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शिवगंगा छात्रावास फंड घोटाला: टीवीके नेता वेलमुरुगन ने की निष्पक्ष जांच की मांग

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शिवगंगा छात्रावास फंड घोटाला: टीवीके नेता वेलमुरुगन ने की निष्पक्ष जांच की मांग

सारांश

शिवगंगा के आदि द्रविड़ कल्याण छात्रावासों में 2017-2023 के बीच कथित फंड दुरुपयोग पर मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै पीठ ने सवाल उठाए हैं। टीवीके नेता वेलमुरुगन ने माँग की है कि आरोपी अधिकारियों — जिनमें से कुछ को पदोन्नति मिल चुकी है — के खिलाफ बिना पक्षपात के कार्रवाई हो और वसूली राशि छात्रों पर खर्च हो।

मुख्य बातें

वेलमुरुगन ने शिवगंगा जिले में 2017 से 2023 के बीच आदि द्रविड़ कल्याण छात्रावास फंड के कथित दुरुपयोग की निष्पक्ष जांच की माँग की।
मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरै पीठ ने आठ जिला अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं।
कथित तौर पर जाँच के दौरान कुछ आरोपी अधिकारियों को पदोन्नति दी गई और कुछ सेवानिवृत्त हो गए।
वेलमुरुगन ने माँग की कि कथित गबन की पूरी राशि वसूल कर छात्रों के कल्याण पर खर्च की जाए।
उन्होंने कहा कि जांच के मानदंड पिछली और वर्तमान सरकार के अधिकारियों — दोनों के लिए समान होने चाहिए।

तमिलगा वाझवुरिमाई काची (टीवीके) के नेता और पूर्व विधायक टी. वेलमुरुगन ने तमिलनाडु के शिवगंगा जिले में 2017 से 2023 के बीच आदि द्रविड़ कल्याण छात्रावासों के विद्यार्थियों के लिए आवंटित धनराशि के कथित दुरुपयोग की पारदर्शी और निष्पक्ष जांच की माँग की है। उन्होंने आरोपों का सामना कर रहे अधिकारियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई में हो रही देरी पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

मुख्य घटनाक्रम

वेलमुरुगन ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट में इन आरोपों को 'चौंकाने वाला' बताया। उन्होंने तमिलनाडु सरकार से जवाबदेही तय करने, कथित भ्रष्टाचार से हुए नुकसान की भरपाई करने और वसूली की गई राशि को सीधे छात्रों के हित में लगाने की माँग की।

उन्होंने यह भी बताया कि मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरै पीठ ने इस मामले में आठ जिला अधिकारियों के खिलाफ लगे आरोपों के बाद विभागीय कार्रवाई को लेकर गंभीर टिप्पणियाँ की हैं।

आरोपों की प्रकृति और प्रशासनिक चूक

वेलमुरुगन के अनुसार, इस विवाद ने उन प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं जिनकी जिम्मेदारी छात्रों की शिक्षा, भोजन और बुनियादी ज़रूरतों के लिए आवंटित धन का सही उपयोग सुनिश्चित करना था। उन्होंने विशेष चिंता जताई कि अदालत में दी गई जानकारी के मुताबिक, आरोपों का सामना कर रहे कुछ अधिकारियों को जाँच के दौरान ही पदोन्नति दे दी गई, जबकि कुछ सेवानिवृत्त भी हो गए।

उन्होंने पूछा कि छात्रों के लिए निर्धारित धनराशि से जुड़े इतने गंभीर आरोपों के बावजूद छह वर्षों तक अनुशासनात्मक कार्रवाई क्यों नहीं हुई और जाँच एजेंसियों ने इस पूरी अवधि में धन प्रबंधन से जुड़े सभी लोगों की भूमिका की जाँच की है या नहीं।

जवाबदेही और पारदर्शिता की माँग

वेलमुरुगन ने स्पष्ट किया कि जाँच के मानदंड सभी के लिए समान होने चाहिए — चाहे मामला पिछली सरकार से जुड़े लोगों का हो या वर्तमान सरकार के अधिकारियों का। उन्होंने कहा कि करदाताओं के पैसे की रक्षा की जिम्मेदारी उठाने वाले वरिष्ठ अधिकारियों को किसी भी लापरवाही के लिए जवाब देना चाहिए।

