9 सितंबर 2026
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अमेरिका ने ईरान की 27 एयरलाइंस पर प्रतिबंध लगाए, तुर्किये-मलेशिया-कजाकिस्तान की कंपनियाँ भी निशाने पर

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अमेरिका ने ईरान की 27 एयरलाइंस पर प्रतिबंध लगाए, तुर्किये-मलेशिया-कजाकिस्तान की कंपनियाँ भी निशाने पर

सारांश

अमेरिका ने एक झटके में ईरान की 27 एयरलाइंस को SDN सूची में डाल दिया और तुर्किये, मलेशिया, कजाकिस्तान की 4 कंपनियों को भी निशाना बनाया। IRGC पर हथियार ढुलाई के आरोपों के बीच यह अब तक का सबसे व्यापक अमेरिकी विमानन प्रतिबंध है। ईरान के राष्ट्रपति पेजेश्कियन ने पूरी ताकत से प्रतिरोध जारी रखने की चेतावनी दी।

मुख्य बातें

अमेरिका के वित्त विभाग ने 9 सितंबर 2026 को ईरान की 27 एयरलाइंस को SDN सूची में शामिल किया।
IRGC पर आरोप है कि वह निजी एयरलाइंस का उपयोग हथियारों की खरीद, ढुलाई और कर्मियों के स्थानांतरण के लिए करता रहा है।
OFAC ने तुर्किये, मलेशिया और कजाकिस्तान की 4 कंपनियों को भी प्रतिबंधित किया, जो कथित तौर पर माहान एयर को सहायता दे रही थीं।
माहान एयर को 2026 की गर्मियों में UAE और ओमान के रास्ते कम से कम 3 B-777 विमान मिले।
ईरान के ऊपर से उड़ान भरने और अमेरिकी विमानों को ईरान ले जाने की अनुमतियाँ निलंबित की गईं।
ईरान के राष्ट्रपति पेजेश्कियन ने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि ईरान पूरी ताकत से प्रतिरोध जारी रखेगा।

अमेरिका के वित्त विभाग ने 9 सितंबर 2026 को ईरान की 27 एयरलाइंस को अपनी 'स्पेशली डिजाइनेटेड नेशनल्स' (SDN) सूची में शामिल कर लिया। इस कदम के साथ वाशिंगटन ने ईरान के विमानन क्षेत्र पर अब तक का सबसे व्यापक प्रतिबंध लगाते हुए उसकी शेष सभी वाणिज्यिक एयरलाइंस को एक साथ निशाने पर ले लिया है।

प्रतिबंधों का दायरा और आरोप

वित्त विभाग की प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि 'ईरान की वाणिज्यिक एयरलाइंस लंबे समय से ईरानी सरकार की अस्थिरता पैदा करने वाली गतिविधियों का समर्थन करती रही हैं।' विभाग के अनुसार, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) कथित तौर पर निजी एयरलाइंस का उपयोग हथियारों की खरीद, उनकी ढुलाई और अपने कर्मियों के स्थानांतरण के लिए करता रहा है।

नए प्रतिबंध गुप्त फ्रंट कंपनियों, विदेशी बिचौलियों और भ्रामक ट्रांजिट मार्गों को भी लक्षित करते हैं, जिनका उपयोग ईरान कथित तौर पर अमेरिकी मूल के विमान और संवेदनशील तकनीक हासिल करने के लिए करता है।

तीसरे देशों की कंपनियाँ भी प्रतिबंधित

वित्त विभाग के ऑफिस ऑफ फॉरेन एसेट्स कंट्रोल (OFAC) ने तुर्किये, मलेशिया और कजाकिस्तान की चार कंपनियों को भी प्रतिबंधित किया है। अमेरिका का आरोप है कि ये कंपनियाँ माहान एयर को कार्गो सेवाएँ और बिक्री से जुड़ी सहायता प्रदान कर रही थीं।

गौरतलब है कि अमेरिका ने पहली बार अक्टूबर 2011 में माहान एयर पर प्रतिबंध लगाए थे। इसके बाद 30 जुलाई को उन कंपनियों को निशाना बनाया गया जिन्हें माहान एयर के जनरल सेल्स एजेंट के रूप में देखा जाता है। विज्ञप्ति के अनुसार, माहान एयर को 2026 की गर्मियों में कम से कम तीन B-777 विमान मिले, जिन्हें संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और ओमान के रास्ते भेजा गया था।

उड़ान अनुमतियाँ निलंबित, वित्तीय निगरानी बढ़ाई

OFAC ने उन अनुमतियों को भी निलंबित कर दिया है जिनके तहत विमान ईरान के ऊपर से उड़ान भर सकते थे और गैर-अमेरिकी एयरलाइंस अमेरिकी मूल या अमेरिकी नियंत्रण वाले वाणिज्यिक विमानों को ईरान ले जा सकती थीं।

इसके अतिरिक्त, वित्त विभाग के अंतर्गत कार्यरत फाइनेंशियल क्राइम्स एनफोर्समेंट नेटवर्क (FinCEN) ने वित्तीय संस्थानों से अपील की है कि वे ईरान के विमानन उद्योग को समर्थन देने वाले खरीद नेटवर्क से जुड़ी संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी दें।

