2 अगस्त 2026
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शीत्सांग भित्तिचित्र संग्रह: दस वर्षों के शोध के बाद 280 मंदिरों के भित्तिचित्र एक जगह

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शीत्सांग भित्तिचित्र संग्रह: दस वर्षों के शोध के बाद 280 मंदिरों के भित्तिचित्र एक जगह

सारांश

दस साल की साझा मेहनत का नतीजा — 'शीत्सांग भित्तिचित्र संग्रह' अब नौ संस्थानों के सहयोग से छह खंडों में प्रकाशित हो चुका है। 280 मंदिरों और गुफाओं के भित्तिचित्रों का यह डिजिटल-आधारित दस्तावेज़ तिब्बती चित्रकला के संरक्षण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।

मुख्य बातें

शीत्सांग भित्तिचित्र संग्रह का पूर्ण संस्करण 2 अगस्त 2026 को प्रकाशित हुआ, जो दस वर्षों के शोध का परिणाम है।
संग्रह में शीत्सांग के 7 शहरों के 280 मंदिरों, आवासों और जागीरों के भित्तिचित्र शामिल हैं।
यह श्रृंखला छह खंडों और सात पुस्तकों में प्रकाशित हुई है, जिसे चाइना साइंस पब्लिशिंग एंड मीडिया लिमिटेड ने प्रकाशित किया।
नौ पुरातत्व संस्थानों के सहयोग से तैयार इस संग्रह में दूरदराज के उपेक्षित मंदिरों और गुफाओं का भी दस्तावेजीकरण है।
शोधकर्ता छाई ह्वानपो के अनुसार, यह संग्रह भविष्य में संरक्षण योजनाओं के लिए आधार सामग्री का काम करेगा।

शीत्सांग भित्तिचित्र संग्रह का पूर्ण संस्करण 2 अगस्त 2026 को प्रकाशित हुआ — यह उपलब्धि दस वर्षों के अथक शोध और दस्तावेजीकरण का परिणाम है। चाइना साइंस पब्लिशिंग एंड मीडिया लिमिटेड द्वारा प्रकाशित यह संग्रह शीत्सांग (तिब्बत स्वायत्त प्रदेश) के सात शहरों के 280 मंदिरों, आवासों और जागीरों में मौजूद भित्तिचित्रों को समेटता है।

संग्रह की संरचना और विस्तार

यह पुस्तक श्रृंखला छह खंडों और सात पुस्तकों के रूप में प्रकाशित हुई है। इसका आधार 'शीत्सांग प्राचीन भित्तिचित्र डिजिटलीकरण परियोजना' है, जिसके अंतर्गत भित्तिचित्रों को उच्च-रिज़ॉल्यूशन डिजिटल प्रारूप में संरक्षित किया गया। इस संग्रह की एक विशेष उपलब्धि यह है कि इसमें उन दूरदराज के छोटे मंदिरों और गुफाओं के भित्तिचित्रों का भी दस्तावेजीकरण किया गया है, जिन पर अब तक शोध जगत का ध्यान बहुत कम गया था।

शोध का दायरा और विषय-वस्तु

इस संग्रह में तिब्बती भित्तिचित्रों का विस्तृत परिचय दिया गया है। भित्तिचित्रों के विषयों का प्रतिमा विज्ञान (Iconography) के आधार पर विश्लेषण किया गया है, साथ ही उनका भौगोलिक वितरण, प्रमुख विशेषताएँ और तिब्बती चित्रकला शैली के विकास का इतिहास भी समाहित है। यह संग्रह चीनी राष्ट्र की बहुजातीय और एकीकृत सांस्कृतिक संरचना को समझने के लिए महत्वपूर्ण पुरातात्विक साक्ष्य भी उपलब्ध कराता है।

नौ संस्थानों का सहयोग

इस पुस्तक श्रृंखला को हुनान प्रांतीय पुरातत्व एवं सांस्कृतिक अवशेष अनुसंधान संस्थान और शीत्सांग स्वायत्त प्रदेश के सांस्कृतिक संरक्षण अनुसंधान संस्थान समेत कुल नौ पुरातत्व संस्थानों के सहयोग से तैयार किया गया है। यह सहयोग इस परियोजना की व्यापकता और विश्वसनीयता को रेखांकित करता है।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं

