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रक्तदान राष्ट्र की सर्वोच्च सेवा: दिल्ली स्पीकर विजेंद्र गुप्ता ने रोहिणी शिविर में दिया संदेश

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रक्तदान राष्ट्र की सर्वोच्च सेवा: दिल्ली स्पीकर विजेंद्र गुप्ता ने रोहिणी शिविर में दिया संदेश

सारांश

दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने रोहिणी में भारतीय सेना के लिए आयोजित रक्तदान शिविर में कहा कि न कोई कारखाना और न कोई दौलत रक्त बना सकती है — यह सेवा केवल मानवता दे सकती है। 3,100 यूनिट के लक्ष्य के साथ 20 से अधिक राज्यों के 50 से ज़्यादा NGO इस अभियान में शामिल हुए।

मुख्य बातें

दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने रोहिणी, नई दिल्ली में लक्ष्मी तारू फाउंडेशन के रक्तदान शिविर को संबोधित किया।
शिविर 'एक बूंद देश के लिए' आदर्श वाक्य के तहत भारतीय सशस्त्र बलों के लिए आयोजित किया गया था।
3,100 यूनिट रक्त एकत्र करने का लक्ष्य; शुरुआती घंटों में 1,000 से अधिक दानकर्ताओं ने भाग लिया।
विपिन गर्ग ('ब्लड मैन ऑफ दिल्ली') के नेतृत्व में 20 से अधिक राज्यों के 50 से अधिक NGO इस अभियान से जुड़े।
नौ प्रमुख अस्पतालों के साथ समन्वय कर रक्त संग्रह और चिकित्सा निगरानी सुनिश्चित की गई।
स्पीकर गुप्ता ने स्पष्ट किया कि एक स्वस्थ व्यक्ति हर तीन महीने में सुरक्षित रूप से रक्तदान कर सकता है।

दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने 3 अगस्त 2025 को रोहिणी के सेक्टर-10 स्थित जापानी पार्क में आयोजित रक्तदान शिविर को संबोधित करते हुए कहा कि रक्तदान राष्ट्र की सबसे बड़ी सेवा है। लक्ष्मी तारू फाउंडेशन द्वारा आयोजित इस शिविर में उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कोई कारखाना और कोई दौलत रक्त का उत्पादन नहीं कर सकती — इसका एकमात्र स्रोत मानवता स्वयं है।

शिविर का उद्देश्य और संदेश

यह रक्तदान शिविर 'एक बूंद देश के लिए' आदर्श वाक्य के तहत भारतीय सशस्त्र बलों के लिए विशेष रूप से आयोजित किया गया था। स्पीकर गुप्ता ने कार्यक्रम में उपस्थित सैन्य कर्मियों और वरिष्ठ अधिकारियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आज दान किया गया रक्त एक दिन सीमाओं की रक्षा कर रहे किसी सैनिक की जान बचा सकता है।

उन्होंने कहा कि भारतीय सेना वैश्विक स्तर पर देश को मिलने वाले सम्मान का सबसे बड़ा कारण है, जिसने लगातार साहस और दृढ़ संकल्प के साथ हर खतरे को विफल किया है।

अभियान का नेतृत्व और विस्तार

इस अभियान का नेतृत्व सामाजिक कार्यकर्ता विपिन गर्ग ने किया, जिन्हें 'ब्लड मैन ऑफ दिल्ली' के नाम से जाना जाता है। उनकी प्रेरणा से 20 से अधिक राज्यों के 50 से अधिक गैर सरकारी संगठनों और स्वयंसेवकों ने इस मानवीय प्रयास में भाग लिया।

रक्त संग्रह और चिकित्सा निगरानी के लिए नौ प्रमुख अस्पतालों के साथ समन्वय किया गया और भारतीय सेना के लिए समर्पित दान केंद्र भी स्थापित किए गए।

भागीदारी और लक्ष्य

शिविर में 3,100 यूनिट रक्त एकत्र करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा गया था। शुरुआती घंटों में ही 1,000 से अधिक लोगों ने रक्तदान किया, जो इस अभियान की व्यापक स्वीकृति को दर्शाता है।