टीवीके नेता ने यह भी माँग की कि सबूतों के आधार पर जिन लोगों की प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष भूमिका सामने आए, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो — चाहे उनका राजनीतिक या प्रशासनिक पद कोई भी हो।

छात्रों के हित में वसूली की अपील

वेलमुरुगन ने सरकार से कथित रूप से गबन की गई पूरी राशि वसूल कर उसे छात्रों के कल्याण पर खर्च करने की अपील की। उन्होंने कहा कि शिक्षा के लिए आवंटित धन के दुरुपयोग को सामान्य प्रशासनिक चूक नहीं माना जा सकता — यह सुनिश्चित करना सरकार की मूल जिम्मेदारी है कि यह धन वास्तविक लाभार्थियों तक पहुँचे।

क्या होगा आगे

टीवीके की ओर से वेलमुरुगन ने राज्य सरकार से मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरै पीठ के समक्ष उठाए गए प्रत्येक आरोप पर स्पष्ट जवाब देने, दोषियों को बिना किसी पक्षपात के न्यायालय के सामने पेश करने और पूरी जाँच प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने की अपील की है। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब तमिलनाडु में सरकारी कल्याण योजनाओं की निगरानी और जवाबदेही को लेकर राजनीतिक बहस तेज़ हो रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि छह वर्षों तक विभागीय तंत्र मूकदर्शक क्यों बना रहा। वेलमुरुगन की माँग राजनीतिक रूप से सुविधाजनक समय पर आई है, फिर भी जवाबदेही की माँग अपने आप में जायज़ है। सरकार को यह स्पष्ट करना होगा कि क्या यह चूक प्रणालीगत है या व्यक्तिगत — क्योंकि इसी उत्तर पर सुधार की दिशा निर्भर करती है।
RashtraPress
10 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शिवगंगा छात्रावास फंड घोटाला क्या है?
तमिलनाडु के शिवगंगा जिले में 2017 से 2023 के बीच आदि द्रविड़ कल्याण छात्रावासों के विद्यार्थियों के लिए आवंटित धनराशि के कथित दुरुपयोग का यह मामला है। मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरै पीठ ने आठ जिला अधिकारियों के खिलाफ आरोपों के बाद विभागीय कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं।
टीवीके नेता वेलमुरुगन ने क्या माँग की है?
वेलमुरुगन ने पारदर्शी और निष्पक्ष जांच, कथित गबन राशि की वसूली, और उस राशि को छात्रों के कल्याण पर खर्च करने की माँग की है। उन्होंने यह भी कहा कि जांच के मानदंड सभी के लिए — चाहे पिछली सरकार हो या वर्तमान — समान होने चाहिए।
मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै बेंच ने इस मामले में क्या कहा?
मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरै पीठ ने आठ जिला अधिकारियों के खिलाफ लगे आरोपों के बाद विभागीय कार्रवाई को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। अदालत में दी गई जानकारी के अनुसार, कुछ आरोपी अधिकारियों को जांच के दौरान ही पदोन्नति दी गई और कुछ सेवानिवृत्त हो गए।
इस मामले में किन अधिकारियों पर आरोप हैं?
कथित तौर पर शिवगंगा जिले के आठ जिला अधिकारियों पर आरोप हैं, जिनकी जिम्मेदारी छात्रावास में छात्रों की शिक्षा, भोजन और बुनियादी ज़रूरतों के लिए आवंटित धन का सही उपयोग सुनिश्चित करना था। कुछ अधिकारियों को कथित तौर पर जांच के दौरान पदोन्नति मिल चुकी है।
यह मामला आम जनता और छात्रों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
यह मामला सरकारी कल्याण योजनाओं की निगरानी और जवाबदेही से जुड़ा है — जहाँ समाज के सबसे कमज़ोर वर्ग के छात्रों के लिए आवंटित धन के दुरुपयोग का आरोप है। यदि आरोप सही साबित होते हैं, तो यह करदाताओं के पैसे की बर्बादी और छात्रों के अधिकारों का उल्लंघन दोनों है।
राष्ट्र प्रेस
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