क्या वैष्णो देवी मेडिकल कॉलेज की मान्यता रद्द होना चिंताजनक है?
सारांश
Key Takeaways
- एनएमसी ने कॉलेज की मान्यता रद्द की।
- मुख्यमंत्री ने छात्रों के भविष्य की चिंता जताई।
- सरकार ने छात्रों के समायोजन का आश्वासन दिया।
- शिक्षा के लिए धर्म को न जोड़ने का आग्रह।
जम्मू, 8 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) के निर्णय के बाद जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक और शैक्षणिक क्षेत्रों में हलचल बढ़ गई है। एनएमसी ने श्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस (एसएमवीडीआईएमई), कटरा के एमबीबीएस पाठ्यक्रम की मान्यता रद्द कर दी है। आयोग की टीम ने हाल में किए गए निरीक्षण में कॉलेज में बुनियादी ढांचे, फैकल्टी की कमी और आवश्यक मानकों में गंभीर खामियां पाई थीं, जिसके चलते यह सख्त कदम उठाया गया।
इस निर्णय पर जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि इस फैसले का सबसे अधिक नुकसान उन मेधावी छात्रों को हुआ है, जिन्होंने नीट परीक्षा में सफलता प्राप्त की और योग्यता के आधार पर इस कॉलेज में दाखिला लिया। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि छात्रों को उन कारणों के लिए दंडित नहीं किया जाना चाहिए जो उनके नियंत्रण से बाहर हैं।
उमर अब्दुल्ला ने कहा कि अब सरकार की जिम्मेदारी है कि वह इन छात्रों के शैक्षणिक भविष्य को सुरक्षित करे। उन्होंने आश्वासन दिया कि प्रभावित छात्रों को जम्मू-कश्मीर के अन्य सरकारी मेडिकल कॉलेजों में समायोजित किया जाएगा, ताकि उनकी पढ़ाई बाधित न हो।
हालांकि, मुख्यमंत्री ने इस मामले में सबसे गंभीर मुद्दा एक पूर्ण रूप से कार्यरत मेडिकल कॉलेज को बंद करने को बताया। उन्होंने कहा कि देशभर में छात्र मेडिकल कॉलेज में दाखिले के लिए वर्षों तक संघर्ष करते हैं, और ऐसे समय में एक कार्यरत कॉलेज को बंद करना बेहद चिंताजनक है।
उन्होंने कहा कि अगर भाजपा इस बात पर खुश है कि विश्वविद्यालय अपने मानक बनाए नहीं रख पाया, तो सवाल यह उठता है कि इसके लिए जिम्मेदार कौन है। अगर मानकों में कमी रही है, तो दोषियों पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही? मुख्यमंत्री ने कहा कि मान लीजिए इन 50 बच्चों को तो सरकार कहीं न कहीं समायोजित कर देगी, लेकिन उनके भविष्य को जो नुकसान हुआ है, उसकी जिम्मेदारी किसी को लेनी होगी।
वहीं, शिक्षा और स्वास्थ्य मंत्री सकीना इटू ने इस मुद्दे पर कहा कि मुख्यमंत्री पहले ही विभाग को निर्देश दे चुके हैं कि प्रभावित छात्रों को उनके घरों के करीब मेडिकल कॉलेजों में समायोजित किया जाए।
धर्म के आधार पर उठ रहे सवालों पर सकीना इटू ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि शिक्षा को मजहब से जोड़ना गलत है। जो बच्चे वहां पढ़ रहे थे, वे किसी भी धर्म के हों, वे कल को डॉक्टर बनेंगे और भेदभाव के बिना लोगों का इलाज करेंगे।
इसके अलावा, सकीना इटू ने शिक्षा के क्षेत्र में सरकार की उपलब्धियों पर भी बात की। उन्होंने बताया कि जम्मू-कश्मीर के 14 जिलों को शिक्षा के मामले में 100 प्रतिशत लक्ष्य हासिल करने वाला घोषित किया गया है।
यह फैसला ऐसे समय आया है जब कॉलेज पहले से ही एमबीबीएस दाखिलों को लेकर विवादों में घिरा हुआ था।