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शीत्सांग में पहली जैव विविधता सर्वेक्षण परियोजना शुरू, 12 प्रमुख समूहों का होगा आकलन

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शीत्सांग में पहली जैव विविधता सर्वेक्षण परियोजना शुरू, 12 प्रमुख समूहों का होगा आकलन

सारांश

शीत्सांग में पहली बार जैव विविधता का व्यापक वैज्ञानिक सर्वेक्षण होगा — हिम तेंदुए से लेकर तिब्बती मृग तक, 12 प्रमुख समूहों का आकलन और कानूनी संरक्षण ढाँचा तैयार होगा। यह पठारी पारिस्थितिकी की रक्षा की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।

मुख्य बातें

शीत्सांग में पहली जैव विविधता आधारभूत सर्वेक्षण और प्रजाति सूचीकरण परियोजना शुरू होगी।
स्थलीय वनस्पतियों और वन्यजीवों के 12 प्रमुख समूहों का वितरण, संख्या और संरक्षण स्थिति का आकलन किया जाएगा।
वर्तमान में शीत्सांग में राष्ट्रीय स्तर पर संरक्षित 169 वनस्पति प्रजातियाँ और 246 वन्यजीव प्रजातियाँ दर्ज हैं।
'शीत्सांग स्वायत्त प्रदेश जैव विविधता संरक्षण विनियम' तैयार किया जाएगा, जो संरक्षण दायित्वों को कानूनी रूप से बाध्यकारी बनाएगा।
न्यिंगची राष्ट्रीय वनस्पति उद्यान के निर्माण में तेज़ी लाई जाएगी और एक समग्र प्राकृतिक संरक्षण प्रणाली विकसित होगी।

शीत्सांग स्वायत्त प्रदेश में पहली बार एक व्यापक जैव विविधता आधारभूत सर्वेक्षण और प्रजाति सूचीकरण परियोजना की शुरुआत की जाएगी। शीत्सांग सरकार के कार्यकारी उपाध्यक्ष तेनपा ने हाल ही में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह जानकारी दी। इस पहल का उद्देश्य प्रदेश की समृद्ध पारिस्थितिक विरासत को वैज्ञानिक आधार पर दर्ज करना और उसके संरक्षण को कानूनी ढाँचे में ढालना है।

परियोजना का दायरा और उद्देश्य

इस सर्वेक्षण के अंतर्गत स्थलीय वनस्पतियों और वन्य जीवों के 12 प्रमुख समूहों का व्यापक आकलन किया जाएगा। इनमें हिम तेंदुआ, तिब्बती मृग, विशाल सरू और तिब्बती यू (एक सदाबहार शंकुधारी वृक्ष) जैसी दुर्लभ प्रजातियाँ शामिल हैं। परियोजना के तहत हज़ारों प्रजातियों का पंजीकरण किया जाएगा तथा विशेषताओं पर आधारित जैव विविधता सूची और संरक्षण मूल्यांकन प्रणाली स्थापित की जाएगी।

वर्तमान संरक्षण स्थिति

तेनपा के अनुसार, मृग, काले गर्दन वाले सारस और लाल हिरण जैसी प्रमुख प्रजातियों की संख्या में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है। वर्तमान में शीत्सांग में राष्ट्रीय स्तर पर संरक्षित दुर्लभ वनस्पतियों की 169 प्रजातियाँ तथा वन्य जीवों की 246 प्रजातियाँ पंजीकृत हैं। यह आँकड़े इस क्षेत्र की असाधारण जैव विविधता और अद्वितीय पारिस्थितिक महत्व को रेखांकित करते हैं।

कानूनी ढाँचा और नीतिगत पहल

तेनपा ने बताया कि प्रदेश सरकार 'शीत्सांग स्वायत्त प्रदेश जैव विविधता संरक्षण विनियम' तैयार करने की दिशा में कार्यरत है। इस विनियम के माध्यम से प्रत्येक प्रजाति, वन, घासभूमि, आर्द्रभूमि और रेगिस्तानी पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण संबंधी दायित्वों को कानूनी रूप से बाध्यकारी बनाया जाएगा। इससे केवल जागरूकता-आधारित संरक्षण प्रयासों को एक सुदृढ़ विधिक ढाँचे में परिवर्तित किया जा सकेगा।

न्यिंगची वनस्पति उद्यान और समग्र संरक्षण प्रणाली

प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह भी घोषणा की गई कि न्यिंगची राष्ट्रीय वनस्पति उद्यान के निर्माण में तेज़ी लाई जाएगी। राष्ट्रीय उद्यानों और प्राकृतिक संरक्षण क्षेत्रों को आधार बनाकर तथा विभिन्न प्राकृतिक पार्कों को पूरक मानते हुए एक समग्र प्राकृतिक संरक्षण प्रणाली विकसित की जाएगी। इसका लक्ष्य पठारी क्षेत्र की जैव विविधता और पारिस्थितिक संपदा की दीर्घकालिक सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