श्रृंखला के संयोजक और हुनान प्रांतीय पुरातत्व एवं सांस्कृतिक अवशेष अनुसंधान संस्थान के शोधकर्ता छाई ह्वानपो ने कहा कि यह संग्रह तिब्बती भित्तिचित्रों की वर्तमान स्थिति का महत्वपूर्ण दस्तावेज है। उनके अनुसार, यह भविष्य में संरक्षण की योजनाएँ तैयार करने के लिए आधार सामग्री उपलब्ध कराएगा और तिब्बती संस्कृति के व्यापक प्रसार में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

आगे का महत्व

यह संग्रह केवल एक पुस्तक-श्रृंखला नहीं है — यह उन सांस्कृतिक धरोहरों का स्थायी अभिलेख है जो समय और प्राकृतिक क्षरण के कारण लुप्त हो सकती थीं। डिजिटलीकरण के माध्यम से संरक्षित यह सामग्री भविष्य के शोधकर्ताओं, संरक्षणकर्ताओं और कला इतिहासकारों के लिए एक अमूल्य संसाधन बनेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह ध्यान देने योग्य है कि शीत्सांग (तिब्बत) की सांस्कृतिक विरासत का दस्तावेजीकरण एक संवेदनशील भू-राजनीतिक परिप्रेक्ष्य में हो रहा है। जहाँ डिजिटलीकरण और संरक्षण निस्संदेह मूल्यवान हैं, वहीं इस बात पर भी ध्यान देना आवश्यक है कि इस सामग्री तक स्वतंत्र शोधकर्ताओं और अंतरराष्ट्रीय विद्वानों की पहुँच कितनी सुलभ होगी। तिब्बती सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण का वास्तविक मूल्य तभी सिद्ध होगा जब यह शोध वैश्विक अकादमिक समुदाय के लिए खुले रूप से उपलब्ध हो।
RashtraPress
2 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शीत्सांग भित्तिचित्र संग्रह क्या है?
यह छह खंडों और सात पुस्तकों की एक श्रृंखला है जिसमें शीत्सांग (तिब्बत स्वायत्त प्रदेश) के सात शहरों के 280 मंदिरों, आवासों और जागीरों के भित्तिचित्रों का विस्तृत दस्तावेजीकरण किया गया है। यह 'शीत्सांग प्राचीन भित्तिचित्र डिजिटलीकरण परियोजना' पर आधारित है और दस वर्षों के शोध का परिणाम है।
इस संग्रह को तैयार करने में कितने संस्थान शामिल थे?
इस पुस्तक श्रृंखला को हुनान प्रांतीय पुरातत्व एवं सांस्कृतिक अवशेष अनुसंधान संस्थान और शीत्सांग स्वायत्त प्रदेश के सांस्कृतिक संरक्षण अनुसंधान संस्थान समेत कुल नौ पुरातत्व संस्थानों के सहयोग से तैयार किया गया है।
इस संग्रह में किस प्रकार की जानकारी शामिल है?
संग्रह में तिब्बती भित्तिचित्रों का प्रतिमा विज्ञान के आधार पर विश्लेषण, उनका भौगोलिक वितरण, प्रमुख विशेषताएँ और तिब्बती चित्रकला शैली के विकास का इतिहास शामिल है। इसमें उन दूरदराज के मंदिरों और गुफाओं का भी दस्तावेजीकरण है जिन पर पहले बहुत कम ध्यान दिया गया था।
यह संग्रह भविष्य के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
शोधकर्ता छाई ह्वानपो के अनुसार, यह संग्रह तिब्बती भित्तिचित्रों की वर्तमान स्थिति का महत्वपूर्ण दस्तावेज है और भविष्य में संरक्षण योजनाएँ तैयार करने के लिए आधार सामग्री उपलब्ध कराएगा। यह तिब्बती संस्कृति के व्यापक प्रसार में भी सहायक होगा।
इस संग्रह का प्रकाशन किसने किया?
इस संग्रह का प्रकाशन चाइना साइंस पब्लिशिंग एंड मीडिया लिमिटेड ने किया है। यह 2 अगस्त 2026 को प्रकाशित हुआ।
राष्ट्र प्रेस
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