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क्या विपक्ष ने महाराष्ट्र विधानसभा के सत्र को विदर्भ की जनता के साथ धोखा बताया?

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क्या विपक्ष ने महाराष्ट्र विधानसभा के सत्र को विदर्भ की जनता के साथ धोखा बताया?

सारांश

महाराष्ट्र विधानसभा के शीतकालीन सत्र को लेकर विपक्ष ने कड़ी आलोचना की। विदर्भ क्षेत्र के किसानों को कोई राहत नहीं मिलने पर उठे सवाल। क्या चुनावों की तैयारी में हुई यह नाकामी सरकार को भारी पड़ेगी?

मुख्य बातें

विदर्भ के किसानों की समस्याएं अनसुनी रह गईं।
महायुति सरकार पर चुनावी लाभ के आरोप।
बेरोजगारी और नशे की समस्या पर कोई ठोस कदम नहीं।
सरकार की घोषणाओं की कमी से जनता में निराशा।
विदर्भ के लिए कोई विशेष योजना का अभाव।

नागपुर, 14 दिसंबर (राष्ट्र प्रेस)। महाराष्ट्र विधानसभा का एक सप्ताह का शीतकालीन सत्र रविवार को समाप्त हुआ। विपक्षी दलों ने महायुति सरकार की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि यह सत्र पूरी तरह से विफल रहा, क्योंकि इसने विदर्भ क्षेत्र के किसानों और नागरिकों को कोई ठोस राहत नहीं दी।

संयुक्त प्रेस वार्ता में राज्य विधानसभा में कांग्रेस विधायक दल के नेता विजय वडेट्टीवार, वरिष्ठ राष्ट्रीय कम्युनिस्ट पार्टी (एसपी) विधायक जयंत पाटिल और शिवसेना (यूबीटी) विधायक दल के नेता भास्कर जाधव ने कहा कि सत्र का मुख्य उद्देश्य 75,286 करोड़ रुपए की पूरक मांगों को पास करना और आगामी बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) चुनावों को ध्यान में रखते हुए कई निर्णयों की घोषणा करना था।

भास्कर जाधव ने आरोप लगाया कि यह शीतकालीन सत्र मुख्य रूप से चुनावों से पहले सरकारी खजाने से खर्च को सुविधाजनक बनाने के लिए आयोजित किया गया था।

उन्होंने कहा, "मुंबई, ठाणे और नवी मुंबई के लिए कुछ घोषणाएं की गईं, लेकिन विदर्भ के लिए एक भी घोषणा नहीं की गई। यह सत्र विदर्भ की जनता के साथ धोखा था और इसे नगर निगम चुनावों को ध्यान में रखकर आयोजित किया गया था।"

शिवसेना (यूबीटी) के विधायक सचिन अहीर ने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि सत्र के दौरान भ्रष्टाचार के कई मामलों पर सवाल उठाए जाने के बावजूद सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं की।

विजय वडेट्टीवार ने कहा, "विदर्भ के धान, सोयाबीन और कपास के किसान इस सत्र का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। विपक्ष ने धान और सोयाबीन किसानों के लिए बोनस की मांग की, लेकिन सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं की। राज्य में नशे की गंभीर समस्या है, लेकिन सरकार इसे दूर करने के लिए ठोस कदम उठाने में विफल रही।"

कांग्रेस विधान परिषद समूह के नेता सतेज पाटिल ने कहा, "कपास खरीद केंद्रों की संख्या बढ़ाने की मांग उठाई गई, लेकिन कोई निर्णय नहीं लिया गया। खजाने में पैसे की कमी है, फिर भी नारेबाजी खूब हो रही है। यही महायुति सरकार की वास्तविकता है। सरकार ने इतनी घोषणाएं की हैं कि उन्हें लागू करने में बजट की कमी हो जाएगी।"

जयंत पाटिल ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के इस दावे का खंडन किया कि महाराष्ट्र निवेश आकर्षित करने और बड़ी संख्या में समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर करने में अग्रणी है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन कंपनियों के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए हैं, वे वास्तव में राज्य में निवेश नहीं कर रही हैं और कोई ठोस निवेश नहीं हुआ है, जिससे बेरोजगारी की समस्या अनसुलझी बनी हुई है।

उन्होंने आगे कहा कि विपक्ष ने राज्य में कानून व्यवस्था की स्थिति को लेकर गंभीर चिंताएं जताईं, लेकिन सरकार इस मुद्दे पर ठोस जवाब देने में विफल रही।

संपादकीय दृष्टिकोण

जबकि वास्तविक समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया। यह स्थिति चिंताजनक है और सरकार को इस पर विचार करने की आवश्यकता है।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महाराष्ट्र विधानसभा का शीतकालीन सत्र कब समाप्त हुआ?
महाराष्ट्र विधानसभा का शीतकालीन सत्र 14 दिसंबर को समाप्त हुआ।
विपक्ष ने सरकार पर क्या आरोप लगाए?
विपक्ष ने आरोप लगाया कि सत्र विदर्भ क्षेत्र के किसानों और नागरिकों को कोई राहत नहीं दे सका।
किसने सत्र के दौरान घोषणाओं की कमी पर सवाल उठाया?
कांग्रेस विधायक दल के नेता विजय वडेट्टीवार और अन्य विपक्षी नेताओं ने इस पर सवाल उठाया।
सरकार ने किस क्षेत्र के लिए कोई घोषणा नहीं की?
सरकार ने विदर्भ क्षेत्र के लिए कोई घोषणा नहीं की।
क्या यह सत्र चुनावी लाभ के लिए आयोजित किया गया था?
विपक्ष का दावा है कि यह सत्र मुख्य रूप से चुनावी लाभ के लिए आयोजित किया गया था।
राष्ट्र प्रेस
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