क्या विपक्ष-शासित आठ राज्यों ने जीएसटी सुधार का समर्थन किया है, साथ ही रखी हैं तीन अहम शर्तें?

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क्या विपक्ष-शासित आठ राज्यों ने जीएसटी सुधार का समर्थन किया है, साथ ही रखी हैं तीन अहम शर्तें?

सारांश

विपक्ष-शासित आठ राज्यों ने जीएसटी की दरों में कटौती का समर्थन किया है, लेकिन इसके साथ ही केंद्र सरकार के सामने तीन महत्वपूर्ण मांगें रखी हैं। क्या यह बदलाव भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए फायदेमंद साबित होगा?

Key Takeaways

  • जीएसटी दरों में कटौती का प्रस्ताव
  • तीन प्रमुख मांगें केंद्र सरकार के समक्ष
  • आर्थिक सुधारों की आवश्यकता

नई दिल्ली, 30 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। विपक्ष-शासित आठ राज्यों ने जीएसटी दरों में कमी और स्लैब की संख्या घटाने के प्रस्ताव का समर्थन किया है। हालांकि, इन राज्यों ने केंद्र सरकार के समक्ष तीन महत्वपूर्ण मांगें भी पेश की हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने शनिवार को यह जानकारी साझा की।

जयराम रमेश ने शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में लिखा कि विपक्ष-शासित आठ राज्यों- कर्नाटक, केरल, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और झारखंड - ने जीएसटी दरों में कटौती और स्लैब की संख्या कम करने के प्रस्ताव का समर्थन किया है।

हालांकि, इन राज्यों ने इसके साथ ही केंद्र सरकार के समक्ष तीन महत्वपूर्ण मांगें भी रखी हैं। कांग्रेस नेता की पहली मांग है कि एक ऐसी व्यवस्था स्थापित की जाए जो यह सुनिश्चित करे कि जीएसटी दरों में कटौती का पूरा लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंचे। दूसरी मांग यह है कि पाँच वर्षों तक सभी राज्यों को मुआवजा दिया जाए, जिसमें 2024/25 को आधार वर्ष माना जाए, क्योंकि दरों में कटौती से राज्यों की राजस्व आय पर प्रतिकूल असर पड़ना तय है। तीसरी मांग के अनुसार, 'सिन गुड्स' और लग्जरी वस्तुओं पर 40 फीसदी से अधिक अतिरिक्त शुल्क लगाया जाए और इससे होने वाली पूरी आय राज्यों को हस्तांतरित की जाए। उन्होंने बताया कि वर्तमान में केंद्र सरकार अपनी कुल आय का लगभग 17-18 फीसदी विभिन्न उपकरों से प्राप्त करती है, जो राज्यों के साथ साझा नहीं किए जाते।

जयराम रमेश ने दावा किया कि इन मांगों को पूर्णतया उचित माना जा रहा है और इन्हें हाल ही में केंद्रीय वित्त मंत्रालय के राष्ट्रीय लोक वित्त एवं नीति संस्थान (एनआईपीएफपी) द्वारा प्रकाशित शोध-पत्रों का भी समर्थन प्राप्त है।

उन्होंने पोस्ट में आगे लिखा, "भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस लंबे समय से जीएसटी 2.0 की मांग कर रही है जो न केवल कर स्लैब को कम करे और दरों में कटौती करे, बल्कि प्रक्रियाओं और अनिवार्य औपचारिकताओं को भी सरल बनाए, खासकर एमएसएमई के लिए। कांग्रेस पार्टी सभी राज्यों के हितों की पूरी तरह से रक्षा सुनिश्चित करने की अनिवार्यता पर भी ज़ोर दे रही है। उम्मीद है कि अगले सप्ताह होने वाली जीएसटी काउंसिल की बैठक केवल सुर्खियां बटोरने का एक अभ्यास नहीं होगी -जैसा कि मोदी सरकार के साथ अक्सर होता रहा है, बल्कि यह सच्चे सहकारी संघवाद की भावना को भी अक्षरशः आगे बढ़ाएगी।

Point of View

यह महत्वपूर्ण है कि सभी राज्यों के हितों की रक्षा की जाए। जीएसटी सुधार को लेकर की गई मांगें उचित हैं और यदि सही तरीके से लागू की जाती हैं, तो ये भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए फायदेमंद साबित हो सकती हैं।
NationPress
30/08/2025

Frequently Asked Questions

क्या जीएसटी दरों में कटौती से राज्य सरकारों को नुकसान होगा?
जी हाँ, दरों में कटौती से राज्यों की राजस्व आय पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
कौन से आठ राज्य हैं जिन्होंने जीएसटी सुधार का समर्थन किया?
कर्नाटक, केरल, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और झारखंड
कांग्रेस ने जीएसटी 2.0 की मांग क्यों की है?
कांग्रेस का मानना है कि जीएसटी 2.0 से कर स्लैब को कम किया जा सकेगा और प्रक्रियाओं को सरल बनाया जा सकेगा।