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विश्व कछुआ दिवस 2026: इकोसिस्टम के संरक्षक कछुए, भारत में 30 प्रजातियाँ संकट में

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विश्व कछुआ दिवस 2026: इकोसिस्टम के संरक्षक कछुए, भारत में 30 प्रजातियाँ संकट में

सारांश

23 मई को विश्व कछुआ दिवस पर एक ज़रूरी याद — भारत में 30 मीठे पानी की प्रजातियों में से 26 संरक्षण सूची में हैं, फिर भी हॉक्सबिल जैसी प्रजातियाँ घोर संकट में हैं। प्लास्टिक, अवैध व्यापार और आवास-नाश इस प्राचीन जीव के अस्तित्व को चुनौती दे रहे हैं।

मुख्य बातें

विश्व कछुआ दिवस प्रतिवर्ष 23 मई को मनाया जाता है; इसकी शुरुआत वर्ष 2000 में अमेरिकन टॉरटॉइस रेस्क्यू ने की थी।
भारत में मीठे पानी के कछुओं की लगभग 30 प्रजातियाँ हैं, जिनमें 26 को वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची-I के तहत सर्वोच्च संरक्षण प्राप्त है।
समुद्री कछुओं की पाँच प्रजातियाँ — ऑलिव रिडले, ग्रीन टर्टल, लॉगरहेड, हॉक्सबिल और लेदरबैक — भारतीय तटों पर पाई जाती हैं।
IUCN की रेड लिस्ट में हॉक्सबिल टर्टल को घोर संकटग्रस्त श्रेणी में रखा गया है।
प्रयागराज में 30 किलोमीटर लंबा कछुआ अभयारण्य और उत्तर प्रदेश में तीन संरक्षण केंद्र स्थापित हैं।

विश्व कछुआ दिवस प्रतिवर्ष 23 मई को मनाया जाता है, और इस अवसर पर यह समझना ज़रूरी है कि सख्त खोल वाला यह धीमा जीव — कछुआ — पारिस्थितिकी तंत्र के लिए कितना अपरिहार्य है। जल और स्थल दोनों पर पाया जाने वाला यह शांत स्वभाव का सरीसृप नदियों और समुद्रों के पारिस्थितिकी संतुलन को बनाए रखने में निर्णायक भूमिका निभाता है। इसके बिना खाद्य श्रृंखला और जलीय पर्यावरण दोनों पर गहरा असर पड़ सकता है।

विश्व कछुआ दिवस: उद्देश्य और इतिहास

यह दिवस सर्वप्रथम वर्ष 2000 में अमेरिकन टॉरटॉइस रेस्क्यू संस्था द्वारा आरंभ किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य कछुओं के लुप्त होते आवासों की रक्षा करना और उनके संरक्षण के प्रति वैश्विक जागरूकता बढ़ाना है। गौरतलब है कि दुनियाभर में कछुओं की सैकड़ों प्रजातियाँ अस्तित्व के संकट से जूझ रही हैं।

भारत में कछुओं की स्थिति

भारत में मीठे पानी के कछुओं की लगभग 30 प्रजातियाँ पाई जाती हैं, जिनमें से 26 प्रजातियों को वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची-I के अंतर्गत उच्चतम स्तर का संरक्षण प्राप्त है। असम, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश में कछुओं की प्रजातीय विविधता सर्वाधिक है।

समुद्री कछुओं की बात करें तो भारत में पाँच प्रमुख प्रजातियाँ पाई जाती हैं — ऑलिव रिडले, ग्रीन टर्टल, लॉगरहेड, हॉक्सबिल और लेदरबैक। इन सभी को भी अनुसूची-I के तहत संरक्षण प्राप्त है। इंडियन टेंट टर्टल को नदियों में अवैध खनन के कारण विशेष खतरा बना रहता है।

वैश्विक संकट: IUCN की चेतावनी

इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर (IUCN) की रेड लिस्ट के अनुसार कई प्रजातियाँ संकटग्रस्त श्रेणी में हैं। हॉक्सबिल टर्टल को घोर संकटग्रस्त (Critically Endangered) वर्ग में रखा गया है। आवास का विनाश, जलवायु परिवर्तन, प्लास्टिक प्रदूषण और अवैध व्यापार — ये चार प्रमुख कारण कछुओं के अस्तित्व के लिए सबसे बड़ी चुनौतियाँ हैं।

सरकार के संरक्षण प्रयास

केंद्र और राज्य सरकारों ने कछुओं की सुरक्षा के लिए कई ठोस कदम उठाए हैं। 'वन्यजीव आवासों का एकीकृत विकास' योजना के तहत राज्यों को वित्तीय सहायता दी जाती है। वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो अवैध शिकार और व्यापार पर निगरानी रखता है।

