28 अक्टूबर 2026
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यूपी के 10 जिलों में 40 ब्लड सेंटरों की जांच, 7 पर तत्काल रोक; ELISA जांच में लापरवाही उजागर

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यूपी के 10 जिलों में 40 ब्लड सेंटरों की जांच, 7 पर तत्काल रोक; ELISA जांच में लापरवाही उजागर

सारांश

उत्तर प्रदेश में FSDA की औचक जांच ने 40 चैरिटेबल ब्लड सेंटरों में गंभीर खामियां उजागर कीं — एलिसा मशीन खराब होने पर भी रक्त जारी, अभिलेख अधूरे, कर्मचारी गायब। 7 सेंटर बंद, बाकी को नोटिस। जो मरीज इन पर भरोसा करते हैं, उनके लिए यह जोखिम सिर्फ प्रशासनिक नहीं, जीवन-मरण का है।

मुख्य बातें

FSDA ने 28 अक्टूबर 2026 को उत्तर प्रदेश के 10 जिलों में 40 चैरिटेबल रक्त केंद्रों का औचक निरीक्षण किया।
गंभीर अनियमितताओं के चलते 7 रक्त केंद्रों के संचालन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई गई।
लखनऊ में सर्वाधिक 3 केंद्र बंद — लिटल स्टार, रामा चैरिटेबल और केएचएस चैरिटेबल ब्लड सेंटर।
मुख्य खामियां: एलिसा मशीन खराब होने के बावजूद रक्त जारी करना, एचआईवी-हेपेटाइटिस जांच में लापरवाही, कर्मचारियों की अनुपस्थिति।
शेष केंद्रों को कारण बताओ नोटिस जारी; सभी जिलाधिकारियों को बंद केंद्रों के रक्त निस्तारण हेतु एडवाइजरी।
अभियान FSDA आयुक्त डॉ.
रोशन जैकब के निर्देश पर जारी रहेगा।

उत्तर प्रदेश में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) ने 28 अक्टूबर 2026 को प्रदेश के 10 जनपदों में चैरिटेबल ट्रस्ट और सोसाइटी द्वारा संचालित 40 रक्त केंद्रों का औचक निरीक्षण करते हुए सात केंद्रों में रक्त एवं रक्त घटकों से जुड़ी सभी गतिविधियों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। जांच में एलिसा परीक्षण में लापरवाही, अधूरे अभिलेख और प्रशिक्षित कर्मचारियों की अनुपस्थिति सहित गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं, जिनसे मरीजों की सुरक्षा पर सीधा खतरा पैदा होने की आशंका है।

अभियान का दायरा और जांच के मानक

FSDA आयुक्त डॉ. रोशन जैकब के निर्देश पर औषधि निरीक्षकों की अंतरजनपदीय टीम ने यह विशेष अभियान चलाया। लखनऊ में सर्वाधिक 13 रक्त केंद्रों की जांच की गई। इसके अतिरिक्त आगरा में पाँच, कानपुर में पाँच, मुजफ्फरनगर और बिजनौर में चार-चार, अलीगढ़ में तीन, गाजियाबाद और वाराणसी में दो-दो तथा गोरखपुर और प्रयागराज में एक-एक केंद्र का निरीक्षण किया गया।

जांच के दौरान एचआईवी, एचबीएसएजी, एचसीवी, वीडीआरएल और मलेरिया जैसे संक्रमणों की अनिवार्य जांच, तापमान नियंत्रण, स्टॉक प्रबंधन, लाइसेंस की वैधता, मूल्य निर्धारण और प्रशिक्षित तकनीकी कर्मचारियों की उपलब्धता समेत विभिन्न मानकों की परख की गई।

किन सात केंद्रों पर लगी रोक और क्यों

श्री बालाजी चैरिटेबल ब्लड सेंटर, आगरा: अनिवार्य एलिसा और स्टरलिटी परीक्षण नहीं किए गए; रक्त प्राप्तकर्ताओं के नाम, हस्ताक्षर और मोबाइल नंबर दर्ज नहीं; तापमान लॉग और स्टॉक रिकॉर्ड का समुचित रखरखाव नहीं।

न्यू बापू रक्त सेंटर, अलीगढ़: अनिवार्य टीटीआई जांच और सीपीडीए सॉल्यूशन प्रक्रियाओं में कमी; एलिसा परीक्षण नहीं; तापमान रिकॉर्डिंग ग्राफ, स्टॉक रजिस्टर और आवश्यक दस्तावेजों में खामियां।

मानया चैरिटेबल ब्लड सेंटर, गोरखपुर: निरीक्षण के दौरान प्रभारी चिकित्सा अधिकारी और तकनीकी कर्मचारी अनुपस्थित; तापमान रिकॉर्डिंग में अनियमितता और अभिलेखों का रखरखाव अधूरा।

अनुभव चैरिटेबल ब्लड सेंटर, लखीमपुर खीरी: बायोमेडिकल वेस्ट निस्तारण अनुबंध अनुपलब्ध; तापमान निगरानी और अलार्म सिस्टम में खामियां; रक्त बैग और डायग्नोस्टिक किट के स्टॉक रजिस्टर अनुपलब्ध।

लिटल स्टार ब्लड सेंटर, लखनऊ: एलिसा मशीन खराब होने के बावजूद बिना जांच रक्त एवं रक्त घटक जारी किए गए; एफएफपी में लाल रक्त कोशिकाओं (आरबीसी) के अंश मिले; चिकित्सा अधिकारी और तकनीकी कर्मचारी दीर्घकाल से अनुपस्थित।

