व्हाइट हाउस बॉलरूम निर्माण को सुप्रीम कोर्ट की हरी झंडी, ट्रंप को 5-4 से मिली बड़ी जीत
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिका के सर्वोच्च न्यायालय ने 1 सितंबर 2026 को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को व्हाइट हाउस में करीब 40 करोड़ डॉलर की लागत से बन रहे नए बॉलरूम का निर्माण जारी रखने की अनुमति दे दी। 5-4 के बहुमत से दिए गए इस आदेश ने उन निचली अदालतों के फैसलों पर रोक लगा दी, जो इस परियोजना के जमीन के ऊपर बनने वाले हिस्से के निर्माण को रोक सकती थीं।
मुख्य घटनाक्रम
व्हाइट हाउस ने इस बॉलरूम परियोजना की घोषणा जुलाई 2025 के अंत में की थी। इसके बाद अक्टूबर 2025 में ईस्ट विंग के एक हिस्से को हटाने का काम शुरू किया गया ताकि नई इमारत के लिए जगह बन सके। करीब 90,000 वर्ग फुट में फैला यह बॉलरूम एक साथ लगभग 1,000 मेहमानों को समायोजित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
ट्रंप प्रशासन ने अदालत में दाखिल दस्तावेजों में बताया कि निर्माण कार्य अब तक लगभग 65 प्रतिशत पूरा हो चुका है। परियोजना पर करीब 250 कर्मचारियों की टीम सप्ताह के सातों दिन लगभग 20 घंटे काम कर रही है।
अदालती विवाद की पृष्ठभूमि
7 अगस्त को वॉशिंगटन की एक संघीय अपील अदालत ने कहा था कि राष्ट्रपति ट्रंप यह निर्माण कार्य बिना कानूनी अधिकार के करवा रहे हैं। इस मामले में नेशनल ट्रस्ट फॉर हिस्टोरिक प्रिजर्वेशन नामक संस्था ने मुकदमा दायर किया था। संस्था का तर्क था कि कांग्रेस (अमेरिकी संसद) की मंजूरी के बिना राष्ट्रपति को इस निर्माण कार्य को आगे बढ़ाने का अधिकार नहीं है।
गौरतलब है कि सर्वोच्च न्यायालय के इस आदेश में परियोजना की अंतिम कानूनी वैधता पर कोई निर्णय नहीं दिया गया है। अदालत ने कहा कि उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर ऐसा प्रतीत होता है कि सरकार यह साबित कर सकती है कि इस संस्था के पास संघीय अदालत में मुकदमा दायर करने का पर्याप्त कानूनी आधार नहीं है — क्योंकि किसी भी पक्ष को अदालत में जाने के लिए यह दिखाना होता है कि उसे वास्तविक कानूनी नुकसान हुआ है।
असहमति का स्वर
इस फैसले में एक उल्लेखनीय पहलू यह रहा कि मुख्य न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स ने अदालत के तीन उदारवादी न्यायाधीशों के साथ असहमति जताई। यह विभाजन इस बात का संकेत है कि परियोजना की कानूनी लड़ाई अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।
वित्त पोषण पर सवाल
रिपोर्टों के अनुसार, परियोजना की सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए सीक्रेट सर्विस का सरकारी फंड पहले ही आवंटित किया जा चुका है। इससे व्हाइट हाउस के उस दावे पर सवाल उठते हैं जिसमें कहा गया था कि परियोजना का पूरा खर्च निजी चंदे से उठाया जाएगा। आलोचकों का कहना है कि सार्वजनिक धन के उपयोग की पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिए।
आगे क्या होगा
सर्वोच्च न्यायालय के इस आदेश के बाद निर्माण कार्य फिलहाल जारी रह सकता है, लेकिन परियोजना की अंतिम कानूनी स्थिति निचली अदालतों में आगे की सुनवाई पर निर्भर करेगी। नेशनल ट्रस्ट फॉर हिस्टोरिक प्रिजर्वेशन के अगले कदम और कांग्रेस की संभावित प्रतिक्रिया इस विवाद की दिशा तय करेगी।