चक्की चालनासन: वजन नियंत्रण और पीसीओडी की समस्या का समाधान
सारांश
Key Takeaways
- वजन नियंत्रण: चक्की चालनासन वजन को नियंत्रित करने में सहायक है।
- पीसीओडी से राहत: यह महिलाओं में पीसीओडी की समस्या को कम करता है।
- शारीरिक मजबूती: यह शरीर के विभिन्न हिस्सों को मजबूत बनाता है।
- मानसिक शांति: नियमित अभ्यास से मानसिक शांति प्राप्त होती है।
- सावधानियाँ: गर्भवती और पीठ दर्द वाले लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए।
नई दिल्ली, 23 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। आज की असामान्य दिनचर्या शरीर को अनगिनत बीमारियों का शिकार बना रही है। ऐसे में योगासन के माध्यम से तन-मन को स्वस्थ रखा जा सकता है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि एक प्रभावी आसन का नियमित अभ्यास किया जाए, जिसे चक्की चालनासन कहा जाता है।
मोरारजी देसाई नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ योगा (एमडीएनआईवाई) के अनुसार, चक्की चालनासन या मिल चर्निंग पोज एक साधारण लेकिन अत्यन्त प्रभावी योग आसन है। यह आसन पारंपरिक चक्की (जिससे अनाज पीसा जाता है) चलाने की क्रिया की नकल करता है और शरीर के कई हिस्सों को लाभ पहुँचाता है।
एमडीएनआईवाई के विशेषज्ञों का कहना है कि नियमित अभ्यास से यह आसन न केवल शारीरिक स्वास्थ्य में सुधार करता है, बल्कि मानसिक शांति भी प्रदान करता है। इसके नियमित अभ्यास से यह पेट, कमर, पीठ और पेल्विक क्षेत्र को मजबूत बनाता है और कई स्वास्थ्य समस्याओं से राहत दिलाता है।
चक्की चालनासन करने के लिए सबसे पहले जमीन पर सीधे पैर फैलाकर दंडासन की मुद्रा में बैठें। दोनों पैरों को थोड़ा खोलें और पैरों के बीच जगह बनाएं। इसके बाद दोनों हाथों को आगे की ओर फैलाएं, उंगलियां इंटरलॉक करें। पीठ सीधी रखते हुए ऊपरी शरीर को गोल-गोल घुमाएं, जैसे चक्की चल रही हो- दाएं से बाएं और फिर बाएं से दाएं। इस दौरान सांस सामान्य रखें, 10-20 चक्कर एक दिशा में, फिर विपरीत दिशा में घुमाएं। शुरुआत में 1-2 मिनट से शुरू करें, धीरे-धीरे बढ़ाएं।
चक्की चालनासन के अभ्यास से कई लाभ मिलते हैं। यह पेट की चर्बी कम करता है और मांसपेशियों को टोन करता है, पेट की अतिरिक्त चर्बी को घटाने में मदद करता है और आंतों को गैस, कब्ज और अपच से राहत दिलाता है। यह पीठ और कमर को मजबूती देता है, जिससे साइटिका से बचाव होता है।
महिलाओं के लिए यह विशेष लाभकारी है। यह गर्भाशय की मांसपेशियों को मजबूत करता है, जिससे पीरियड्स नियमित होते हैं, दर्द कम होता है, पीसीओडी/पीसीओएस की समस्या को दूर करने में मदद करता है, और प्रसव के बाद अतिरिक्त वजन घटाने में भी सहायक है। साथ ही, पूरे शरीर में ब्लड फ्लो बढ़ता है, तनाव कम होता है और कोर मसल्स मजबूत होते हैं।
हालांकि, कुछ सावधानियां बरतना भी आवश्यक है। यदि आप गर्भावस्था में हैं, तो डॉक्टर से सलाह लेना न भूलें। गंभीर पीठ दर्द, स्लिप डिस्क, स्पाइनल समस्या या हाल की सर्जरी के मामले में यह आसन न करें। आसन करते समय यदि पैरों या पीठ में तेज दर्द हो तो इसे नजरअंदाज करें। शुरुआत में धीरे-धीरे करें, ज्यादा जोर न लगाएं।