16 सितंबर 2026
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हैदराबाद मुक्ति दिवस: उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन सिकंदराबाद में फहराएंगे तिरंगा, केंद्र-राज्य के अलग-अलग कार्यक्रम

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हैदराबाद मुक्ति दिवस: उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन सिकंदराबाद में फहराएंगे तिरंगा, केंद्र-राज्य के अलग-अलग कार्यक्रम

सारांश

उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन की मौजूदगी से हैदराबाद मुक्ति दिवस को इस बार सर्वोच्च संवैधानिक प्रतिनिधित्व मिला है — लेकिन केंद्र और तेलंगाना सरकार अभी भी अलग-अलग नाम और थीम के साथ इस दिन को मना रहे हैं, जो राजनीतिक खींचतान की निरंतरता को दर्शाता है।

मुख्य बातें

उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन 17 सितंबर 2026 को सिकंदराबाद परेड ग्राउंड में तिरंगा फहराएंगे और सीएपीएफ परेड की सलामी लेंगे।
केंद्र सरकार लगातार पाँचवें वर्ष हैदराबाद मुक्ति दिवस का आयोजन कर रही है; 2024 में गजट नोटिफिकेशन से यह आधिकारिक घोषित हुआ।
तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए.
रेवंत रेड्डी राज्य सरकार के कार्यक्रम में पब्लिक गार्डन, हैदराबाद में ध्वजारोहण करेंगे; राज्य इसे 'प्रजा पालन दिनोत्सव' के रूप में मना रहा है।
राज्य के सभी 32 जिला मुख्यालयों में मंत्री और प्रतिनिधि समारोह आयोजित करेंगे।
17 सितंबर 1948 को हैदराबाद रियासत का भारतीय संघ में विलय हुआ था — स्वतंत्रता के 13 महीने बाद।
एआईएमआईएम और मुस्लिम संगठन ऑपरेशन पोलो को लेकर ऐतिहासिक आपत्तियों के आधार पर समारोह का विरोध करते आए हैं।

उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन 17 सितंबर 2026 को हैदराबाद मुक्ति दिवस के अवसर पर सिकंदराबाद परेड ग्राउंड में राष्ट्रीय ध्वज फहराएंगे और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) की परेड की सलामी लेंगे। इस वर्ष के समारोह में वे मुख्य अतिथि हैं — जो केंद्र सरकार की ओर से लगातार पाँचवें वर्ष आयोजित इस राष्ट्रीय कार्यक्रम में अब तक का सर्वोच्च संवैधानिक प्रतिनिधित्व है।

मुख्य कार्यक्रम और भागीदारी

सिकंदराबाद के केंद्रीय समारोह में तेलंगाना के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला, केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, जी. किशन रेड्डी, बंदी संजय कुमार और अन्य वरिष्ठ नेता उपस्थित रहेंगे। कार्यक्रम में सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ भी आयोजित की जाएंगी।

समानांतर रूप से, तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी हैदराबाद के पब्लिक गार्डन में राज्य सरकार के मुख्य कार्यक्रम में राष्ट्रीय ध्वज फहराएंगे। राज्य सरकार लगातार तीसरे वर्ष इस दिन को 'तेलंगाना प्रजा पालन दिनोत्सव' (जन शासन दिवस) के रूप में मना रही है।

राज्य सरकार का व्यापक आयोजन

राज्य के मंत्री, सरकारी सलाहकार और प्रमुख प्रतिनिधि सभी 32 जिला मुख्यालयों में आधिकारिक समारोहों में राष्ट्रीय ध्वज फहराएंगे और परेड की सलामी लेंगे। सभी सरकारी कार्यालयों, शहरी स्थानीय निकायों और ग्राम पंचायतों में भी तिरंगा फहराया जाएगा।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और राजनीतिक विवाद

17 सितंबर 1948 को तत्कालीन हैदराबाद रियासत को भारतीय संघ में शामिल किया गया था। 15 अगस्त 1947 को भारत की आजादी के बाद भी हैदराबाद 13 महीने तक निजाम के शासन में रहा। केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय ने 2022 में इस दिन आधिकारिक समारोह शुरू किया और 2024 में भाजपा सरकार ने गजट नोटिफिकेशन जारी कर 17 सितंबर को आधिकारिक रूप से हैदराबाद मुक्ति दिवस घोषित किया।

गौरतलब है कि 2022 और 2023 में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने समारोह में तिरंगा फहराया था। 2024 में जी. किशन रेड्डी और 2025 में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने समारोह का नेतृत्व किया था।

