क्या डॉक्टरों की फीस डिग्री के अनुसार तय की जाए? व्यापारियों की मांगें क्या हैं?
सारांश
Key Takeaways
- दवाओं पर जीएसटी में कमी की मांग
- डॉक्टरों की फीस को डिग्री के अनुसार निर्धारित करने की आवश्यकता
- महंगाई के कारण गरीबों की बढ़ती मुश्किलें
- सर्राफा उद्योग के लिए जीएसटी में कमी की अपील
- सरकार की जीएसटी नीति पर सवाल
झांसी, 23 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। आम बजट 2026-2027 के आने में केवल कुछ ही दिन बचे हैं। इस स्थिति में विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े बजट को लेकर अलग-अलग राय प्रस्तुत की जा रही हैं। बजट के आगमन से पहले व्यापारियों ने दवाओं से लेकर सोने तक जीएसटी घटाने की मांग की है।
इस संदर्भ में मेडिसिन ट्रेडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेंद्र अग्रवाल ने कहा कि सरकार को दवाओं, डॉक्टरों की फीस और नर्सिंग चार्ज पर एक स्पष्ट सीमा निर्धारित करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह तय होना चाहिए कि कोई व्यक्ति अधिकतम कितना शुल्क ले सकता है।
अग्रवाल ने समाचार एजेंसी राष्ट्र प्रेस से बातचीत में उदाहरण देते हुए कहा कि जो दवाएं जन औषधि केंद्रों पर 8 रुपए में मिलती हैं, वही खुले बाजार में 150 रुपए तक बिक रही हैं, जबकि दोनों कीमतें सरकार द्वारा मान्य हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि गरीब जनता को सस्ती दवाएं उपलब्ध कराने के लिए हर दवा पर कीमत की कैपिंग की जानी चाहिए और डॉक्टरों की फीस भी उनकी डिग्री के अनुसार निर्धारित की जानी चाहिए। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग में व्याप्त अनियमितताओं को गंभीर बताते हुए सुधार की आवश्यकता पर बल दिया।
वहीं, सर्राफा कारोबारी उदय सोनी ने कहा कि व्यापारियों को इस बजट से बड़ी उम्मीदें हैं। उन्होंने बताया कि सोने-चांदी की कीमतों में जबरदस्त वृद्धि के कारण स्वर्णकार काफी परेशान हैं। उदय सोनी ने आशा व्यक्त की कि सरकार सर्राफा कारोबारियों की समस्याओं पर ध्यान देगी।
उन्होंने कहा कि फिलहाल सोने और चांदी पर 3 प्रतिशत जीएसटी लगाया जा रहा है, जिसे घटाकर 2 प्रतिशत या आधा किया जाना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने कारीगरों के हितों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि सर्राफा उद्योग लेबर पर निर्भर है। इस प्रकार, लेबर पर लगने वाला जीएसटी पूरी तरह समाप्त किया जाना चाहिए।
कारोबारी मेहताब आलम ने कहा कि यदि बजट गरीबों की भलाई को ध्यान में रखकर बनाया जाए तो यह एक अच्छी पहल होगी। उन्होंने महंगाई का जिक्र करते हुए कहा कि बढ़ती कीमतों के कारण गरीब आदमी अब सोना नहीं खरीद पा रहा है।
उन्होंने तुलना करते हुए कहा कि पहले जहां एक लाख रुपए में शादी हो जाया करती थी, वहीं आज उसी रकम में एक तोला सोना भी मुश्किल से आता है। मेहताब आलम ने मांग की कि सोने पर लगने वाला जीएसटी काफी कम किया जाना चाहिए और घर निर्माण में उपयोग होने वाले सामानों पर भी जीएसटी घटाई जानी चाहिए।
इसके अलावा, ट्रेडर नवाब कुरैशी ने सरकार की जीएसटी नीति पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकार अपनी मर्जी से जनता पर जीएसटी थोप रही है, जबकि आम लोग पहले से ही महंगाई से जूझ रहे हैं। नवाब कुरैशी ने आरोप लगाया कि सरकार ने शिक्षा पर 18 प्रतिशत जीएसटी लगाया है, जबकि दावा किया जा रहा है कि नोटबुक, पेंसिल और अन्य वस्तुओं पर जीएसटी 12 प्रतिशत से घटाकर शून्य कर दी गई है। उन्होंने कहा कि इस तरह के फैसलों से आम जनता को वास्तविक रूप से कोई खास राहत नहीं मिल रही है।