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विश्व रक्तदाता दिवस पर रायगडा में सीआरपीएफ की चौथी बटालियन ने जुटाई 25 यूनिट रक्त

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विश्व रक्तदाता दिवस पर रायगडा में सीआरपीएफ की चौथी बटालियन ने जुटाई 25 यूनिट रक्त

सारांश

विश्व रक्तदाता दिवस पर रायगडा में सीआरपीएफ की चौथी बटालियन ने 25 यूनिट रक्त जुटाया। कमांडेंट फिरोज कुजूर ने स्वयं पहल की। रक्त की कमी से जूझ रहे रायगडा जिले के लिए यह शिविर एक अहम राहत है।

मुख्य बातें

सीआरपीएफ की चौथी बटालियन ने 14 जून 2025 को रायगडा, ओडिशा में स्वैच्छिक रक्तदान शिविर आयोजित किया।
शिविर में कुल 25 यूनिट रक्त एकत्र किया गया।
कमांडेंट फिरोज कुजूर ने स्वयं रक्तदान कर शिविर का नेतृत्व किया।
रायगडा जिला रेड क्रॉस सोसाइटी लंबे समय से रक्त की कमी की चुनौती झेल रही है।
सीआरपीएफ वर्ष 2007 से नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में तैनात है और जनसेवा कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाती रही है।

केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की चौथी बटालियन ने 14 जून 2025 को विश्व रक्तदाता दिवस के अवसर पर ओडिशा के रायगडा में एक स्वैच्छिक रक्तदान शिविर आयोजित किया, जिसमें कुल 25 यूनिट रक्त एकत्र किया गया। शिविर का नेतृत्व कमांडेंट फिरोज कुजूर ने किया, जिसका प्रमुख उद्देश्य रक्त की कमी से जूझ रहे रायगडा जिला रेड क्रॉस सोसाइटी के ब्लड बैंक को सहयोग देना था।

शिविर का आयोजन और भागीदारी

शिविर की शुरुआत स्वयं कमांडेंट फिरोज कुजूर ने रक्तदान कर की, जिससे जवानों और उनके परिवारों में उत्साह का संचार हुआ। उनके इस कदम से प्रेरित होकर बड़ी संख्या में सीआरपीएफ के जवानों और उनके परिजनों ने स्वेच्छा से रक्तदान किया। शिविर के अंत में सभी रक्तदाताओं को प्रमाण पत्र और रिफ्रेशमेंट प्रदान किए गए।

कमांडेंट कुजूर की प्रतिक्रिया

कमांडेंट फिरोज कुजूर ने कहा, 'रक्तदान एक महान सेवा है, जो किसी जरूरतमंद की जान बचा सकती है।' उन्होंने जवानों के परिवारों से भी इस सामाजिक कार्य में आगे आने का आह्वान किया। गौरतलब है कि कुजूर समय-समय पर जिला अस्पताल और अन्य चिकित्सा जरूरतों में सक्रिय सहयोग देते रहे हैं, ताकि आपात स्थितियों में मरीजों को समय पर रक्त उपलब्ध हो सके।

रायगडा में रक्त की कमी की समस्या

रायगडा जिला रेड क्रॉस सोसाइटी लंबे समय से रक्त की अनुपलब्धता की चुनौती से जूझ रही है। यह ऐसे समय में आया है जब नक्सल प्रभावित इस इलाके में चिकित्सा संसाधनों की पहुँच सीमित है। सीआरपीएफ वर्ष 2007 से इन क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था संभाल रही है और जनसेवा के कार्यों में भी निरंतर सक्रिय रही है।

कार्यक्रम में उपस्थित प्रमुख अधिकारी

इस अवसर पर कमांडेंट फिरोज कुजूर की पत्नी मंजुला टोप्पो, सेकंड-इन-कमांड (प्रशासन) प्रभाकर उपाध्याय, सेकंड-इन-कमांड (ऑपरेशंस) संजय कुमार राउत, मेडिकल ऑफिसर डॉ. एम. गौतमी और रेड क्रॉस सोसाइटी के डॉ. गौतम पटनायक उपस्थित रहे। कार्यक्रम के समापन पर सभी प्रतिभागियों ने नियमित रक्तदान करने और समाजसेवा में आगे आने का संकल्प लिया।

आगे की राह

स्थानीय स्तर पर इस शिविर की व्यापक सराहना हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि सुरक्षाबलों द्वारा इस तरह की पहल न केवल रक्त की कमी को दूर करती है, बल्कि स्थानीय समुदाय और सुरक्षाबलों के बीच विश्वास को भी मजबूत करती है। भविष्य में ऐसे शिविरों की नियमितता से रायगडा जैसे दूरस्थ जिलों में स्वास्थ्य सेवाओं को बल मिलने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

वहाँ इसका व्यावहारिक महत्व कहीं अधिक है। यह ऐसे समय में आया है जब ओडिशा के आदिवासी बहुल जिलों में रक्त बैंकों की अनुपलब्धता एक बड़ी समस्या बनी हुई है। हालाँकि 25 यूनिट रक्त एक शिविर के लिए उल्लेखनीय है, लेकिन दीर्घकालिक समाधान के लिए स्थानीय समुदाय को नियमित रूप से जोड़ना ज़रूरी होगा। सीआरपीएफ की यह पहल सैन्य-नागरिक संबंधों को मज़बूत करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है, जो संवेदनशील क्षेत्रों में विश्वास निर्माण के लिए अनिवार्य है।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रायगडा में सीआरपीएफ का रक्तदान शिविर कब और क्यों आयोजित किया गया?
यह शिविर 14 जून 2025 को विश्व रक्तदाता दिवस के अवसर पर आयोजित किया गया। इसका उद्देश्य रक्त की कमी से जूझ रहे रायगडा जिला रेड क्रॉस सोसाइटी के ब्लड बैंक को सहयोग देना और नियमित रक्तदान के प्रति जागरूकता फैलाना था।
शिविर में कितना रक्त एकत्र किया गया?
सीआरपीएफ की चौथी बटालियन के इस शिविर में कुल 25 यूनिट रक्त एकत्र किया गया। जवानों के साथ-साथ उनके परिजनों ने भी स्वेच्छा से रक्तदान किया।
रायगडा में रक्त की कमी की समस्या कितनी गंभीर है?
रायगडा जिला रेड क्रॉस सोसाइटी लंबे समय से रक्त की अनुपलब्धता की चुनौती से जूझ रही है। यह नक्सल प्रभावित और आदिवासी बहुल क्षेत्र है जहाँ चिकित्सा संसाधनों की पहुँच सीमित है, जिससे आपात स्थितियों में मरीजों को समय पर रक्त मिलना मुश्किल होता है।
इस शिविर का नेतृत्व किसने किया?
शिविर का नेतृत्व सीआरपीएफ चौथी बटालियन के कमांडेंट फिरोज कुजूर ने किया। उन्होंने स्वयं रक्तदान कर शिविर की शुरुआत की और जवानों व उनके परिवारों को प्रेरित किया।
सीआरपीएफ रायगडा में कब से तैनात है?
सीआरपीएफ वर्ष 2007 से रायगडा सहित नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था संभाल रही है। इस दौरान बल ने सुरक्षा कार्यों के साथ-साथ जनसेवा और सामुदायिक विकास के कार्यों में भी सक्रिय भूमिका निभाई है।
राष्ट्र प्रेस
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