दूसरी ओर, पहले भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) सरकार ने 2022 और 2023 में इस दिन को 'राष्ट्रीय एकता दिवस' के रूप में मनाया था। दिसंबर 2023 में सत्ता में आई कांग्रेस सरकार ने इसे 'प्रजा पालन दिनोत्सव' के रूप में मनाने का निर्णय लिया।

विरोध और सांप्रदायिक संवेदनशीलता

मुस्लिम संगठनों ने ऐतिहासिक रूप से इस समारोह पर आपत्ति जताई है। उनका कथित तौर पर दावा है कि 'ऑपरेशन पोलो' के नाम से जाने जाने वाले 'पुलिस एक्शन' के दौरान नरसंहार हुआ था। हैदराबाद सांसद असदुद्दीन ओवैसी के नेतृत्व वाली एआईएमआईएम (AIMIM) और कुछ अन्य दलों ने यह कहते हुए समारोहों का विरोध किया है कि पूरे भारत का एक ही स्वतंत्रता दिवस है और भाजपा इस मुद्दे को सांप्रदायिक रंग दे रही है।

पिछले वर्ष मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने केंद्रीय मंत्रियों को 'प्रजा पालन दिनोत्सव' में शामिल होने का निमंत्रण दिया था, जिसे भाजपा नेताओं ने अस्वीकार कर दिया। किशन रेड्डी ने अपने जवाब में लिखा था कि वे 'एक ऐसी निष्ठाहीन रस्म का हिस्सा नहीं बन सकते जो लोगों से सच्चाई को मिटाने का खुला प्रयास करती है।'

आगे का परिदृश्य

यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र और तेलंगाना राज्य सरकार के बीच इस दिन के नामकरण और आयोजन को लेकर राजनीतिक खींचतान जारी है। उपराष्ट्रपति की उपस्थिति से केंद्र ने इस आयोजन को और अधिक संवैधानिक गरिमा देने का प्रयास किया है, जबकि राज्य सरकार अपनी अलग पहचान के साथ इसे 'जन शासन दिवस' के रूप में मनाती रहेगी।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हैदराबाद मुक्ति दिवस 2026 में मुख्य अतिथि कौन हैं?
इस वर्ष उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन मुख्य अतिथि हैं। वे 17 सितंबर 2026 को सिकंदराबाद परेड ग्राउंड में राष्ट्रीय ध्वज फहराएंगे और सीएपीएफ परेड की सलामी लेंगे।
हैदराबाद मुक्ति दिवस क्यों मनाया जाता है?
17 सितंबर 1948 को भारतीय सेना के 'ऑपरेशन पोलो' के बाद हैदराबाद रियासत का भारतीय संघ में विलय हुआ था। 15 अगस्त 1947 को भारत की आजादी के बाद भी हैदराबाद 13 महीने तक निजाम के शासन में रहा था। केंद्र सरकार ने 2024 में गजट नोटिफिकेशन जारी कर इसे आधिकारिक राष्ट्रीय दिवस घोषित किया।
केंद्र और तेलंगाना सरकार इस दिन को अलग-अलग क्यों मनाते हैं?
केंद्र इसे 'हैदराबाद मुक्ति दिवस' के रूप में मनाता है, जबकि तेलंगाना की कांग्रेस सरकार इसे 'प्रजा पालन दिनोत्सव' (जन शासन दिवस) के रूप में मना रही है। दोनों के बीच नामकरण और थीम को लेकर राजनीतिक मतभेद हैं, जो भाजपा और कांग्रेस की अलग-अलग राजनीतिक प्राथमिकताओं को दर्शाते हैं।
एआईएमआईएम और मुस्लिम संगठन इस समारोह का विरोध क्यों करते हैं?
हैदराबाद सांसद असदुद्दीन ओवैसी के नेतृत्व वाली एआईएमआईएम का कहना है कि पूरे भारत का एक ही स्वतंत्रता दिवस है। मुस्लिम संगठनों ने कथित तौर पर यह भी दावा किया है कि ऑपरेशन पोलो के दौरान नरसंहार हुआ था, और वे भाजपा पर इस मुद्दे को सांप्रदायिक रंग देने का आरोप लगाते हैं।
पिछले वर्षों में हैदराबाद मुक्ति दिवस समारोह का नेतृत्व किसने किया?
2022 और 2023 में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने तिरंगा फहराया था। 2024 में केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी और 2025 में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह मुख्य अतिथि थे। 2026 में उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन की उपस्थिति इस आयोजन में अब तक का सर्वोच्च संवैधानिक प्रतिनिधित्व है।
राष्ट्र प्रेस
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