यूपीएफएसडीए का बड़ा कदम: बल्क ट्रांसफर रक्त की गुणवत्ता जांच अनिवार्य, एनबीटीसी को भेजा प्रस्ताव
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (यूपीएफएसडीए) ने 21 अक्टूबर 2026 को दूसरे राज्यों से बल्क ट्रांसफर के ज़रिए आने वाले रक्त और उसके अवयवों की गुणवत्ता जांच को प्राप्तकर्ता केंद्र पर भी अनिवार्य बनाने के लिए राष्ट्रीय रक्त आधान परिषद (एनबीटीसी) को एक विस्तृत प्रस्ताव भेजा है। आयुक्त एफएसडीए डॉ. रोशन जैकब की ओर से भेजे गए इस प्रस्ताव का उद्देश्य हेपेटाइटिस-बी, हेपेटाइटिस-सी और एचआईवी जैसी रक्त-जनित गंभीर बीमारियों के जोखिम को कम करना है।
पृष्ठभूमि: मार्च 2026 के निरीक्षण ने खोली खामियां
मार्च 2026 में यूपीएफएसडीए ने आयुक्त के निर्देश पर चैरिटेबल ट्रस्टों द्वारा संचालित 208 रक्त केंद्रों का विशेष निरीक्षण कराया था। इसमें 55 केंद्रों के लाइसेंस निलंबित किए गए। जांच में संक्रमण परीक्षण, तापमान नियंत्रित भंडारण, तकनीकी स्टाफ, स्वच्छता और रिकॉर्ड रखरखाव में गंभीर खामियां सामने आईं।
विशेष रूप से दूसरे राज्यों से पैक्ड रेड ब्लड सेल्स (पीआरबीसी) की बड़ी खेप मंगाने के दौरान ट्रांसफ्यूजन-ट्रांसमिसिबल इन्फेक्शन (टीटीआई) जांच रिपोर्ट, डोनर फॉर्म और परिवहन के दौरान निर्धारित तापमान बनाए रखने के रिकॉर्ड अनुपलब्ध मिले। कई केंद्रों पर बल्क ट्रांसफर के पैकेज पर स्पष्ट पहचान संबंधी जानकारी भी नहीं थी।
प्रस्ताव में क्या है
यूपीएफएसडीए के प्रस्ताव के तहत प्रत्येक बल्क खेप की कम से कम एक प्रतिशत यूनिट अथवा प्रति खेप न्यूनतम एक यूनिट — जो भी अधिक हो — की जांच स्थानीय औषधि निरीक्षक की मौजूदगी में राजकीय रक्त केंद्र में कराने की सिफारिश की गई है। राष्ट्रीय स्तर पर तीन प्रमुख बदलाव प्रस्तावित हैं:
पहला, प्रत्येक यूनिट के साथ कम से कम दो पायलट ट्यूब सेगमेंट (कुल लगभग 20 सेंटीमीटर) उपलब्ध कराए जाएं। दूसरा, यूनिट पर 'बल्क ट्रांसफर्ड यूनिट' अंकित करने के साथ आपूर्तिकर्ता और प्राप्तकर्ता केंद्र का नाम, पता तथा लाइसेंस संख्या दर्ज हो। तीसरा, प्राप्तकर्ता केंद्र को बल्क ट्रांसफर से पहले स्थानीय औषधि निरीक्षक को सूचना देना अनिवार्य किया जाए।
21 अगस्त 2026 को जारी निर्देश
यूपीएफएसडीए ने 21 अगस्त 2026 को पत्र के माध्यम से प्रदेश के सभी रक्त केंद्रों को निर्देश जारी किए। इनके अनुसार, दूसरे राज्यों से पीआरबीसी की बल्क आपूर्ति लेते समय प्रत्येक यूनिट के साथ मूल रक्त की कम से कम 30 सेंटीमीटर लंबी पायलट ट्यूब (तीन सेगमेंट) प्राप्त करना अनिवार्य होगा। टीटीआई जांच रिपोर्ट और डोनर फॉर्म की प्रति भी हर यूनिट के साथ अनिवार्य रहेगी।
परिवहन के दौरान निर्धारित तापमान का रिकॉर्ड, पर्याप्त क्षमता वाले ब्लड स्टोरेज कैबिनेट और थर्मोग्राफ की जानकारी भी उपलब्ध रखनी होगी। पायलट ट्यूब और मरीज के रक्त नमूने कम से कम सात दिन सुरक्षित रखना अनिवार्य होगा।
संक्रमण जांच और तकनीकी मानक
प्रदेश के रक्त केंद्रों में आपातकालीन परिस्थितियों को छोड़कर सभी रक्त नमूनों की संक्रमण जांच 100 प्रतिशत एलिसा (ELISA) अथवा केमिलुमिनेसेंस तकनीक से करना अनिवार्य किया गया है। डोनर का आधार कार्ड और आधार से लिंक मोबाइल नंबर डोनर रजिस्टर में, तथा मरीज या उसके तीमारदार का आधार विवरण इशू रजिस्टर में दर्ज करना होगा।
तकनीकी स्टाफ की अनुपस्थिति में रक्त केंद्र का संचालन वर्जित होगा। गंभीर अनियमितताओं या अनिवार्य रिकॉर्ड में कमी पर लाइसेंस निरस्त करने की कार्रवाई की जा सकती है। सभी उपकरणों का साल में कम से कम एक बार कैलिब्रेशन भी अनिवार्य होगा।
नए लाइसेंस के लिए कड़ी शर्तें
रक्त केंद्रों के नए लाइसेंस और नवीनीकरण के लिए ट्रस्ट का कम से कम दो वर्षों से कार्यरत होना, पर्याप्त संसाधन होना और किसी एक व्यक्ति या परिवार का नियंत्रण न होना आवश्यक किया गया है। आवेदन के साथ पैन कार्ड, आयकर अधिनियम के तहत पंजीकरण प्रमाणपत्र, पिछले दो वर्षों की धर्मार्थ गतिविधियों का विवरण और ऑडिट रिपोर्ट देना अनिवार्य होगा।
गौरतलब है कि 28 अक्टूबर 2015 के एनबीटीसी दिशा-निर्देशों के तहत आपूर्तिकर्ता और प्राप्तकर्ता केंद्रों की जिम्मेदारियां पहले से निर्धारित हैं, परंतु बल्क ट्रांसफर पर प्राप्तकर्ता स्तर पर जांच का ठोस तंत्र अब तक नहीं था। यूपीएफएसडीए का यह प्रस्ताव उसी अंतर को भरने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। रक्तदाता से मरीज तक हर यूनिट का पूर्ण ट्रेसेबिलिटी रिकॉर्ड सुनिश्चित होने से भविष्य में किसी भी संदिग्ध यूनिट के स्रोत की पहचान त्वरित रूप से की जा सकेगी।