शीत्सांग की 15वीं पंचवर्षीय योजना: जैव विविधता सर्वेक्षण और पारिस्थितिक सुरक्षा के लिए बड़े कदम
सारांश
मुख्य बातें
शीत्सांग स्वायत्त प्रदेश ने 15वीं पंचवर्षीय योजना अवधि के दौरान अपनी पारिस्थितिक सुरक्षा को सुदृढ़ करने के लिए एक व्यापक कार्ययोजना की घोषणा की है। 29 मई को शीत्सांग स्वायत्त प्रदेश सरकार के सूचना कार्यालय द्वारा आयोजित एक विशेष संवाददाता सम्मेलन में यह जानकारी साझा की गई, जिसके अनुसार शीत्सांग को एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय पारिस्थितिक सुरक्षा अवरोध के रूप में मजबूत करना इस योजना का केंद्रीय लक्ष्य है।
मुख्य घटनाक्रम
इस योजना के अंतर्गत पारिस्थितिक संरक्षण प्रणालियों का निर्माण, जैव विविधता का आधारभूत सर्वेक्षण, प्रजाति सूचीकरण, और जैव विविधता संरक्षण एवं शासन प्रणाली के आधुनिकीकरण को प्रमुखता दी जाएगी। यह पहल शीत्सांग के दीर्घकालिक पर्यावरण संरक्षण ढाँचे को नई दिशा देने का प्रयास है।
जैव विविधता सर्वेक्षण की विस्तृत योजना
योजना के तहत शीत्सांग के 7 क्षेत्रों और शहरों तथा 74 काउंटियों और जिलों में जैव विविधता का पहला आधारभूत सर्वेक्षण और प्रजाति सूचीकरण शुरू किया जाएगा। इसके साथ ही शीत्सांग की विशेषताओं के अनुरूप एक जैव विविधता सूची और संरक्षण मूल्यांकन प्रणाली भी स्थापित की जाएगी। गौरतलब है कि यह इस क्षेत्र में इस पैमाने पर होने वाला पहला व्यापक सर्वेक्षण होगा।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
शीत्सांग स्वायत्त क्षेत्र के कार्यकारी उपाध्यक्ष दानबा ने बताया कि शीत्सांग में लगभग सभी प्रकार के स्थलीय पारिस्थितिक तंत्र मौजूद हैं और यह वन्य वनस्पतियों, जीवों तथा सूक्ष्मजीवों से अत्यंत समृद्ध है। उनके अनुसार यह विविधता इस क्षेत्र को वैश्विक जैव विविधता के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण बनाती है।
संरक्षण नियमों का विस्तार
15वीं पंचवर्षीय योजना अवधि में शीत्सांग वनों, घास के मैदानों, आर्द्रभूमि और रेगिस्तानों जैसे विभिन्न पारिस्थितिक प्रकारों को कवर करते हुए जैव विविधता संरक्षण के लिए नए नियमों की पड़ताल करेगा और उन्हें तैयार करेगा। इन नियमों के माध्यम से संरक्षण संबंधी जिम्मेदारियों को सुनिश्चित तरीके से लागू किया जाएगा।
आगे की राह
यह ऐसे समय में आया है जब जलवायु परिवर्तन के कारण हिमालयी और तिब्बती पठार के पारिस्थितिक तंत्र पर दबाव बढ़ रहा है। शीत्सांग की यह व्यापक योजना न केवल क्षेत्रीय पर्यावरण संरक्षण को मजबूत करेगी, बल्कि राष्ट्रीय पारिस्थितिक सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी दीर्घकालिक महत्व रखती है।