शासन क्षमता का आधुनिकीकरण

तेनपा ने स्पष्ट किया कि शीत्सांग अपनी जैव विविधता सर्वेक्षण, मूल्यांकन, निगरानी, प्रारंभिक चेतावनी और नियामक प्रवर्तन क्षमताओं को व्यवस्थित रूप से सुदृढ़ करेगा। इससे प्रदेश में जैव विविधता संरक्षण की शासन व्यवस्था और प्रबंधन क्षमताओं के आधुनिकीकरण को बल मिलेगा। यह पहल ऐसे समय में आई है जब वैश्विक स्तर पर जैव विविधता संकट गहराता जा रहा है और उच्च-ऊँचाई वाले पारिस्थितिकी तंत्र जलवायु परिवर्तन के प्रति विशेष रूप से संवेदनशील माने जाते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी क्रियान्वयन की होगी — विशेषकर तब, जब उच्च-ऊँचाई वाले दुर्गम क्षेत्रों में वैज्ञानिक सर्वेक्षण की लॉजिस्टिक चुनौतियाँ असाधारण होती हैं। जैव विविधता संरक्षण विनियम का प्रस्ताव सराहनीय है, परंतु कानूनी बाध्यता तभी अर्थपूर्ण होती है जब स्वतंत्र निगरानी और पारदर्शी रिपोर्टिंग तंत्र हो। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक जलवायु परिवर्तन तिब्बती पठार के पारिस्थितिकी तंत्र को तेज़ी से प्रभावित कर रहा है, जिससे इस सर्वेक्षण की वैज्ञानिक तात्कालिकता और भी बढ़ जाती है।
RashtraPress
20 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शीत्सांग की जैव विविधता सर्वेक्षण परियोजना क्या है?
यह शीत्सांग स्वायत्त प्रदेश की पहली व्यापक जैव विविधता आधारभूत सर्वेक्षण और प्रजाति सूचीकरण परियोजना है, जिसके अंतर्गत 12 प्रमुख वनस्पति और वन्यजीव समूहों का वितरण, संख्या और संरक्षण स्थिति दर्ज की जाएगी। इसमें हज़ारों प्रजातियों का पंजीकरण और एक विशेषता-आधारित जैव विविधता सूची तैयार करना शामिल है।
इस परियोजना में कौन-सी प्रमुख प्रजातियाँ शामिल हैं?
परियोजना में हिम तेंदुआ, तिब्बती मृग, काले गर्दन वाला सारस, लाल हिरण, विशाल सरू और तिब्बती यू जैसी दुर्लभ प्रजातियाँ शामिल हैं। वर्तमान में शीत्सांग में राष्ट्रीय स्तर पर संरक्षित 169 वनस्पति और 246 वन्यजीव प्रजातियाँ दर्ज हैं।
शीत्सांग जैव विविधता संरक्षण विनियम क्या होगा?
यह एक प्रस्तावित कानूनी दस्तावेज़ है जो प्रत्येक प्रजाति, वन, घासभूमि, आर्द्रभूमि और रेगिस्तानी पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण संबंधी दायित्वों को कानूनी रूप से बाध्यकारी बनाएगा। इसका उद्देश्य जागरूकता-आधारित प्रयासों को विधिक ढाँचे में बदलना है।
न्यिंगची राष्ट्रीय वनस्पति उद्यान की क्या भूमिका होगी?
न्यिंगची राष्ट्रीय वनस्पति उद्यान समग्र प्राकृतिक संरक्षण प्रणाली का एक महत्वपूर्ण घटक होगा। राष्ट्रीय उद्यानों और संरक्षण क्षेत्रों के साथ मिलकर यह पठारी क्षेत्र की जैव विविधता की दीर्घकालिक सुरक्षा सुनिश्चित करेगा।
इस परियोजना का पठारी पारिस्थितिकी पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
यह परियोजना शीत्सांग की जैव विविधता निगरानी, प्रारंभिक चेतावनी और नियामक प्रवर्तन क्षमताओं को सुदृढ़ करेगी। इससे प्रदेश की संरक्षण शासन व्यवस्था का आधुनिकीकरण होगा और उच्च-ऊँचाई वाले पारिस्थितिकी तंत्र की बेहतर सुरक्षा संभव हो सकेगी।
राष्ट्र प्रेस
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