उत्तर प्रदेश में कुकरैल (लखनऊ), सारनाथ (वाराणसी) और चंबल (इटावा) में कछुआ संरक्षण केंद्र स्थापित किए गए हैं। इसके अतिरिक्त प्रयागराज में 30 किलोमीटर लंबा कछुआ अभयारण्य भी बनाया गया है, जो देश के सबसे बड़े ऐसे संरक्षण क्षेत्रों में से एक है।

कछुओं के बारे में रोचक तथ्य

कछुए सरीसृप वर्ग के जीव हैं और उनका कठोर खोल उनके कंकाल का अभिन्न हिस्सा होता है — वे इसे उतार नहीं सकते। ये शीत-रक्त (cold-blooded) प्राणी हैं और लंबे समय तक बिना भोजन के जीवित रह सकते हैं। कुछ प्रजातियाँ पूर्णतः स्थलीय होती हैं, जबकि अन्य मीठे पानी या समुद्र में पाई जाती हैं।

विश्व कछुआ दिवस पर यह संकल्प लेना आवश्यक है कि प्लास्टिक के उपयोग को कम करके, अवैध व्यापार की सूचना देकर और संरक्षण अभियानों में भागीदारी निभाकर हम इन प्राचीन जीवों को बचाने में अपना योगदान दे सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

अभयारण्य और संरक्षण केंद्र भी हैं — लेकिन ज़मीनी हकीकत यह है कि नदियों में अवैध खनन और प्लास्टिक प्रदूषण पर नियंत्रण अभी भी अपर्याप्त है। हॉक्सबिल का घोर संकटग्रस्त दर्जा यह बताता है कि कागज़ी संरक्षण और वास्तविक संरक्षण के बीच की खाई अभी पाटी नहीं गई। विश्व कछुआ दिवस जागरूकता का अवसर है, लेकिन असली परीक्षा अवैध व्यापार नेटवर्क को तोड़ने और नदी-तटीय खनन पर सख्त कार्रवाई में है।
RashtraPress
8 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विश्व कछुआ दिवस कब और क्यों मनाया जाता है?
विश्व कछुआ दिवस प्रतिवर्ष 23 मई को मनाया जाता है। इसकी शुरुआत वर्ष 2000 में अमेरिकन टॉरटॉइस रेस्क्यू संस्था ने की थी, जिसका उद्देश्य कछुओं के लुप्त होते आवासों की रक्षा और उनके संरक्षण के प्रति वैश्विक जागरूकता बढ़ाना है।
भारत में कछुओं की कितनी प्रजातियाँ पाई जाती हैं?
भारत में मीठे पानी के कछुओं की लगभग 30 प्रजातियाँ पाई जाती हैं, जिनमें से 26 को वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची-I के तहत उच्चतम संरक्षण प्राप्त है। इसके अलावा समुद्री कछुओं की पाँच प्रमुख प्रजातियाँ — ऑलिव रिडले, ग्रीन टर्टल, लॉगरहेड, हॉक्सबिल और लेदरबैक — भी भारतीय जल में पाई जाती हैं।
हॉक्सबिल टर्टल को घोर संकटग्रस्त क्यों माना जाता है?
IUCN की रेड लिस्ट के अनुसार हॉक्सबिल टर्टल को घोर संकटग्रस्त (Critically Endangered) श्रेणी में रखा गया है। इसके प्रमुख कारण हैं — आवास का विनाश, अवैध व्यापार, प्लास्टिक प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन के कारण समुद्री तापमान में वृद्धि।
भारत में कछुओं के संरक्षण के लिए क्या कदम उठाए गए हैं?
भारत सरकार ने वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत कठोर दंड का प्रावधान किया है और वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो को निगरानी की जिम्मेदारी दी है। उत्तर प्रदेश में कुकरैल (लखनऊ), सारनाथ (वाराणसी) और चंबल (इटावा) में संरक्षण केंद्र स्थापित हैं, और प्रयागराज में 30 किलोमीटर लंबा कछुआ अभयारण्य भी बनाया गया है।
कछुए पारिस्थितिकी तंत्र के लिए क्यों ज़रूरी हैं?
कछुए नदी और समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र को स्वस्थ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ये खाद्य श्रृंखला के अहम हिस्से हैं और जलीय वनस्पति व जीवों के संतुलन को बनाए रखते हैं। इनके अभाव में पारिस्थितिकी तंत्र का संतुलन बिगड़ सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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