रामा चैरिटेबल ब्लड सेंटर, लखनऊ: एलिसा जांच पूरी किए बिना रक्त जारी किया गया; एफएफपी को निर्धारित प्रक्रिया के विपरीत प्लेटलेट एजिटेटर में रखा गया; निर्धारित मूल्य से अधिक शुल्क वसूला गया।

केएचएस चैरिटेबल ब्लड सेंटर, लखनऊ: चिकित्सा अधिकारी और तकनीकी कर्मचारी अनुपस्थित; मास्टर रजिस्टर व एलिसा/टीटीआई परीक्षण रजिस्टर समय पर अद्यतन नहीं; परिसर में स्वच्छता असंतोषजनक।

मरीजों की सुरक्षा पर असर

विशेषज्ञों के अनुसार एचआईवी, हेपेटाइटिस-बी और हेपेटाइटिस-सी जैसे संक्रमणों की अनिवार्य जांच के बिना रक्त चढ़ाना जानलेवा हो सकता है। एलिसा परीक्षण न होने और तापमान नियंत्रण की अनदेखी से दूषित रक्त मरीज तक पहुंचने का खतरा बढ़ जाता है। गौरतलब है कि चैरिटेबल ब्लड सेंटर अक्सर छोटे शहरों और कस्बों में निम्न-आय वर्ग के मरीजों की मुख्य आपूर्ति श्रृंखला होते हैं, जिससे लापरवाही का असर सबसे कमजोर तबके पर पड़ता है।

विभाग की प्रतिक्रिया और अगले कदम

FSDA आयुक्त डॉ. रोशन जैकब ने बताया कि संचालन पर रोक लगाए गए सातों केंद्रों में उपलब्ध रक्त और रक्त घटकों के सुरक्षित निस्तारण के लिए सभी संबंधित जिलाधिकारियों को अलग से एडवाइजरी जारी की गई है। शेष निरीक्षित केंद्रों में पाई गई कमियों के संबंध में कारण बताओ नोटिस जारी किए जा रहे हैं। विभाग के अनुसार यह अभियान नियमित रूप से जारी रहेगा और आगे भी औचक निरीक्षण किए जाएंगे ताकि मानकों की अनदेखी करने वाले केंद्रों पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित हो सके।

संपादकीय दृष्टिकोण

वहीं गुणवत्ता नियंत्रण सबसे कमजोर निकला। एलिसा मशीन खराब होने के बावजूद रक्त जारी करना केवल लापरवाही नहीं, यह आपराधिक उदासीनता है जिसके परिणाम HIV या हेपेटाइटिस के रूप में दशकों तक भुगते जा सकते हैं। औचक निरीक्षण अभियान स्वागतयोग्य है, लेकिन असली सवाल यह है कि ये अनियमितताएं वर्षों तक पकड़ में क्यों नहीं आईं — नियमित निरीक्षण तंत्र कहाँ था? जब तक जवाबदेही सिर्फ नोटिस तक सीमित रहेगी और दंड नाममात्र का होगा, 'औचक छापे' सुधार का नहीं, प्रदर्शन का साधन बने रहेंगे।
RashtraPress
28 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यूपी में कितने चैरिटेबल ब्लड सेंटर बंद किए गए और क्यों?
उत्तर प्रदेश FSDA की जांच में गंभीर अनियमितताएं मिलने पर 7 चैरिटेबल ब्लड सेंटरों के संचालन पर तत्काल रोक लगाई गई है। मुख्य कारण अनिवार्य एलिसा और टीटीआई जांच नहीं करना, तापमान रिकॉर्ड का अभाव और प्रभारी चिकित्सा अधिकारियों की अनुपस्थिति रहे।
कौन से जिलों के ब्लड सेंटर बंद किए गए हैं?
आगरा, अलीगढ़, गोरखपुर, लखीमपुर खीरी और लखनऊ के सात चैरिटेबल ब्लड सेंटरों पर रोक लगाई गई है। इनमें लखनऊ के तीन केंद्र — लिटल स्टार, रामा चैरिटेबल और केएचएस चैरिटेबल ब्लड सेंटर — शामिल हैं।
एलिसा जांच क्यों जरूरी है और इसकी अनदेखी से क्या खतरा है?
एलिसा परीक्षण के जरिए रक्त में एचआईवी, हेपेटाइटिस-बी, हेपेटाइटिस-सी और वीडीआरएल जैसे जानलेवा संक्रमणों की जांच की जाती है। इस परीक्षण के बिना रक्त चढ़ाने से प्राप्तकर्ता मरीज को गंभीर और जीवन-घातक संक्रमण हो सकता है।
बंद किए गए केंद्रों में पहले से उपलब्ध रक्त का क्या होगा?
FSDA ने सभी संबंधित जिलाधिकारियों को अलग से एडवाइजरी जारी की है, जिसमें बंद केंद्रों में उपलब्ध रक्त और रक्त घटकों के निर्धारित मानकों के अनुसार सुरक्षित निस्तारण के निर्देश दिए गए हैं।
शेष निरीक्षित ब्लड सेंटरों के विरुद्ध क्या कार्रवाई होगी?
जिन केंद्रों में कमियां मिलीं लेकिन संचालन तत्काल बंद नहीं किया गया, उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किए जा रहे हैं। FSDA आयुक्त डॉ. रोशन जैकब के अनुसार नियमानुसार कार्रवाई जारी है और औचक निरीक्षण अभियान आगे भी चलता रहेगा।
राष्ट्र प्रेस
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