'महिला आरक्षण का कानून बिना विलंब के लागू होना चाहिए': पद्म श्री सम्मानित लीबिया लोबो सरदेसाई

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'महिला आरक्षण का कानून बिना विलंब के लागू होना चाहिए': पद्म श्री सम्मानित लीबिया लोबो सरदेसाई

सारांश

लीबिया लोबो सरदेसाई ने महिला आरक्षण बिल को लेकर अपनी चिंता जताते हुए इसे चुनावी रणनीति करार दिया है। उनके अनुसार, महिलाओं को उचित प्रतिनिधित्व दिलाने के लिए इस बिल को बिना किसी देरी के लागू करना आवश्यक है।

Key Takeaways

  • महिला आरक्षण बिल को बिना देरी के लागू करना चाहिए।
  • महिलाओं का प्रतिनिधित्व 50%25 है, फिर भी उन्हें केवल 33%25 आरक्षण तक सीमित रखा गया है।
  • राजनीतिक दलों को इस मुद्दे को गंभीरता से लेना चाहिए।

नई दिल्ली, 15 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। गोवा की पद्म श्री से सम्मानित और 102 साल की स्वतंत्रता सेनानी लीबिया लोबो सरदेसाई ने बुधवार को महिला आरक्षण बिल पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह कानून सराहनीय है, लेकिन साथ ही यह अत्यंत निराशाजनक भी है और इसे एक चुनावी रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।

राष्ट्र प्रेस से ​​बात करते हुए सरदेसाई ने बताया कि यह एक सकारात्मक बिल है और इसकी आवश्यकता है, लेकिन 27 वर्षों का समय बीत चुका है और इसे अब तक लागू नहीं किया गया है। अब कहा जा रहा है कि इसके लिए और 3 साल लगेंगे। यह अब कोई भी दिन लागू नहीं होने वाला।

उन्होंने कहा कि देश की जनसंख्या में महिलाओं का योगदान 50 प्रतिशत है, फिर भी उन्हें केवल 33 प्रतिशत आरक्षण पर ही रोक दिया गया है। आज महिलाएं बहुत आगे बढ़ चुकी हैं। वे देश की शासन व्यवस्था में सक्षम हैं, लेकिन उन्हें यह अवसर नहीं दिया जा रहा है। यह अत्यंत गलत है। यह बिल तुरंत पास होना चाहिए था, लेकिन वे इसे जनगणना और परिसीमन के बाद लागू करने की बात कर रहे हैं। इतनी देरी क्यों? क्या इसका जनगणना से कोई संबंध है? उन्हें पहले से ही पता है कि आधी जनसंख्या महिलाएं हैं।

इस बिल को चुनावी स्टंट बताते हुए सरदेसाई ने कहा कि यह महिलाओं के कल्याण के लिए नहीं लाया जा रहा है। यह केवल महिला वोटरों को आकर्षित करने की एक चुनावी चाल है। ऐसा ही लगता है। अन्यथा, इसमें इतना समय क्यों लग रहा है?

उन्होंने यह सवाल उठाया कि बिल पास होने के बाद महिलाओं को असली प्रतिनिधित्व कब मिलेगा। महिलाओं को प्रतिनिधित्व तो मिलेगा, लेकिन 3 साल बाद। हम पहले ही इतना लंबा इंतजार कर चुके हैं; अब और इंतजार नहीं कर सकते। परिसीमन और जनगणना जैसी शर्तें केवल महिलाओं पर क्यों लागू की जा रही हैं? ये नियम सांसदों और विधायकों के प्रतिनिधित्व पर खुद क्यों लागू नहीं होते?

लीबिया लोबो सरदेसाई ने राजनीतिक दलों पर भी निशाना साधते हुए कहा कि जब कांग्रेस सत्ता में थी, तो भाजपा ने इसका विरोध किया था। अब भाजपा सत्ता में है और कांग्रेस की आलोचना कर रही है। दोनों ही पार्टियाँ इसे गंभीरता से नहीं ले रही हैं। अब भाजपा इसका उपयोग केवल एक चुनावी रणनीति के रूप में कर रही है।

उन्होंने जोर देकर कहा कि इस बिल को लागू करने में कोई भी देरी नहीं होनी चाहिए और इसे बिना किसी शर्त के, शीघ्रता से लागू किया जाना चाहिए।

Point of View

NationPress
16/04/2026

Frequently Asked Questions

महिला आरक्षण बिल का उद्देश्य क्या है?
महिला आरक्षण बिल का उद्देश्य संसद और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण प्रदान करना है, जिससे उनका राजनीतिक प्रतिनिधित्व बढ़ सके।
इस बिल को लागू होने में इतनी देरी क्यों हो रही है?
इस बिल को लागू करने में देरी का कारण जनगणना और परिसीमन जैसी शर्तें बताई जा रही हैं, जो कई जानकारों के अनुसार आवश्यक नहीं हैं।
क्या यह बिल सिर्फ चुनावी स्टंट है?
कुछ विश्लेषकों का मानना है कि यह बिल महिलाओं के कल्याण के लिए नहीं, बल्कि चुनावी लाभ के लिए पेश किया जा रहा है।
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