UP विधान परिषद की 11 सीटों पर चुनाव घोषित, 23 अक्टूबर को मतदान, 29 सितंबर से नामांकन
सारांश
मुख्य बातें
भारत निर्वाचन आयोग ने उत्तर प्रदेश विधान परिषद की 11 सीटों पर द्विवार्षिक चुनाव का कार्यक्रम घोषित कर दिया है, जिसमें खण्ड स्नातक की 5 सीटें और खण्ड शिक्षक की 6 सीटें शामिल हैं। 23 अक्टूबर 2026 को मतदान होगा और 27 अक्टूबर को मतगणना कराई जाएगी। पूरी निर्वाचन प्रक्रिया 31 अक्टूबर से पहले सम्पन्न करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
चुनाव कार्यक्रम की पूरी समयरेखा
उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने मंगलवार, 22 सितंबर 2026 को बताया कि इन 11 निर्वाचन क्षेत्रों के निर्वाचित सदस्यों का कार्यकाल 6 दिसंबर 2026 को समाप्त हो रहा है, इसी के मद्देनज़र रिक्त सीटों को भरने के लिए यह चुनाव कराए जा रहे हैं।
चुनाव कार्यक्रम के अनुसार, 29 सितंबर को अधिसूचना जारी होगी। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 6 अक्टूबर है। नामांकन पत्रों की जाँच 7 अक्टूबर को की जाएगी और उम्मीदवार 9 अक्टूबर तक अपना नाम वापस ले सकेंगे। 23 अक्टूबर को मतदान सुबह 8 बजे से शाम 4 बजे तक चलेगा।
किन सदस्यों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है
खण्ड स्नातक की पाँच सीटों से जिन सदस्यों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है, उनमें लखनऊ खण्ड स्नातक से इंजीनियर अवनीश कुमार सिंह, वाराणसी खण्ड स्नातक से आशुतोष सिन्हा, आगरा खण्ड स्नातक से डॉ. मानवेन्द्र प्रताप सिंह 'गुरु जी', मेरठ खण्ड स्नातक से दिनेश कुमार गोयल और इलाहाबाद-झाँसी खण्ड स्नातक से डॉ. मान सिंह यादव शामिल हैं।
खण्ड शिक्षक की छह सीटों पर लखनऊ से उमेश द्विवेदी, वाराणसी से लाल बिहारी यादव, आगरा से डॉ. आकाश अग्रवाल (वित्तविहीन), मेरठ से श्रीचन्द शर्मा, बरेली-मुरादाबाद से हरी सिंह ढिल्लो और गोरखपुर-फैजाबाद से ध्रुव कुमार त्रिपाठी का कार्यकाल पूरा हो रहा है।
आदर्श आचार संहिता लागू
चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के साथ ही उत्तर प्रदेश के अधिकांश जिलों में आदर्श आचार संहिता तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है। हालाँकि कानपुर नगर, कानपुर देहात और उन्नाव को इस संहिता के दायरे से बाहर रखा गया है। आचार संहिता भारत निर्वाचन आयोग द्वारा 26 दिसंबर 2016 को जारी निर्देशों के प्रावधानों के अनुसार प्रभावी रहेगी।
आम जनता पर असर
विधान परिषद के ये चुनाव सीधे उन मतदाताओं से जुड़े हैं जो स्नातक या शिक्षक मतदाता सूची में पंजीकृत हैं। गौरतलब है कि ये सामान्य विधानसभा चुनाव नहीं हैं, बल्कि विशेष श्रेणी के मतदाताओं — स्नातकों और शिक्षकों — द्वारा अपने प्रतिनिधि चुनने की प्रक्रिया है।
यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में आगामी राजनीतिक गतिविधियाँ तेज़ हैं और सभी प्रमुख दल इन सीटों पर अपनी स्थिति मज़बूत करने की रणनीति बना रहे हैं। आगामी हफ्तों में प्रत्याशियों की घोषणा और प्रचार अभियान की शुरुआत होने की संभावना है।