सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने जस्टिस संजय के. अग्रवाल का छत्तीसगढ़ से राजस्थान हाई कोर्ट तबादला किया
सारांश
मुख्य बातें
सर्वोच्च न्यायालय के कॉलेजियम ने 31 अगस्त को हुई बैठक में छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के न्यायाधीश जस्टिस संजय के. अग्रवाल को राजस्थान उच्च न्यायालय में स्थानांतरित करने की सिफारिश की है। इस स्थानांतरण के बीच जस्टिस अग्रवाल 5 सितंबर तक न्यायिक कार्यों से अवकाश पर हैं।
न्यायिक करियर और पृष्ठभूमि
छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, जस्टिस संजय के. अग्रवाल का जन्म 15 जुलाई 1965 को रतनपुर, बिलासपुर में हुआ था। उन्होंने रतनपुर में अपनी प्रारंभिक शिक्षा पूरी की और गुरु घासीदास विश्वविद्यालय, बिलासपुर से बैचलर ऑफ साइंस तथा बैचलर ऑफ लॉज की डिग्री प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर से मास्टर ऑफ लॉज की उपाधि हासिल की।
वकालत से न्यायपीठ तक का सफर
3 जनवरी 1989 को अधिवक्ता के रूप में पंजीकृत होने के बाद उन्होंने बिलासपुर के जिला एवं सत्र न्यायालय, जबलपुर स्थित मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय और बिलासपुर स्थित छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में वकालत की। उनकी विशेषज्ञता सिविल और संवैधानिक मामलों में रही। अपने अधिवक्ता जीवन में वे भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड, स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, केनरा बैंक, देना बैंक तथा रायपुर और बिलासपुर नगर निगमों सहित अनेक सरकारी निगमों और कॉर्पोरेट समूहों के अधिवक्ता रहे।
सरकारी पदों पर योगदान
जस्टिस अग्रवाल ने 1 मार्च 2002 से 29 फरवरी 2004 तक छत्तीसगढ़ राज्य के डिप्टी एडवोकेट जनरल के रूप में कार्य किया। तत्पश्चात 25 जून 2012 से पदोन्नति तक वे छत्तीसगढ़ के एडवोकेट जनरल रहे — राज्य का सर्वोच्च विधि अधिकारी पद। इस दौरान वे हिदायतुल्लाह नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, रायपुर की कार्यकारी परिषद के पदेन सदस्य, इंडियन लॉ रिपोर्ट्स कमिटी (छत्तीसगढ़ श्रृंखला) के सदस्य और छत्तीसगढ़ सीपीसी वैकल्पिक विवाद निवारण एवं मध्यस्थता नियम, 2006 के तहत मध्यस्थ की भूमिका में भी रहे।
उच्च न्यायालय में नियुक्ति
16 सितंबर 2013 को उन्हें छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय का अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया गया। इसके बाद 8 मार्च 2016 को उन्होंने स्थायी न्यायाधीश के रूप में शपथ ली। अब सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश के बाद उनका अगला पड़ाव राजस्थान उच्च न्यायालय होगा।
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की स्थानांतरण सिफारिशें न्यायिक स्वतंत्रता और प्रशासनिक संतुलन के व्यापक ढाँचे का हिस्सा होती हैं। यह सिफारिश केंद्र सरकार के पास अनुमोदन के लिए भेजी जाएगी, जिसके बाद आधिकारिक अधिसूचना जारी होगी।