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उत्तरी तमिलनाडु में डीएमके की स्थिति मजबूत, एआईएडीएमके वापसी की तैयारी में

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उत्तरी तमिलनाडु में डीएमके की स्थिति मजबूत, एआईएडीएमके वापसी की तैयारी में

सारांश

उत्तरी तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में डीएमके की स्थिति मजबूत दिख रही है, जबकि एआईएडीएमके वापसी की कोशिश कर रहा है। जाति समीकरण और गठबंधनों की अहमियत को देखते हुए, यह क्षेत्र चुनावी परिणामों पर बड़ा असर डाल सकता है। जानें क्या है राजनीतिक माहौल।

मुख्य बातें

डीएमके ने उत्तरी तमिलनाडु में पकड़ मजबूत की है।
जाति समीकरण चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
एआईएडीएमके वापसी की कोशिश कर रहा है।
नई पार्टियाँ युवा मतदाताओं को आकर्षित कर सकती हैं।
राजनीतिक माहौल काफी जटिल है।

चेन्नई, 6 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। जैसे-जैसे तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव नजदीक आते जा रहे हैं, राज्य के उत्तरी क्षेत्र फिर से चर्चा का केंद्र बन गए हैं। ये क्षेत्र चुनाव परिणामों पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकते हैं। कुड्डालोर से तिरुवन्नामलाई तक का इलाका पहले से ही राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण रहा है और अक्सर चुनावी नतीजों को प्रभावित करता है।

इस बार डीएमके इस क्षेत्र में एक मजबूत स्थिति में नजर आ रही है। पार्टी ने पिछले चुनावों में शानदार प्रदर्शन करके यहाँ अपनी पकड़ को मजबूत किया है। विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में उसे व्यापक समर्थन मिल रहा है, जिससे उसकी स्थिति में और मजबूती आई है।

दूसरी ओर, एआईएडीएमके के नेतृत्व वाला गठबंधन वापसी की कोशिश कर रहा है। यह गठबंधन नए लोगों को जोड़ने और अनुभवी नेताओं को चुनावी मैदान में उतारने पर फोकस कर रहा है। उन्हें उम्मीद है कि वे उन सीटों पर अच्छा प्रदर्शन करेंगे, जहाँ पिछले चुनावों में जीत-हार का अंतर बहुत कम था।

हालांकि, डीएमके अपनी संगठनात्मक ताकत और जमीनी पकड़ के कारण आगे नजर आ रही है। पहले भी इसी कारण उसे उत्तरी तमिलनाडु में बढ़त मिली थी।

पिछले चुनावों में लगातार अच्छे प्रदर्शन ने डीएमके की स्थिति को और मजबूत किया है। पार्टी के वरिष्ठ नेता जैसे दुरईमुरुगन, ई.वी. वेलू, और एम.आर.के. पनीरसेल्वम इसी क्षेत्र से आते हैं, जिससे पार्टी को और मजबूती मिलती है। विशेष रूप से, ई.वी. वेलू 2001 से अब तक कोई भी चुनाव नहीं हारे हैं, जिससे उनका प्रभाव काफी मजबूत माना जाता है।

दूसरी ओर, एआईएडीएमके अपनी स्थिति को सुधारने के लिए सी. वी. षणमुगम और के.सी. वीरमणि जैसे नेताओं पर भरोसा कर रही है। हालांकि पार्टी को पिछले चुनावों में हार का सामना करना पड़ा था, फिर भी इन नेताओं ने संगठन को सक्रिय बनाए रखा है, जिससे पार्टी अभी भी मुकाबले में बनी हुई है।

इस क्षेत्र में चुनाव के दौरान जाति का समीकरण हमेशा से महत्वपूर्ण रहा है। वन्नियार और दलित समुदाय मिलकर लगभग 55 प्रतिशत मतदाता बनाते हैं, इसलिए गठबंधन अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाता है।

डीएमके ने थोल. थिरुमावलवन की पार्टी ‘विदुथलाई चिरुथैगल काची’ (वीसीके) के साथ गठबंधन किया है, जिससे उसे दलित वोटों का समर्थन मिल सकता है। वहीं, एआईएडीएमके ने वन्नियार वोटों को आकर्षित करने के लिए पीएमके के साथ हाथ मिलाया है, लेकिन पीएमके के भीतर चल रहे मतभेद इस गठबंधन को कमजोर कर सकते हैं।

उत्तरी तमिलनाडु में भाजपा की भूमिका अभी सीमित है, लेकिन इसकी मौजूदगी से अल्पसंख्यक वोट डीएमके के पक्ष में एकजुट हो सकते हैं, जिससे पार्टी को फायदा मिल सकता है। अंबुर, वानीयंबाडी, रानीपेट और कट्टुमन्नारकोइल जैसे क्षेत्रों में मुस्लिम आबादी काफी है, जिससे चुनाव और भी जटिल हो जाता है।

अभिनेता से नेता बने विजय और उनकी पार्टी तमिलगा वेट्री कझगम (टीवीके) के मैदान में आने से नया माहौल बना है। खासकर युवा मतदाताओं पर इसका प्रभाव पड़ सकता है। हालांकि पार्टी की संगठनात्मक ताकत अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।

इसी तरह, फिल्म निर्देशक से राजनेता बने सीमान की पार्टी एनटीके को भी ध्यान देने लायक वोट मिलने की उम्मीद है। जाति और गठबंधनों के अलावा, डीएमके अपनी योजनाओं के जरिए लोगों का समर्थन पाने की कोशिश कर रही है, जिसमें महिलाओं को हर महीने आर्थिक सहायता देने जैसी योजनाएं शामिल हैं। दूसरी ओर, एआईएडीएमके के नेता एडप्पादी के. पलानीस्वामी सत्ता विरोधी माहौल और वंशवाद के मुद्दे उठाकर अपनी स्थिति को मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं।

कुल मिलाकर, कई कारणों से उत्तरी तमिलनाडु का यह इलाका चुनाव में अत्यधिक महत्वपूर्ण बन गया है। हालाँकि प्रारंभिक संकेत बताते हैं कि डीएमके अभी भी थोड़ी बढ़त में है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जातिगत समीकरण और गठबंधन का प्रभाव निर्णायक साबित हो सकता है। सभी राजनीतिक दल अपनी-अपनी रणनीतियों के साथ इस महत्वपूर्ण क्षेत्र में अपनी हिस्सेदारी सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहे हैं।
RashtraPress
20 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उत्तरी तमिलनाडु में चुनावी स्थिति क्या है?
उत्तरी तमिलनाडु में डीएमके मजबूत स्थिति में है, जबकि एआईएडीएमके वापसी की कोशिश कर रहा है।
इस क्षेत्र में जाति समीकरण का क्या रोल है?
वन्नियार और दलित समुदाय मिलकर 55% मतदाता बनाते हैं, जिससे गठबंधन महत्वपूर्ण हो जाता है।
डीएमके की प्रमुख नेता कौन हैं?
दुरईमुरुगन , ई.वी. वेलू , और एम.आर.के. पनीरसेल्वम पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं।
क्या एआईएडीएमके की वापसी संभव है?
एआईएडीएमके अपने पूर्व नेताओं पर भरोसा कर रही है, लेकिन उनके लिए चुनौती बनी हुई है।
इस चुनाव में कौन सी नई पार्टियाँ शामिल हैं?
विजय की पार्टी टीवीके और सीमान की एनटीके चुनावी मैदान में हैं।
राष्ट्र प्रेस
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