत्रों तथा ऑनलाइन माध्यमों से विज्ञापन जारी किया जाएगा। आवेदन की अंतिम तिथि 20 जून 2026 निर्धारित है।
चयन प्रक्रिया
दो चरणों में चयन प्रक्रिया पूरी होगी — पहले चरण में आलेखों का मूल्यांकन और दूसरे चरण में रिकॉर्डेड या लाइव प्रस्तुतियों की गुणवत्ता, मंचन क्षमता और प्रभाव का परीक्षण। अंतिम रूप से 15 से 20 श्रेष्ठ नाटकों का चयन किया जाएगा।
सांस्कृतिक प्रभाव और आगे की राह
मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि विद्यालयों, विश्वविद्यालयों, संग्रहालयों, पर्यटन भवनों, प्रेक्षागृहों, शहीद स्थलों और प्रमुख शहरों में होने वाले ये मंचन राष्ट्रभक्ति, ऐतिहासिक गौरव और सांस्कृतिक एकता को नई ऊर्जा देंगे। साथ ही प्रदेश के कलाकारों को बड़े मंच उपलब्ध होंगे और भारतीय रंगमंच को भी नई दिशा मिलेगी। यह पहल उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।