क्या उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा विधेयक 2025 विधानसभा में पास हुआ, मदरसा बोर्ड होगा खत्म?
सारांश
मुख्य बातें
देहरादून, 20 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। उत्तराखंड की विधानसभा में अल्पसंख्यक शिक्षा विधेयक को मंजूरी मिल गई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक के दौरान उत्तराखंड अल्पसंख्यक शैक्षिक संस्थान अधिनियम-2025 को स्वीकृति दी गई। बुधवार को इस विधेयक को विधानसभा में प्रस्तुत किया गया, जहां भारी हंगामे के बीच इसे पास किया गया।
विधानसभा में विपक्षी दलों ने अल्पसंख्यक शिक्षा विधेयक के विरोध में जोरदार हंगामा किया। विपक्ष ने विधेयक को रोकने का प्रयास किया, लेकिन सरकार ने इसे सदन से पास कराने में सफलता प्राप्त की।
विधायक त्रिलोक सिंह चीमा ने सदन में उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थान विधेयक से धारा 14 (ठ) को हटाने का प्रस्ताव रखा, जिसे स्वीकार करते हुए विधेयक से बाहर किया गया है।
राज्य में अल्पसंख्यक शैक्षिक संस्थान का दर्जा केवल मुस्लिम समुदाय के लिए था, लेकिन नए विधेयक के तहत सिख, जैन, ईसाई, बौद्ध और पारसी समुदायों को भी यह सुविधा मिलेगी। 1 जुलाई 2026 से मदरसा बोर्ड भंग किया जाएगा और उसकी जगह उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का गठन होगा। राज्य के 452 मदरसों सहित सभी अल्पसंख्यक शैक्षिक संस्थानों को अब नए प्राधिकरण से मान्यता प्राप्त करनी होगी। सरकार का कहना है कि यह व्यवस्था शिक्षा की गुणवत्ता, पारदर्शिता और संस्थागत अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करेगी। मान्यता के लिए संस्थानों का एक्ट में पंजीकरण और संपत्ति उनके नाम पर होना आवश्यक होगा।
हालांकि, उत्तर प्रदेश के कुछ मुस्लिम धर्मगुरुओं ने उत्तराखंड सरकार के निर्णय पर विरोध जताया है। मुरादाबाद के मौलाना दानिश कादरी ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा, 'यदि कोई मुस्लिम हिंदू धर्म अपनाता है, तो उसका स्वागत होता है। इसी तरह, यदि कोई गैर-मुस्लिम इस्लाम धर्म अपनाता है, तो उस पर भी आपत्ति नहीं होनी चाहिए। लेकिन यदि कोई जबरदस्ती धर्म परिवर्तन कराना चाहता है, तो यह गलत है।'
ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने कहा, 'उत्तराखंड सरकार ने पहले यूनिफॉर्म सिविल कोड का बिल जबरदस्ती पास कराया, जबकि मुसलमान, सिख, जैन, अनुसूचित जनजाति और कबायली समाज जैसे कई समुदायों ने सहमति नहीं जताई थी। अब वे मदरसा शिक्षा बोर्ड को समाप्त करके एक नया अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थान लाने का ऐलान कर रहे हैं।'