व्हाइट हाउस बॉलरूम पर रोक: फेडरल कोर्ट ने ट्रंप के $40 करोड़ प्रोजेक्ट को अवैध ठहराया
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिका के डिस्ट्रिक्ट ऑफ कोलंबिया सर्किट के फेडरल अपील्स कोर्ट ने 7 अगस्त 2026 को 2-1 के बहुमत से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन को व्हाइट हाउस में प्रस्तावित 40 करोड़ डॉलर के विशाल बॉलरूम के निर्माण पर तत्काल रोक लगाने का आदेश दिया। अदालत ने साथ ही प्रशासन को 14 दिनों का समय दिया है, ताकि वह चाहे तो सुप्रीम कोर्ट में इस फैसले की समीक्षा की अपील कर सके।
मुख्य घटनाक्रम
अदालत के अनुसार, अक्टूबर 2025 में महज तीन दिनों के भीतर ट्रंप प्रशासन ने बिना कांग्रेस की अनुमति और बिना किसी विचार-विमर्श के व्हाइट हाउस के ईस्ट विंग को पूरी तरह ध्वस्त करवा दिया। इसके स्थान पर 90,000 वर्ग फुट का एक विशाल बॉलरूम बनाने की योजना थी, जिसका वित्तपोषण निजी फंड से किया जाना था और जिस पर कांग्रेस की कोई निगरानी नहीं थी।
अदालत ने नेशनल ट्रस्ट फॉर हिस्टोरिक प्रिजर्वेशन के पक्ष में फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया कि यह कदम अमेरिकी संवैधानिक परंपराओं और ऐतिहासिक संरक्षण के सिद्धांतों का उल्लंघन है।
अदालत की टिप्पणियाँ
फैसले में कोर्ट ने कहा, 'हर राष्ट्रपति व्हाइट हाउस और उसके एग्जीक्यूटिव रेजिडेंस का स्थायी मालिक नहीं, बल्कि अस्थायी निवासी होता है। राष्ट्रपति के पास इस संपत्ति पर कोई संवैधानिक अधिकार नहीं है। यह परिसर वर्तमान और भविष्य के सभी राष्ट्रपतियों तथा अमेरिकी जनता के उपयोग के लिए बनाया और संरक्षित किया गया है।'
अदालत ने यह भी कहा कि 'अमेरिकी इतिहास में ऐसा कोई उदाहरण नहीं मिला जिसमें किसी राष्ट्रपति ने निजी तौर पर जुटाए गए धन का उपयोग करके व्हाइट हाउस के उन महत्वपूर्ण हिस्सों को एकतरफा ढंग से गिरा दिया हो, जिन्हें कांग्रेस ने बनाने की मंजूरी दी थी और जिनके लिए अमेरिकी करदाताओं ने भुगतान किया था।'
ट्रंप प्रशासन का पक्ष
इससे पहले जुलाई 2026 में ट्रंप ने कहा था कि व्हाइट हाउस का पुनर्निर्माण और नवीनीकरण अमेरिका के व्यापक पुनर्जागरण का प्रतीक है। 7 जुलाई को रोज गार्डन से दिए गए संबोधन में उन्होंने तर्क दिया था कि अमेरिका के पास ऐसी औपचारिक सुविधाएँ होनी चाहिए जो दुनिया की अन्य बड़ी शक्तियों के बराबर या उनसे बेहतर हों। उन्होंने इस परियोजना को केवल संरक्षण का प्रयास नहीं, बल्कि राष्ट्रीय शक्ति और आत्मविश्वास का प्रतीक बताया था।
आगे क्या होगा
अदालत ने अपने आदेश पर 14 दिनों की रोक लगाई है ताकि प्रशासन सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटा सके। यह मामला अब अमेरिकी राष्ट्रपति की कार्यकारी शक्तियों की सीमाओं और ऐतिहासिक धरोहर संरक्षण के बीच संवैधानिक टकराव की एक बड़ी मिसाल बन गया है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब ट्रंप प्रशासन कई मोर्चों पर न्यायिक चुनौतियों का सामना कर रहा है।