पश्चिम बंगाल चुनाव: दार्जिलिंग, कलिम्पोंग और कुर्सियांग में रोचक पंचकोणीय मुकाबला

Click to start listening
पश्चिम बंगाल चुनाव: दार्जिलिंग, कलिम्पोंग और कुर्सियांग में रोचक पंचकोणीय मुकाबला

सारांश

पश्चिम बंगाल की विधानसभा चुनावों में दार्जिलिंग, कलिम्पोंग और कुर्सियांग में पंचकोणीय मुकाबला होने जा रहा है। यहां भाजपा, तृणमूल कांग्रेस, वाम मोर्चा और अन्य दलों के बीच जंग देखने को मिलेगी। इस चुनाव में गोरखा मतदाता महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

Key Takeaways

  • पश्चिम बंगाल की 294 विधानसभा सीटों पर चुनाव हो रहे हैं।
  • दार्जिलिंग, कलिम्पोंग और कुर्सियांग में पंचकोणीय मुकाबला है।
  • गोरखा मतदाता महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
  • आईजीजेएफ की भागीदारी से समीकरण बदल सकते हैं।
  • राजनीतिक दलों के बीच कड़ा मुकाबला हो रहा है।

कोलकाता, 30 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। पश्चिम बंगाल की 294 विधानसभा सीटों में से अधिकांश पर आगामी महीने में दो चरणों में मतदान होगा, जिसमें चार-कोणीय मुकाबला देखने को मिलेगा। वहीं, दार्जिलिंग, कलिम्पोंग और कुर्सियांग की तीन पहाड़ी सीटों पर पंचकोणीय मुकाबला होने की संभावना है।

अधिकांश विधानसभा सीटों पर चार प्रमुख प्रतिस्पर्धी दल हैं: तृणमूल कांग्रेस, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), सीपीआई-एम के नेतृत्व वाला वाम मोर्चा और अखिल भारतीय धर्मनिरपेक्ष मोर्चा (एआईएसएफ) गठबंधन और कांग्रेस

हालांकि, कुर्सियांग, कलिम्पोंग और दार्जिलिंग में चुनावी मुकाबला स्पष्ट रूप से पंचकोणीय होगा।

इन तीन पहाड़ी निर्वाचन क्षेत्रों में प्रतिस्पर्धा करने वाले प्रमुख दलों में भाजपा (जो बिमल गुरुंग द्वारा स्थापित गोरखा जनमुक्ति मोर्चा, जीजेएम), अनित थापा द्वारा स्थापित भारतीय गोरखा प्रजातांत्रिक मोर्चा, अजय एडवर्ड्स द्वारा स्थापित भारतीय गोरखा जनशक्ति मोर्चा, आईजीजेएफ, वाम मोर्चा-एआईएसएफ गठबंधन और कांग्रेस शामिल हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आईजीजेएफ द्वारा स्वतंत्र रूप से उम्मीदवार उतारने से जीजेएम समर्थित भाजपा और तृणमूल कांग्रेस समर्थित बीजीपीएम दोनों के लिए समीकरण जटिल हो गए हैं, विशेषकर दार्जिलिंग, कलिम्पोंग और कुर्सियांग में, जहां गोरखा मतदाता चुनावी परिणामों में निर्णायक भूमिका निभाते हैं।

हालांकि, आधिकारिक तौर पर सभी प्रतिद्वंद्वी दलों का दावा है कि आईजीजेएफ के प्रवेश से इन निर्वाचन क्षेत्रों में उनकी जीत आसान हो गई है।

एक ओर, भाजपा और उसके पहाड़ी सहयोगी जीजेएम का तर्क है कि चूंकि आईजीजेएफ को पहाड़ियों में भाजपा विरोधी ताकत के रूप में देखा जाता है, इसलिए उसके उम्मीदवार भाजपा विरोधी और जीजेएम विरोधी गोरखा वोट बैंक में सेंध लगाकर जीत हासिल करेंगे।

दूसरी ओर, बीजीपीएम और तृणमूल कांग्रेस दोनों का दावा है कि आईजीजेएफ मुख्य रूप से भाजपा-जीजेएम गठबंधन के मुख्य वोट बैंक को नुकसान पहुंचाएगा, जिससे इन निर्वाचन क्षेत्रों में बीजीपीएम-तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवारों की जीत की संभावना बढ़ जाएगी।

हालांकि, आईजीजेएफ प्रमुख अजय एडवर्ड्स इन आकलनों से असहमत हैं। उनके अनुसार, पहाड़ियों के लोग, विशेषकर गोरखा, स्थायी राजनीतिक समाधान के संबंध में वर्षों से किए गए अधूरे वादों से निराश हैं, जिनमें अलग गोरखालैंड राज्य की मांग भी शामिल है।

ऐसी स्थिति में, उन्होंने कहा, इन निर्वाचन क्षेत्रों के मतदाता किसी वैकल्पिक राजनीतिक दल को चुन सकते हैं, जिसके विधायक विधानसभा में पहाड़ी मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठा सकें।

Point of View

कलिम्पोंग और कुर्सियांग की पहाड़ी सीटों पर पंचकोणीय मुकाबला देखने को मिल रहा है। राजनीतिक दलों की जंग में गोरखा मतदाता की अहमियत को नकारा नहीं जा सकता। यह चुनाव न केवल राजनीतिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि क्षेत्र की स्थायी राजनीतिक समस्याओं का समाधान भी खोज रहा है।
NationPress
31/03/2026

Frequently Asked Questions

पश्चिम बंगाल चुनाव कब होंगे?
पश्चिम बंगाल की विधानसभा चुनाव अगले महीने दो चरणों में होंगे।
दार्जिलिंग और कलिम्पोंग में कौन सी पार्टियाँ मुकाबला कर रही हैं?
इन क्षेत्रों में भाजपा, तृणमूल कांग्रेस, वाम मोर्चा, आईजीजेएफ और अन्य दल मुकाबला कर रहे हैं।
गोरखा मतदाता का चुनाव परिणाम पर क्या प्रभाव होगा?
गोरखा मतदाता चुनाव परिणामों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, खासकर इन पहाड़ी निर्वाचन क्षेत्रों में।
आईजीजेएफ की भागीदारी से क्या बदलाव आएगा?
आईजीजेएफ की भागीदारी से चुनावी समीकरण में बदलाव आ सकता है, जिससे अन्य दलों को फायदा या नुकसान हो सकता है।
इस चुनाव में किसका वोट बैंक प्रभावित होगा?
आईजीजेएफ के आने से भाजपा-जीजेएम गठबंधन का वोट बैंक प्रभावित हो सकता है।
Nation Press