भ्रांतियाँ दूर करने की अपील

स्पीकर गुप्ता ने रक्तदान से जुड़ी आम गलतफहमियों को दूर करते हुए जनता से आग्रह किया कि वे झिझक छोड़ें और नियमित रूप से रक्तदान करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि रक्तदान से शरीर कमज़ोर नहीं होता, क्योंकि शरीर थोड़े समय में स्वाभाविक रूप से स्वयं की भरपाई कर लेता है।

चिकित्सा विज्ञान के अनुसार एक स्वस्थ व्यक्ति हर तीन महीने में सुरक्षित रूप से रक्तदान कर सकता है। उन्होंने व्यापक जागरूकता की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि चिकित्सा आपात स्थितियों में परिवारों को संकोच का सामना न करना पड़े।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इस आयोजन की विशेषता यह है कि इसे सैन्य कर्मियों के लिए लक्षित किया गया और 20 से अधिक राज्यों के NGO नेटवर्क को एकजुट किया गया — जो महज़ एक स्थानीय कार्यक्रम से कहीं बड़ा है। असली सवाल यह है कि 3,100 यूनिट का लक्ष्य पूरा हुआ या नहीं, और एकत्रित रक्त सैन्य चिकित्सा केंद्रों तक कितनी कुशलता से पहुँचा — यह पारदर्शिता ही इस अभियान की दीर्घकालिक विश्वसनीयता तय करेगी। भारत में रक्त की पुरानी कमी को देखते हुए ऐसे संस्थागत अभियानों की ज़रूरत है जो केवल एक दिन की भीड़ तक सीमित न रहें।
RashtraPress
3 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रोहिणी में आयोजित रक्तदान शिविर किसने और किसके लिए आयोजित किया?
यह शिविर लक्ष्मी तारू फाउंडेशन द्वारा रोहिणी के सेक्टर-10 स्थित जापानी पार्क में आयोजित किया गया था। यह विशेष रूप से भारतीय सशस्त्र बलों के लिए समर्पित था और 'एक बूंद देश के लिए' आदर्श वाक्य पर आधारित था।
विजेंद्र गुप्ता ने रक्तदान को राष्ट्र सेवा क्यों कहा?
दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि कोई कारखाना या दौलत रक्त का उत्पादन नहीं कर सकती — इसका एकमात्र स्रोत मानवता है। उनके अनुसार आज दान किया गया रक्त कल किसी सैनिक की जान बचा सकता है, इसीलिए यह राष्ट्र की सर्वोच्च सेवा है।
इस रक्तदान अभियान में कितने लोग और संगठन शामिल हुए?
अभियान में 20 से अधिक राज्यों के 50 से अधिक गैर सरकारी संगठन और स्वयंसेवक शामिल हुए। शुरुआती घंटों में ही 1,000 से अधिक लोगों ने रक्तदान किया और शिविर का कुल लक्ष्य 3,100 यूनिट रक्त एकत्र करना था।
क्या रक्तदान से शरीर कमज़ोर होता है?
नहीं। स्पीकर विजेंद्र गुप्ता ने इस भ्रांति को दूर करते हुए बताया कि शरीर थोड़े समय में स्वाभाविक रूप से रक्त की भरपाई कर लेता है। चिकित्सा विज्ञान के अनुसार एक स्वस्थ व्यक्ति हर तीन महीने में सुरक्षित रूप से रक्तदान कर सकता है।
'ब्लड मैन ऑफ दिल्ली' कौन हैं और इस अभियान में उनकी क्या भूमिका थी?
विपिन गर्ग को 'ब्लड मैन ऑफ दिल्ली' के नाम से जाना जाता है। उन्होंने इस अभियान का नेतृत्व किया और उनकी प्रेरणा से देशभर के दर्जनों NGO और स्वयंसेवक एकजुट हुए। नौ प्रमुख अस्पतालों के साथ समन्वय कर रक्त संग्रह और चिकित्सा निगरानी सुनिश्चित की गई।
राष्ट्र प्रेस
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