ईरान राष्ट्रपति का जवाब

इस बीच, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि उनका देश पूरी ताकत के साथ प्रतिरोध जारी रखेगा। उन्होंने लिखा, 'इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान हमेशा युद्ध का विरोध करता रहा है। हमारा मानना है कि लोगों के हितों की रक्षा और पश्चिम एशिया क्षेत्र की सुरक्षा बनाए रखने का रास्ता युद्ध भड़काने से बचने में है।'

पेजेश्कियन ने आगे कहा, 'लेकिन जिस तरह ईरान ने अब तक साहस के साथ हर आक्रमण का मुकाबला किया है, उसी तरह वह आगे भी पूरी ताकत के साथ अपना प्रतिरोध जारी रखेगा, जब तक कि आक्रमण करने वालों को अपने किए पर पूरा पछतावा न हो जाए।'

आगे क्या होगा

यह कदम ऐसे समय में आया है जब अमेरिका-ईरान तनाव पहले से उच्च स्तर पर है और परमाणु वार्ताएँ गतिरोध में हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, तीसरे देशों की कंपनियों को निशाना बनाना यह दर्शाता है कि वाशिंगटन अब केवल ईरानी संस्थाओं तक सीमित नहीं रहेगा — बल्कि वह उन सभी मध्यस्थों पर भी दबाव डालेगा जो प्रतिबंधों की परिधि से बाहर रहकर ईरान की मदद करते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

मलेशिया, कजाकिस्तान — की कंपनियों को निशाना बनाना यह संकेत देता है कि अमेरिका अब 'सेकेंडरी सैंक्शन' की रणनीति को और आक्रामक रूप से लागू कर रहा है, जो 2018 के बाद से देखी गई प्रवृत्ति का विस्तार है। असली सवाल यह है कि क्या ये प्रतिबंध ईरान के विमानन नेटवर्क को वास्तव में बाधित कर सकते हैं, या महज उसे और अधिक अपारदर्शी चैनलों की ओर धकेलेंगे — जैसा कि माहान एयर के मामले में 2011 से देखा जा रहा है, जब पहले प्रतिबंध लगे थे। UAE और ओमान के रास्ते B-777 विमानों की डिलीवरी यह दर्शाती है कि खाड़ी देशों की मध्यस्थता अभी भी सक्रिय है। मुख्यधारा की कवरेज यह नहीं बताती कि इन प्रतिबंधों का असर उन आम ईरानी यात्रियों पर भी पड़ेगा जो पहले से ही अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए सीमित विकल्पों पर निर्भर हैं।
RashtraPress
9 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अमेरिका ने ईरान की 27 एयरलाइंस पर प्रतिबंध क्यों लगाए?
अमेरिकी वित्त विभाग का आरोप है कि ईरान की वाणिज्यिक एयरलाइंस IRGC के लिए हथियारों की ढुलाई और कर्मियों के स्थानांतरण में सहयोग करती रही हैं। इन्हें SDN सूची में शामिल कर ईरान के विमानन क्षेत्र पर व्यापक दबाव बनाने की कोशिश की गई है।
SDN सूची में शामिल होने का क्या मतलब है?
SDN यानी 'स्पेशली डिजाइनेटेड नेशनल्स' सूची में शामिल होने पर संबंधित एयरलाइन की अमेरिका में सभी संपत्तियाँ जब्त हो जाती हैं और अमेरिकी नागरिकों या कंपनियों के साथ किसी भी लेनदेन पर रोक लग जाती है। इससे प्रभावित एयरलाइंस को अंतरराष्ट्रीय वित्तीय प्रणाली तक पहुँचना अत्यंत कठिन हो जाता है।
तुर्किये, मलेशिया और कजाकिस्तान की कंपनियों पर क्या आरोप हैं?
OFAC के अनुसार, इन तीन देशों की चार कंपनियाँ माहान एयर को कार्गो सेवाएँ और बिक्री से जुड़ी सहायता प्रदान कर रही थीं। अमेरिका का कहना है कि ये कंपनियाँ प्रतिबंधों को दरकिनार करने में मध्यस्थ की भूमिका निभा रही थीं।
माहान एयर पर पहले कब प्रतिबंध लगे थे?
अमेरिका ने माहान एयर पर पहली बार अक्टूबर 2011 में प्रतिबंध लगाए थे। इसके बावजूद रिपोर्टों के अनुसार 2026 की गर्मियों में UAE और ओमान के रास्ते माहान एयर को कम से कम तीन B-777 विमान मिले, जो प्रतिबंधों को दरकिनार करने की कोशिश का संकेत देता है।
ईरान के राष्ट्रपति पेजेश्कियन ने इन प्रतिबंधों पर क्या कहा?
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि ईरान हमेशा युद्ध का विरोधी रहा है, लेकिन वह पूरी ताकत से प्रतिरोध जारी रखेगा 'जब तक आक्रमण करने वालों को अपने किए पर पूरा पछतावा न हो जाए।' उन्होंने यह भी कहा कि ईरान अपने लोगों के अधिकारों की रक्षा करता रहेगा।
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